कॉरपोरेट जगत को मिली सौगात, 10 प्रतिशत तक घटा कंपनी कर, बाजार खुश, सेंसेक्स 1921 अंक चढ़कर बंद

nirmala

गोवा : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्‍था को रफ्तार देने के लिए शुक्रवार को कई अहम घोषड़ाएं की। गोवा में जीएसटी काउंसिल की बैठक से पहले वित्त मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि घरेलू कंपनियों सहित नई विनिर्माण कंपनियों के लिए अध्यादेश के जरिए कॉरपोरेट टैक्स घटाया जाएगा। घरेलू कंपनियां अगर अन्य कोई छूट नहीं लेती हैं तो उन्हें सिर्फ 22 प्रतिशत टैक्स देना होगा। सरचार्ज और सेस मिलाकर प्रभावी टैक्स दर 25.17 प्रतिशत होगी। कॉर्पोरेट टैक्स की मौजूदा दर 30 प्रतिशत है। सेस और सरचार्ज मिलाकर 34.94 प्रतिशत  टैक्स लगता है। यानी नई दरों के मुताबिक कंपनियों के लिए आयकर की दर 10 प्रतिशत तक घट जाएगी।

नई कम्पनियों पर लगेेगा इतना टैक्स
सीतारमण ने घोषणाओं में बताया कि 1 अक्टूबर के बाद बनने वाली घरेलू विनिर्माण कंपनियों के लिए टैक्स की दर 15 प्रतिशत होगी। सरचार्ज और सेस मिलाकर प्रभावी टैक्स दर 17.01 प्रतिशत होगी और उन्हें अन्य कोई इन्सेंटिव नहीं मिलेगा। नई कंपनियों के लिए पहले टैक्स की दर 25% थी। सेस और सरचार्ज मिलाकर प्रभावी दर 29.12% थी। यानी अब नई कंपनियों की टैक्स देनदारी 12% कम हो जाएगी। वित्तं मंत्री ने कहा कि वित्त मंत्री ने कहा कि टैक्स में छूट देने से मेक इन इंडिया के तहत निवेश, रोजगार और आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।

शेयर बाजार से जुड़ी घोषणा
वित्तमंत्री ने एक अन्य राहत देते हुए कहा कि जिन सूचीबद्ध कंपनियों ने पांच जुलाई से पहले शेयरों की पुनर्खरीद की घोषणा की है, उन्हें भी किसी प्रकार का कर नहीं देना होगा। वित्त मंत्री के इस घोषणा से शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल आया है। सेंसेक्स 1921 अंक की बढ़त के साथ 38,015 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान 2284 अंक का उछाल आया था। उन्होंने आगे कहा कि दर कम करने तथा अन्य घोषणाओं से राजस्व में सालाना 1.45 लाख करोड़ रुपये की कमी का अनुमान है। हालांकि उन्होंने इन नयी घोषणाओं का राजकोषीय घाटा के लक्ष्य पर असर पड़ने संबंधी सवाल को दरकिनार कर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार वास्तविकता के प्रति सजग है और वह बाद में आंकड़ों में सामंजस्य बिठाएगी।

सीएसआर का दायरा बढ़ाया गया
सरकार ने अपनी घोषणाओं में सीएसआर का दायरा भी बढ़ाया है। कंपनियों को अब कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत दो प्रतिशत राशि केंद्र या राज्य सरकार या किसी एजेंसी अथवा सार्वजनिक लोक उपक्रमों द्वारा वित्त पोषित इनक्यूबेशन (पालना केंद्र), विज्ञान, प्रौद्यागिकी, इंजीनियरिंग या औषधि के क्षेत्र में शोध कर रहे सरकार से वित्त पोषित विश्वविद्यालयों, आईआईटी, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं और डीआरडीओ, आईसीएआर जैसे संस्थानों के अंतर्गत आने वाले स्वायत्त निकायों पर खर्च करने की भी छूट दी गयी है। इसके अलावा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों पर डेरिवेटिव समेत प्रतिभूतियों की बिक्री से होने वाले पूंजीगत लाभ पर बढ़ी हुई दर से लगाया गया अधिभार अब नहीं लगेगा।

