पीरियड्स में महिलाओं के शरीर में होते हैं ये बदलाव, पहचानिए अपनी शक्ति

नई दिल्ली : पीरियड्स के दौरान कई महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। कुछ महिलाओं को मुड स्विंग होता है तो कुछ को असहनीय दर्द होते हैं, कुछ को स्मेल सेंस तेज हो जाती है और किसी भी तरह की खुशबू का अहसास जल्दी होता है।

दरअसल महिलाओं के शरीर में अक्सर हार्मोन्स बदलते रहते हैं और कुछ को काफी पॉवर महसूस होता है। फोर्ब्स वुमन वेबसाइट ने टेक्सस मेडिकल स्कूल की गायनीक डॉ एलीसन डिवाइन और डॉ केसिका गैथेर (न्यूयॉर्क में प्रीनेटल सर्विसेज की डायरेक्टर) से इस बारे में बात कर रिसर्च की, जिसके मुताबिक महिलाओं में कुछ सकारात्मक बदलाव होते हैं पीरियड्स में।  इस रिपोर्ट के मुताबिक पीरियड साइकिल के 4 फेज में शरीर के अलग-अलग बदलावों में कुछ खास सेंस तेज हो जाते हैं।

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1.  6-14 दिन लंबा  (फोलेकुलर फेज)
क्या होता है बदलाव – बढ़ जाती है क्रिएटिविटी ।
इस रिपोर्ट के मुताबिक हार्मोनल बदलाव का सबसे अच्छा समय यही होता है। इस दौरान बहुत ज्यादा क्रिएटिव रहती हैं। महिलाओं के शरीर में सबसे ज्यादा क्रिएटिव एनर्जी महीने में इसी समय में रहती है। हार्मोन्स लो प्वाइंट पर रहते हैं और आप किसी भी तरह के चैलेंज का सामना आराम से कर सकती हैं।

2.  15-17 दिन   ( ओवालेट्री फेज) 
क्या होता है बदलाव – कम्युनिकेशन स्किल्स अच्छा हो जाता है।
कभी-कभी तो आप किसी से भी बात नहीं कर पाती हैं और कभी-कभी आप बात करने में काफी कॉंफिडेंट महसूस करती हैं । ऐसा आपकी पीरियड साइकिल की वजह से भी हो सकता है।
कम्युनिकेशन और कोलैबोरेशन स्किल्स महीने के इस वक्त सबसे ज्यादा होते हैं। इस समय आपका दिमाग आपको मानसिक तनाव में नहीं रहने देता और इस वक्त आप किसी भी लेवल पर काम कर सकती हैं। आप अपने ऑफिस के काम में इसका ध्यान रख सकती हैं। कोई भी अच्छी प्रेजेंटेशन इस वक्त की जा सकती है।

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3.  18-28 दिन   ( ल्युटेल फेज)

क्या होता है बदलाव – काम समय पूरा करने की जल्दी।
इस समय आपको सब काम समय पर पूरा करने की जल्दी होती है। आप हर तरह की समस्या का सामना करने को तैयार रहती हैं। चाहें पारिवारिक समस्या हो, चाहें ऑफिस की समस्या हो, चाहें बच्चों का स्ट्रेस हो आप हर समस्या निपटा सकती हैं। आप इस समय अपने फाइनेंस से जुड़ी समस्याओं का सामना कर सकती हैं।

4.   1-5 दिन ( मेंसत्र्क्शन फेज ) 

क्या होता है बदलाव – इंट्यूशन और रिफ्लेक्शन (आभास और प्रतिबिंब)
इस अवधी में कई बार आपको कुछ बातों का पूर्वाभास होता है। दरअसल इस समय में आपका राइट और लेफ्ट ब्रेन ज्यादा संतुलित रहते हैं, जिसके कारण आपको कुछ बातों का आभास होता है। इस समय आप भविष्य के सही फैसले ले सकती हैं, लेकिन इस समय में मूड-स्विंग्स का ध्यान रखना जरूरी होता है।

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