डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मौत की जांच हो- जेपी नड्डा

नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकारी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मौत की जांच कराए जाने की मांग की है। मुखर्जी की  पुण्यतिथि पर रविवार को भाजपा मुख्यालय में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह सहित अन्य नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

नेहरू ने ऐसा नहीं किया

नड्डा ने इस अवसर पर कहा कि “श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मौत की जांच होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि उस वक्त  देश की जनता भी इसकी मांग कर रही थी, लेकिन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने ऐसा नहीं किया।” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी किसी पद से जुड़े व्यक्ति नहीं थे और वह देश की सेवा करने के लिए आगे बढे़ थे।

दो निशान, दो विधान और दो प्रधान नहीं चलेंगे

नड्डा ने बताया कि ”मुखर्जी ने कहा था कि भारत के तिरंगे का ही सम्मान होना चाहिए इसीलिए दो निशान, दो विधान और दो प्रधान नहीं चलेंगे। उन्हीं के बलिदान के कारण ही आज जम्मू कश्मीर से परमिट की व्यवस्था समाप्त हुई है। साथ ही उन्होंने डॉ. मुखर्जी को एक प्रखर राष्ट्रवादी, दूरद्रष्टा और दिशा देने वाला नेता भी बताया। उन्होंने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है। भाजपा उनके बलिदान को कभी नहीं भूलेगी।”

हिंदुत्व से जीतने के लिए बंगाली पहचान काफी नहीं

वहीं पश्चिम बंगाल में कोलकाता के केयोरतला बर्निंग घाट पर केंद्र सरकार की ओर से जनसंघ के संस्‍थापक डॉ. मुखर्जी की पुण्यतिथि मनाई गई। इस बीच राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी कहा कि उन्होंने भी डॉ. मुखर्जी की पुण्यतिथि मनाने का का निर्णय लिया है। ममता के इस फैसले को लेकर केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि ”तृणमूल को समझ में आ गया है कि देश में हिंदुत्व से जीतने के लिए बंगाली पहचान काफी नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि ”यही कारण है कि तृणमूल डॉ. मुखर्जी को अब अपना नेता बताने की कोशिश कर रही है।”

संदिग्‍ध परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई थी

मालूम हो कि पश्चिम बंगाल के कोलकाता में 6 जुलाई 1901 में जनसंघ के संस्‍थापक डॉ. मुखर्जी का जन्म हुआ था। वे ताउम्र जम्मू-कश्मीर को भारत का पूर्ण और अभिन्न अंग बनाने के लिए प्रयासरत रहे। मुखर्जी ने संसद में दिए अपने भाषण के दौरान जम्मू-कश्मीर से धारा-370 को समाप्त करने की भी वकालत की थी। वर्ष 1953 में बिना अनुमति जम्मू-कश्मीर की यात्रा पर निकले डॉ. मुखर्जी को वहां पहुंचते ही गिरफ्तार कर नजरबंद कर दिया गया था। उसी वर्ष 23 जून को संदिग्‍ध परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई थी।

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