कोविड 19 के कारण अनचाहे गर्भधारण, बच्चों का जन्म और मातृ मृत्यु दर में बढ़ोतरी की संभावना

नई दिल्ली : कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन से लाखों महिलाएं चाहते हुए भी गर्भनिरोधन हासिल करने में असफल रहीं। वर्ष 2019 में स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (हेल्थ मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम) एचएमआईएस के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र द्वारा 35 लाख नसबंदी सेवा, 57 लाख आईयूसीडी, 18 लाख इंजेक्शन द्वारा गर्भनिरोधन (आईसी) प्रदान किए गए। सार्वजनिक स्वास्थ्य सेंटरों ने भी 4.1 करोड़ गर्भनिरोधक गोली सेवन चक्र, 25 लाख आपातकालीन (इमरजेंसी) गर्भनिरोधक गोली ईसीपी और 32.2 करोड़ कंडोम का वितरण किया। साथ ही वाणिज्यिक बाज़ार में 220 करोड़ कंडोम, 11.2 करोड़ ओसीपी के चक्र, 36 लाख ईसीपी, 12 लाख आईसी और 8 लाख आईयूसीडी की बिक्री हुई।

लॉकडाउन के कारण गर्भनिरोधन हासिल करने और उसके प्रयोग में काफ़ी हद तक गिरावट देखी गई। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के आदेशानुरूप सार्वजनिक हेल्थ सेंटरों ने नसबंदी और आईयूसीडी प्रदान करने के कार्यों को अगली सूचना तक निलंबित कर दिया है। आने जाने पर रोक लगने के कारण बिना डॉक्टर के पर्चे पर मिलने वाली गर्भ निरोधक दवाई, कंडोम, ओसीपी और ईसीपी हासिल करने में लोगों को काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसके प्रभाव को समझने के लिए, शीर्ष गैर-सरकारी संगठन और भारतीय निजी/गैर-सरकारी क्षेत्र में सबसे ज़्यादा क्लिनिकल परिवार नियोजन सेवाएं प्रदान करने वाली संस्था – फाउंडेशन फॉर रिप्रोडक्टिव हेल्थ सर्विसेज़ इंडिया (एफआरएचएस इंडिया) ने नीति संबंधी सूचना जारी की है, जिसमें इस लॉकडाउन के परिमाणस्वरुप सेवा प्रदान करने की क्षमता में गिरावट का अनुमान लगाया गया है।

एफआरएचएस इंडिया ने स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (हेल्थ मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम) एचएमआईएस, सोशल मार्केटिंग आंकड़ें और रिटेल ऑडिट जैसे बाहरी स्रोतों का प्रयोग कर वर्ष 2020 में बिक्री में संभावित घाटे और सेवाओं की कमी के कारण स्वास्थ्य पर प्रभाव के आंकड़ों का पता लगाया है। ये आंकड़ें निराशाजनक हैं। इस बात की सबसे ज़्यादा संभावना है कि लॉकडाउन अवधि के दौरान और उसके बाद संपूर्ण सामान्य स्थिति यानी कि सितम्बर महीने तक 25.6 लाख लोग परिवार नियोजन सेवाएं हासिल करने में असफ़ल रहेंगे। ऐसी परिस्थिति में 6.9 लाख नसबंदी सेवाएं, 9.7 लाख आईयूसीडी, 5.8 लाख आईसी, 23.08 लाख ओसीपी चक्र, 9.2 लाख ईसीपी सेवाएं रद्द होने और 405.96 लाख कंडोम प्रयोग न होने की संभावना है। इसके परिमाणस्वरुप 2.38 लाख अतिरिक्त अनचाहे गर्भधारण, 679,864 अतिरिक्त बच्चों का जन्म, 1.45 लाख अतिरिक्त गर्भपात (834,042 असुरक्षित गर्भपात सहित) और 1,743 अतिरिक्त मातृ मृत्यु होने की संभावना है। ज्यादा समय तक ऐसा रहा तो इसका प्रभाव और भी भयानक होगा। 2.95 लाख अनचाहे गर्भधारण, 8,44,483 जीवित जन्म, 1.04 असुरक्षित गर्भपात और 2,165 मातृ मृत्यु हो होने की संभावना है। सबसे खराब स्थिति यानी कि धीरे और कम मात्रा में परिवार नियोजन सेवाएं उपलब्ध होने पर 890,281 नसबंदी, 1.28 लाख आईयूसीडी, 27.69 लाख ओसीपी के चक्र, 1.08 लाख ईसीपी सेवाएं रद्द होने और500.56 लाख कंडोम प्रयोग न होने की संभावना है, जिससे कुल 27.18 लाख जोड़े परिवार नियोजन सेवाएं प्राप्त करने में असफ़ल होंगे।