गौरतलब है कि, सरकार ने ये कदम ऐसे समय में उठाये हैं जब चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर छह साल के निचले स्तर 5 प्रतिशत पर आ गयी है। इन घोषणाओं से निवेश को प्रोत्साहन मिलने तथा रोजगार सृजन को गति मिलने की उम्मीद है।

वित्त मंत्री की घोषणाओं की मुख्य बातें…

…आयकर अधिनियम में एक नया प्रावधान किया गया है, जो वित्त वर्ष 2019-20 से प्रभावी होगा। इससे किसी भी घरेलू कंपनी को 22 प्रतिशत की दर से आयकर भुगतान करने का विकल्प मिलेगा। हालांकि इसके लिये शर्त होगी कि वे किसी प्रोत्साहन का लाभ नहीं लेंगे।

… उपकर और अधिभार समेत इन कंपनियों के लिये प्रभावी दर 25.17 प्रतिशत होगी। साथ ही ऐसी कंपनियों को न्यूनतम वैकल्पिक कर का भुगतान नहीं करना होगा।

…विनिर्माण क्षेत्र में नया निवेश आकर्षित करने तथा मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के लिये आयकर अधिनियम में एक और नया प्रावधान किया गया है। इससे एक अक्टूबर 2019 या इसके बाद गठित किसी भी कंपनी को विनिर्माण में निवेश करने पर 15 प्रतिशत की दर से आयकर भरने का विकल्प मिलेगा। यह लाभ उन्हीं कंपनियों को मिलेगा जो कोई अन्य प्रोत्साहन या छूट नहीं लेंगे और 31 मार्च 2023 से पहले परिचालन शुरू करेंगे।

…इन कंपनियों के लिये अधिशेष और उपकर समेत प्रभावी कर की दर 17.01 प्रतिशत होगी। साथ ही इन कंपनियों को न्यूनतम वैकल्पिक कर देने की जरूरत नहीं होगी।

…यदि कोई कंपनी कम की गयी दरों पर भुगतान करने का विकल्प नहीं चुनती है और कर छूट एवं प्रोत्साहन का लाभ उठाती है, तो वह पुरानी दरों पर भुगतान करना जारी रखेंगी। ये कंपनियां छूट व प्रोत्साहन की अवधि समाप्त होने के बाद संशोधित दरों का विकल्प चुन सकती हैं। विकल्प चुनने के बाद उनके लिये प्रभावी कर की दर 22 प्रतिशत होगी। एक बार विकल्प चुन लेने के बाद उन्हें उसमें बने रहना होगा।

… छूट व प्रोत्साहन का लाभ जारी रखने का विकल्प चुनने वाली कंपनियों को राहत देने के लिये न्यूनतम वैकल्पिक कर की दर 18.5 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत कर दी गयी।

…पूंजी बाजार में निवेश प्रवाह को बढ़ाने के लिये वित्त कानून, 2019 के जरिये लागू ‘बढ़ी हुई दर से अधिभार’ अब प्रतिभूति लेन-देन करने वाली कंपनियों के शेयरों की बिक्री से हुए पूंजीगत लाभ पर नहीं लगेगा।

…साथ ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों पर डेरिवेटिव समेत प्रतिभूतियों की बिक्री से होने वाले पूंजीगत लाभ पर बढ़ी हुई दर से लगाया गया अधिभार अब नहीं लगेगा।

…सूचीबद्ध कंपनियों को भी राहत दी गयी है। इसके तहत जिन सूचीबद्ध कंपनियों ने पांच जुलाई से पहले शेयरों की पुनर्खरीद की घोषणा की है, उन्हें उसके लिये कर नहीं देना होगा।

…सरकार ने सीएसआर का दायरा भी बढ़ाया है। कंपनियों को अब कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत दो प्रतिशत राशि केंद्र या राज्य सरकार या किसी एजेंसी अथवा सार्वजनिक लोक उपक्रमों द्वारा वित्त पोषित इनक्यूबेशन (पालना केंद्र), विज्ञान, प्रौद्यागिकी, इंजीनियरिंग या औषधि के क्षेत्र में शोध कर रहे सरकार से वित्त पोषित विश्वविद्यालयों, आईआईटी, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं और डीआरडीओ, आईसीएआर जैसे संस्थानों के अंतर्गत आने वाले स्वायत्त निकायों पर खर्च करने की भी छूट दी गयी है।

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