कोरोना से बचने के लिए सरकार के प्रधान वैज्ञानिक व सलाहकार प्रो. राघवन ने दिए पांच सलाह

नई दिल्ली : लॉकडाउन के 70 दिनों के बाद अब अनलॉक 1.0 कर दिया गया है। 1 जून, 2020 से लॉकडाउन 5.0 के साथ ही अर्थव्यवस्था और सामान्य जीवन की तरफ लौट रहे हैं। विशेषज्ञ और अधिकारी सुझाव दे रहे हैं कि हमें निश्चित रूप से वायरस के साथ ही जीना सीखना होगा। टीका बनने में अभी समय लगेगा, इसलिए हमें एक नई सामान्य स्थिति में रहना होगा। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. के विजय राघवन ने वायरस के साथ ही जीने के संबंध में पांच सलाह दी है।

प्रोफेसर विजय राघवन का कहना है कि हमें अनिवार्य रूप से खुद को बदल लेना चाहिए। दवाओं और टीकों का अनुसंधान एवं विकास प्रगति पर है, लेकिन समुचित नैदानिक परीक्षणों के बाद व्यापक रूप से उनकी उपलब्धता में अभी समय लगेगा। प्रत्येक व्यक्ति के लिए दवाओं और टीकों का उत्पादन करने में बहुत समय लग सकता है। इस बीच हम महामारी का सामना करने के लिए खुद को बदल सकते हैं।

प्रो. राघवन की पांच सलाह:
1. जब कभी घर से बाहर निकलें, मास्क जरूर लगाएं
हाल के अध्ययनों से पता लगा है कि जब कभी कोई व्यक्ति बोलता है तो ड्रापलेट के लगभग 1000 छोटी बूंदें बाहर आती हैं। अगर वह व्यक्ति नोवेल कोरोना वायरस से संक्रमित है तो इनमें से प्रत्येक बूंद में हजारों कीटाणु होगे। बड़ी बूंदें आम तौर पर एक मीटर की दूरी पर जमीन पर गिर पड़ेंगी। बहरहाल, छोटी बूंदों का प्लम हवा में लंबे समय तक तैरता रह सकता है, खासकर अगर वह क्षेत्र समुचित रूप से हवादार नहीं है। बहुत से लोग जो वायरस से संक्रमित होते हैं, उनमें कोई लक्षण नहीं दिखता। इसलिए पता नहीं चलेगा कि वे संक्रमित हैं। मास्क पहनना न केवल हमें बचाता है, बल्कि अगर हम संक्रमित हैं तो दूसरों की भी हिफाजत करता है। प्रोफेसर विजय राघवन कहते हैं कि हमने घर में मास्क बनाने के लिए एक हैंडबुक तैयार की है, जिसका उपयोग लोग अपना खुद का चेहरा ढंकने के लिए कर सकते हैं।

2. हाथ की स्वच्छता को लेकर सतर्कता बरतें
विश्व स्वास्थ्य संगठन के नेतृत्व में चीन में 75,465 कोविड-19 मामलों पर किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि कोरोना वायरस मुख्य रूप से लोगों के बीच श्वसन बूंदों एवं संपर्क माध्यमों से संक्रामित होता है। कोविड-19 वायरस तब संक्रामित हो सकता है, जब कोई संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आ जाता है। या जब हम तत्काल वातावरण या संक्रमित व्यक्ति द्वारा उपयोग में लाई गई वस्तुओं (जैसे कि दरवाजे का हैंडल या वॉशरूम का नल) की सतह को छूते हैं। हमारी सामान्य प्रवृत्ति अपने चेहरे को छूने की होती है। जब हम अपने हाथ को कम से कम 30 सेकेंड तक अच्छी तरह साबुन से धोते हैं, तो अगर कोई वायरस हमारे हाथ पर लगा हुआ भी हो तो वह नष्ट हो जाता है। प्रोफेसर विजय राघवन कहते हैं कि हाथों के साथ पांवों को भी धोना बेहतर है।

3. सोशल डिस्टेंस बना कर रखना
सबसे अधिक संभावना यह होती है कि संक्रमण किसी संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने या उसके द्वारा बिखेरी गई बूंदों को सांस के माध्यम से ग्रहण करने के जरिये होता है। सामान्य स्थितियों में बूंदें संक्रमित व्यक्ति से लगभग एक मीटर की दूरी तक जाती हैं। बाजारों, कार्यालयों और सार्वजनिक परिवहनों में एक दूसरे से एक मीटर तक की दूरी बना कर रखना चाहिए। प्रोफेसर विजय राघवन कहते हैं कि युवा व्यक्ति बिना कोई लक्षण प्रदर्शित किए संक्रमित हो सकते हैं और वे बुजुर्गों को संक्रमित कर सकते हैं। इसलिए, हमें सोशल डिस्टेंस बना कर रखने पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, खासकर बुजुर्गों जैसे संवेदनशील लोगों के साथ, जो कई तरह से बीमारी का शिकार हैं।

4. परीक्षण एवं ट्रैकिंग
राघवन कहते हैं कि अगर कोई कोविड-19 पॉजिटव हो जाता है तो इसके बाद जरूरी है कि तत्काल उस व्यक्ति के निकट संपर्कों की पहचान की जाए और उनका पता लगाया जाए। उनकी निश्चित रूप से जांच की जानी चाहिए। केवल एक संक्रमित व्यक्ति ही दूसरों को वायरस संचारित कर सकता है और वायरस फैला सकता है। अगर अधिकांश संक्रमित व्यक्तियों की पहचान कर ली जाती है तो वायरस के संचरण को नियंत्रित करना आसान हो जाता है।

5. आइसोलेशन
राघवन कहते हैं कि जिन लोगों की पॉजिटिव मामलों के रूप में पहचान कर ली गई है, उन्हें आइसोलेट कर दिया जाना चाहिए। एक बार आइसोलेट कर देने के बाद संक्रमित व्यक्ति पर समुचित चिकित्सा ध्यान दिया जा सकता है। इसके अतिरिक्त अगर वे आइसोलेटेड रहेंगे तो संक्रमित व्यक्ति दूसरों को संक्रमित नहीं कर सकेंगे। संक्रमण का स्पर्श-सूत्र काटा जा सकता है।

राघवन कहते हैं कि अगर एक सामान्य जीवन के लिए अगर हम इनमें से कोई भी चीज नहीं करते हैं या इनमें से कोई भी सलाह भूल जाते हैं तो रोग का खतरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि दूसरे पश्चिमी देशों की तुलना में भारत में स्थितियां अलग हैं। यहां शारीरिक दूरी बना कर रखना कठिन हो जाता है, क्योंकि मुंबई के धारावी जैसी घनी आबादी क्षेत्र में बहुत से लोग रहते हैं। इसके अतिरिक्त, भारत में कई परिवारों में तीन पीढ़ियां एक साथ रह रही हैं। प्रोफेसर विजय राघवन कहते हैं, इससे शारीरिक दूरी बना कर रखना कठिन हो सकता है। इसलिए, हमें समस्याओं से निपटने के लिए कुछ अलग समाधान ढूंढने होंगे।

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