कोरोना रोगियों के प्लाज्मा से होगा कोरोना रोगियों का इलाज, ट्रायल शुरू

नई दिल्ली : केरल सरकार की ओर से गठित एक मेडिकल टास्क फ़ोर्स ने कोरोना महामारी से निपटने के लिए प्लाज़्मा थेरेपी का इस्तेमाल कारगर बताया है। इस प्रक्रिया में वे मरीज जो संक्रमण के बाद ठीक हो जाते हैं, उनके शरीर में संक्रमण को बेअसर करने वाले प्रतिरोधी ऐंटीबॉडीज़ विकसित हो जाते हैं। ये ऐंटीबॉडीज कोविड-19 रोगी के रक्त में मौजूद वायरस को खत्म कर सकते हैं।

कोझिकोड स्थित बेबी मेमोरियल हॉस्पिटल में क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट डॉक्टर अनूप कुमार का कहना है कि कोरोना से जो मरीज ठीक हो गए हैं, उनके पूरी तरह ठीक होने के 14 दिन बाद उनसे ऐंटीबॉडीज लिया जा सकता है। इसमें सावधानी बरतना जरूरी है, ठीक हुए रोगी का कोविड-19 टेस्ट एक बार नहीं, बल्कि दो बार किया जाना चाहिए। रक्त लेने से पहले राष्ट्रीय मानकों के तहत शुद्धता की भी जाँच की जाएगी। कोरोना से ठीक होने वाले मरीज का एलिजा (एन्जाइम लिन्क्ड इम्युनोसॉर्बेन्ट ऐसे) टेस्ट किया जाता है, इस टेस्ट में ऐंटीबॉडीज की मात्रा का पता लगता है।

इस तरह निकाला जायेगा रक्त
कोरोना से ठीक हो चुके व्यक्ति के खून को ऐस्पेरेसिस विधि से निकाला जाएगा, खून से प्लाज़्मा या प्लेटलेट्स को निकालकर बाकी खून रोगी के शरीर में चढ़ा दिया जाता है। डॉक्टर अनूप ने बताया कि ऐंटीबॉडीज केवल प्लाज्मा में मौजूद होते हैं और संक्रमण से ठीक हो चुके व्यक्ति के शरीर से लगभग 800 मिलीलीटर प्लाज़्मा लिया जाता है। इसके लिए रोगी को लगभग 200 मिलीलीटर ख़ून चढ़ाने की ज़रूरत होती है, यह चार रोगियों के लिए पर्याप्त है।

डॉक्टर अनूप का कहना है कि यह कोरोना के सामान्य लक्षणों जैसे सर्दी जुकाम में नहीं, बल्कि जिन रोगियों की हालत बिगड़ रही हो और पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं ले पा रहे हैं, उन्हें दिया जा सकता है। साथ ही स्वास्थ्यकर्मियों को भी यह दिया जा सकता है, जिससे कोरोना मरीज के संपर्क में आने के बाद भी उन्हें संक्रमण ना हो। इसविधि से इलाज के जरिये अभी तक 48 से 72 घंटे में सुधार होते हुए देखा गया है।

चीन में इस विधि से हो रहा है इलाज
अभी इसे लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय से मंजूरी मिलना बाकी है। मंजूरी मिलने के बाद इसमें समय नहीं लगेगा, लेकिन टीम के पास क्लीनिकल ट्रायल के लिए समय कम है। हालाँकि चीन और दक्षिण कोरिया में इस विधि से पहले ही इलाज हो रहा है।

इतना आयेगा ख़र्च
इस विधि से इलाज में दो से ढाई हज़ार रुपए तक खर्च आ सकता है और यह इलाज सरकारी अस्पताल में उपलब्ध होगा।

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