डोनाल्ड ट्रंप की उम्मीदों पर फिरा पानी

-निर्वाचन मंडल ने अमेरिका के अगले राष्ट्रपति के रूप में बाइडन के नाम की पुष्टि की

वाशिंगटन : अमेरिका के निर्वाचन मंडल ने जो बाइडन को देश के राष्ट्रपति और भारतीय मूल की सीनेटर कमला हैरिस को उपराष्ट्रपति पद के लिए बहुमत देकर उनकी जीत की औपचारिक पुष्टि कर दी, जिसके बाद बाइडन ने कहा कि ‘अब एकजुट होने, जख्मों को भरने और पन्ना पलटने’ का समय आ गया है। इसके साथ ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आखिरी उम्मीदों पर भी पानी फिर गया है।

सूत्रों के अनुसार, 6 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों की आधिकारिक घोषणा की जाएगी और 21 जनवरी को नए राष्ट्रपति की ताजपोशी होगी।

बाइडन की लोकप्रियता ऐतिहासिक

कानून के अनुसार, निर्वाचन मंडल की बैठक दिसंबर के दूसरे बुधवार के बाद आने वाले पहले सोमवार को होती है। इस दिन सभी 50 राज्यों और डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया के निर्वाचक अपना मत डालने के लिए बैठक करते हैं। राष्ट्रपति पद का चुनाव तीन नवंबर को हुआ था। बाइडन ने 538 सदस्यीय निर्वाचन मंडल के 270 से अधिक मत हासिल करके बहुमत हासिल कर लिया। हालांकि निर्वाचन मंडल की बैठक मात्र औपचारिकता होती है, लेकिन यह बैठक इस साल पहले की तुलना में अधिक चर्चा में रही, क्योंकि देश के मौजूदा राष्ट्रपति ट्रंप ने हार स्वीकार करने से इनकार कर दिया और चुनाव में धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं।

अमेरिका का लोकतंत्र मिसाल

बाइडन ने कहा कि अमेरिका के लोकतंत्र की परीक्षा ली गई और उसे खतरा पैदा किया गया, लेकिन देश का लोकतंत्र ‘सच्चा और मजबूत साबित’ हुआ। बाइडन ने कहा, ‘देश में बहुत समय पहले ही लोकतंत्र की मशाल जल चुकी थी और अब हम जान चुके हैं कि लोकतंत्र की इस मशाल को कोई वैश्विक महामारी या सत्ता का दुरुपयोग बुझा नहीं सकता।’ उन्होंने कहा, ‘अमेरिका की आत्मा के लिए हुई लड़ाई में लोकतंत्र की जीत हुई।’

बाइडन ने ट्रंप पर कसा तंज 

बाइडन ने कहा, ‘मैंने और उपराष्ट्रपति हैरिस ने निर्वाचन मंडल के 306 मत हासिल किए, जो जीत हासिल करने के लिए आवश्यक 270 मतों से बहुत अधिक है। ट्रंप और माइक पेंस को भी 2016 में इतने ही मत मिले थे। उस समय राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे ऐतिहासिक जीत बताया था। उनके स्वयं के मानकों के अनुसार, यह संख्या स्पष्ट जीत दर्शाती है।’ उन्होंने आगे कहा कि ट्रंप की कार्रवाई ने अमेरिका के मूल लोकतांत्रिक मूल्यों की अवहेलना की और इससे सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण भी प्रभावित हुआ। बाइडन ने कहा, ‘अमेरिका में जनता का शासन होता है और जनता ही किसी नेता को सत्ता की बागडोर संभालने का अधिकार देती है।’

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