यह आपातकाल नहीं, जमानत मिलती है तो ‘एंजॉय’ करें – मोदी

नई दिल्ली : संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि उन्हें इसलिए कोसा जा रहा है। कि उन्होंने अमुक को जेल में नहीं डाला। मोदी ने कहा कि ‘‘यह आपातकाल नहीं है कि किसी को भी जेल में डाल दिया जाये। यह लोकतंत्र है। किसी को जेल भेजा जाएगा तो यह काम अदालतें करेंगी। अगर किसी को जमानत मिलती है तो वह ‘एंजॉय’ करे।”
आतंकवाद के विषय में मतभेदों की कोई गुंजाईश नहीं
प्रधानमंत्री ने कहा कि “हम जो भी करेंगे, पूरी ईमानदारी से करेंगे, हीन भावना से नहीं करेंगे। हमें गलत रास्ते पर जाने की जरूरत नहीं है।” साथ ही मोदी ने यह भी कहा कि ”आतंकवाद के विषय में मतभेदों की कोई गुंजाईश नहीं है। यह मानवता के लिए संकट है। मानवता को बचाने के लिए इससे लड़ना होगा।”
समान नागरिक संहिता का मौका आया था
उन्होंने महिला सशक्तीकरण के बारे में कहा कि 50 के दशक में समान नागरिक संहिता का मौका आया था। लेकिन, तब कांग्रेस चूक गयी और ‘हिन्दू कोड’ विधेयक ले आयी। उसके 35 साल बाद शाहबानो वाले मामले में लैंगिंक समानता सुनिश्चित करने का मौका आया तब भी कांग्रेस चूक गयी। उन्होंने तीन तलाक पर रोक लगाने संबंधी विधेयक का उल्लेख करते हुए कहा कि आज फिर हम विधेयक लाये हैं। इसे किसी संप्रदाय मात्र से जोड़कर देखने की जरूरत नहीं है।
गटर में पड़े रहना चाहते हैं तो पड़े रहें
प्रधानमंत्री ने शाहबानो मामले के समय केन्द्रीय मंत्री रहे एक कांग्रेस नेता से जुड़ी सोशल मीडिया के एक लिंक का हवाला देते हुए कहा कि इस रिपोर्ट का वह सत्यापन नहीं कर सकते, मगर इस रिपोर्ट के अनुसार इस नेता ने कहा था कि मुसलमानों के उत्थान की जिम्मेदारी कांग्रेस की नहीं है। अगर वे गटर में पड़े रहना चाहते हैं तो पड़े रहें। मोदी के इतना कहते ही विपक्ष की बेंचों पर खलबली मच गयी। विपक्षी सदस्यों ने उस नेता का नाम पूछा तो मोदी ने कहा कि वह उन्हें यूट्यूब का वीडियो लिंक भेज देंगे।
कर्तव्य में फायदा नुकसान नहीं देखा जाता
मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती और आजादी की 75वीं वर्षगांठ की बात का उल्लेख किया और कहा कि हम देखते हैं कि देश में हर बात अधिकारों एवं सुविधाओं के लिए लड़ाई से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि हम देश को अधिकारों से कर्तव्य की ओर ले जायें। जनप्रतिनिधियों को इसके लिए जनजागरण करना होगा। उन्होंने कहा कि डॉ. राममनोहर लोहिया ने कहा था कि कर्तव्य में फायदा नुकसान नहीं देखा जाता है।
दुनिया को भारत की बहुत बड़ी सीख
प्रधानमंत्री ने पं. जवाहरलाल नेहरू द्वारा 14 जुलाई 1951 के कांग्रेस के घोषणापत्र को जारी करते हुए कहे गये शब्दों को उद्धृत करते हुए कहा दुनिया को भारत की बहुत बड़ी सीख है कि सबसे पहले कर्तव्य आते हैं और अधिकार एवं सुविधा उसी कर्तव्य से आते हैं। सब लोग अधिकारों एवं सुविधाओं के लिए लड़ते हैं पर शायद ही कोई कर्तव्य के लिए लड़ता है। अगर कर्तव्य को भूल जाएं तो अधिकार और सुविधा नहीं रह पायेंगी।

गौरतलब है कि मोदी के संबोधन के बाद अध्यक्ष ओम बिड़ला ने विपक्ष द्वारा दिये गये संशोधन के सभी प्रस्तावों को एक साथ मतदान के लिए रखा जिसे ध्वनिमत से खारिज कर दिया गया और इसके पश्चात धन्यवाद प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

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