109 देशों ने मिलकर चलाया ऑपरेशन थंडरबॉल, 600 की हुई गिरफ्तारी

पेरिस : दुनिया भर में नशीली दवाओं और हथियारों के लिए जंगली जानवरों का अवैध ‌शिकार एवं तस्करी का काम किया जाता है। इसे दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा आपराधिक व्यापार माना जाता है। इस वजह से वन्य जीवों की कई प्रजातियों के विलुप्त होने और उसके अस्तित्व के खतरे में पड़ने के कारण वन्यजीवों के बचाव के लिए 109 देशों ने मिलकर एक ऑपरेशन चलाया। इस अभियान का नाम ऑपरेशन थंडरबॉल रखा गया। इस ऑपरेशन के तहत 2000 मामलों में 600 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस ऑपरेशन को विश्व सीमा शुल्क संगठन और इंटरपोल ने अंजाम दिया जो जंगली जानवरों की तस्करी रोकने और उनकी सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है।
सबसे ज्यादा निशाने पर हाथी
तस्करों के बाजार में सबसे ज्यादा मांग हाथी के दांतों और आंतरिक अंगों के लिए बड़ी बिल्लियां की रहती है। इस वर्ष भी 440 हाथी के दांतों को बरामद किया गया हैं। इसके साथ 4300 जीवित पक्षियों और दुर्लभ प्रजाति के 10 हजार समुद्री कछुओं की भी रक्षा की गयी है। मालूम ‌हो कि पिछले महीने जून में 23 लंगूर, 30 शेर, चीता, बाघ समेत एक टन से अधिक पेंगोलिन की हडि्डयों को जब्त किया गया था। इतना ही नहीं इसके साथ 74 ट्रक अवैध लकड़ी, 2600 से अधिक पौधे भी बरामद किये गए हैं।
चीन में सबसे ज्यादा मांग
वन्य जीवों के अंगों और वनस्पतियों से बनी दवाओं की मांग सबसे ज्यादा चीन में है। इसी कारण से यहां काफी अवैध शिकार होते हैं। शार्क फिन्स, गैंडे के सींग और छोटे स्तनपायी जीवों में पेंगोलिन के अंगों की मांग अधिक है। बता दें कि साल 2018 में चीन ने गैंडे के सींग और बाघ की हड्डी के प्रयोग की अनुमति चिकित्सा अनुसंधान के लिए दे दी थी। उसके इस कदम की निंदा पर्यावरण रक्षकों ने जमकर की थी।
पहले भी चलाया जा चुका है ऑपरेशन
बता दें कि इंटरपोल एवं विश्व सीमा शुल्क संगठन ने पहले भी वन्य जीवों को बचाने के लिए ऐसा ऑपरेशन चलाया था। साल 2017 में ऑपरेशन थंडरबर्ड और साल 2018 में ऑपरेशन थंडरस्टॉर्म को अंजाम दिया गया था। इसका मुख्य मकसद तस्करों के इलाके, मार्ग और अधिक मांग वाले देशों को चिह्नित कर इसे बंद कराने का दबाव बनाना है।

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