फाउंडेशन फॉर रिप्रोडक्टिव हेल्थ सर्विसेज़ इंडिया के चीफ़ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर वी.एस. चन्द्रशेकर का कहना है कि जीवित जन्मों से जुड़े आंकड़ें वास्तव में और ज़्यादा हो सकते हैं, क्योंकि लॉकडाउन के दौरान कई महिलाएं गर्भपात सेवा प्राप्त करने में असफ़ल रही हैं। चूंकि अनचाहे रूप से गर्भवती हुई महिलाएं समय पर गर्भपात सेवा प्राप्त करने में असफ़ल रही वे मजबूरन बच्चे को जन्म देंगी। कपल इयर्स ऑफ़ प्रोटेक्शन के क्षेत्र में वर्ष 2019 के मुकाबले वर्ष 2020 में संपूर्ण परिवार नियोजन कार्यक्रम पर -15% से -23% तक बुरा प्रभाव होगा। लॉकडाउन के दौरान परिवार नियोजन सेवाओं में रुकावट आने के कारण लॉकडाउन हटने या उसमें ढील आने पर नसबंदी और गर्भपात सेवाओं की मांग में बढ़ोतरी आएगी। इससे हमारी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर अधिक दबाव पड़ सकता है और इन मांगों को पूरा करना मुश्किल हो सकता है।

एफआरएचएस इंडिया ने दिए हैं ये सुझाव
1. सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में बेहतर तैयारी सुनिश्चित करना
2. स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने में ज़रूरी बदलाव लाते हुए बेहतर प्रक्रिया का विकास करना और ज़रूरी आपूर्ति, सामान, दवाई आदि प्राप्त करना
3. राज्यों द्वारा एमए दवाइयों की बिक्री पर मौजूद गैर-ज़रूरी प्रतिबन्ध हटाकर दवाखानों में खुले तौर पर इन दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करना
4. सार्वजनिक क्षेत्र में इम्प्लान्ट्स उपलब्ध कराकर लोगों को परिवार नियोजन संबंधी ज़्यादा विकल्प प्रदान करना
5. बिना पर्चे पर मिलने वाली गर्भ निरोधक दवाई खासकर ईसीपी और कंडोम के विज्ञापन पर लगे प्रतिबन्ध को हटाना
6. सामाजिक विपणन संगठन और सेवाएं प्रदान करने वाली निजी/गैर-सरकारी संस्थाओं की चुनौतियों पर ध्यान देना और उनके घाटों को कम कर उनकी भागीदारी को और मजबूती प्रदान करना
7. अगर पहले ही सुधारात्मक कदम न उठाए गए तो संपूर्ण भारत द्वारा आबादी नियंत्रण और मातृ मृत्यु में जो कमी हासिल की गई है उसे गवाना पड़ सकता है। परिवार नियोजन सेवाओं का न मिलना और इन्हें प्राप्त करने में असफ़लता से परिवार नियोजन कार्यक्रम पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है और इसलिए सरकार को इस ओर ध्यान देकर इससे निपटने की ज़रूरत है।

शेयर करें

मुख्य समाचार

terrorist

कश्‍मीर में आतंकवाद बढ़ाने के लिए पाक को मिला इस देश का साथ

नई दिल्ली: तुर्की अब खुलकर कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ाने के लिए पाकिस्तान की मदद कर रहा है। बता दें कि चीन के बाद अब आगे पढ़ें »

अब पति को हर महीने 2000 रुपये का गुजारा भत्ता देगी पत्‍नी

मुजफ्फरनगर: आपने अब तक अमूमन कोर्ट की ओर से यही आदेश पढ़ा या सुना होगा कि कोर्ट ने पति को आदेश दिया है कि वह आगे पढ़ें »

ऊपर