भारतीय राजदूत ने दिए ऐसे जवाब कि सारे पाकिस्तानियों की बोलती बंद हो गई

न्यूयॉर्क : भारत के जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के दमदार फैसले के बाद से ही पड़ोसी देश पाकिस्तान काफी बौखलाया हुआ है। उसने अपने आका चीन की मदद से इस मुद्दे काे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (यूएनएससी) में शुक्रवार उठाया, ताकि इस मामले का अंतरराष्ट्रीयकरण किया जा सके, लेकिन वहां भी उन दोनों को मुंह की खानी पड़ी। यूएनएससी की गुप्त बैठक में भारत ने साफ कर दिया कि कश्मीर हमारा आंतरिक मामला है। अगर पाकिस्तान को बातचीत शुरू करनी है तो पहले उसे आतंकवाद पर लगाम लगानी होगी। यूएनएससी में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने अपनी हाजिरजवाबी, तथ्यों और कूटनीतिक जवाबों से पाकिस्तानी पत्रकारों की भी बोलती बंद कर दी। इसमें पाक के 3 पत्रकार मौजूद थे। अकबरुद्दीन की हाजिरजवाबी इसलिए भी खास साबित हुई, क्योंकि उनसे पहले चीन और पाक के प्रतिनिधि मीडिया से बातचीत में अपने-अपने देशों की बात रख चुके थे।

पहले पाक पत्रकार ने पूूछे सवाल

अकबरुद्दीन ने सबसे पहले पाक पत्रकारों को ही सवाल पूछने को कहा। पाकिस्तान के कई पत्रकार बार-बार अकबरुद्दीन से कश्मीर और मानवाधिकारों को लेकर सवाल पूछ रहे थे। पाकिस्तानी पत्रकारों ने सवालों के जरिए भारतीय राजनयिक को घेरने की तमाम कोशिश की। लेकिन अकबरुद्दीन ने एक-एक करके उनके सभी सवालों के जवाब देकर उन्हें चुप करवा दिया। एक पत्रकार ने कहा, ‘भारत की पाकिस्तान के साथ बातचीत कब शुरू होगी?’ इस पर अकबरुद्दीन पोडियम से नीचे उतरकर पाक पत्रकारों के पास गए। उनसे हाथ मिलाते हुए अकबरुद्दीन ने कहा, ‘इसकी (बातचीत की) शुरुआत मैं आपसे ही करता हूं।’ कॉन्फ्रेंस हॉल में उप‌स्थित सभी लोगों ने अकबरुद्दीन के इस कदम का स्वागत किया। पाकिस्तान के ही एक और पत्रकार ने कश्मीर मुद्दे पर सवाल की शुरुआत की कि ‘भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाने….’ वह सवाल पूरा कर पाता, इससे पहले ही अकबरूद्दीन ने कहा कि आपने स्वीकार कर लिया कि धारा 370 भारतीय संविधान की धारा है, मतलब यह मामला भारतीय संविधान से जुड़ा है, न कि अंतरराष्ट्रीय…. यह स्वीकार करने के लिए धन्यवाद। इसके बाद वह पत्रकार कुछ नहीं बोल पाया।

बातचीत शुरू करने के लिए आतंकवाद खत्म कीजिए

भारतीय राजनयिक अकबरुद्दीन ने पोडियम की तरफ लौटते हुए कहा, ‘हम दोस्ती के लिए अपना हाथ पहले ही बढ़ा चुके हैं। हम शिमला समझौते को लेकर प्रतिबद्ध हैं। अब हम पाकिस्तान की तरफ से जवाब का इंतजार कर रहे हैं।’ इससे पहले पाक पत्रकार ने पूछा था कि दोनों पड़ोसियों के बीच कोई संपर्क नहीं है, भारत, पाक के निवेदन का जवाब क्यों नहीं देता? इस पर अकबरुद्दीन ने कहा, ‘बातचीत शुरू करने के लिए आतंकवाद खत्म कीजिए। पाक जो रवैया अख्तियार कर रहा है, वह जमीनी सच्चाई से काफी दूर है। पाक जिहाद और आतंकवाद को बढ़ावा देता है।’ अकबरुद्दीन ने कहा कि हम अपनी नीति पर हमेशा की तरह कायम हैं। आतंकमुक्त माहौल में शांति से मसले को द्विपक्षीय बातचीत से ही सुलझाया जाएगा।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा हटाने के मामले पर हुई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक के मद्देनजर एक प्रमुख पाकिस्तानी समाचार पत्र ने शुक्रवार को कहा कि पाकिस्तान को सुरक्षा परिषद में सिर्फ चीन का ही ‘खुला समर्थन’ हासिल है। बता दें भारत, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को स्पष्ट रूप से बता चुका है कि जम्मू-कश्मीर से संविधान का अनुच्छेद 370 हटाकर उसका विशेष दर्जा खत्म करना देश का अंदरूनी मामला है और पाकिस्तान इस वास्तविकता को स्वीकार करे। रूस और पोलैंड सीधे तौर पर कह चुके हैं कि यह मामला भारत का आंतरिक मामला है और इस पर किसी को सवाल उठाने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। फ्रांस भी भारत के साथ है। वहीं, अमेरिका और ब्रिटेन का इस मामले में तटस्थ रुख है।

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