वार्षिक राशिफल 2023, सभी 12 राशियों के लिए नया साल कैसा रहेगा?

वार्षिक भविष्य दर्शन 2023
डॉ. मंगल त्रिपाठी
वार्षिक भविष्य दर्शन 2023
डॉ. मंगल त्रिपाठी
प्रधान ग्रहों का संचरण : सौर मंडल में सबसे बड़े आकार के ग्रह वृहस्पति इस वर्ष 21 अप्रैल 2023 को मीन से मेष राशि में प्रवेश करेंगे। 4 सितम्बर 2023 से इसी राशि में वक्र गति से संचार करते हुए 21 दिसम्बर 2023 को मार्गी होंगे। शनि 17 जनवरी 2023 को मकर से कुम्भ राशि में प्रवेश करेंगे फिर 17 जून 2023 काे इसी राशि में वक्री होंगे एवं 4 नवम्बर 2023 को वक्र गति छोड़कर मार्गी हो जाएंगे। तीसरे, चौथे प्रधान ग्रहों में राहु और केतु इस वर्ष अक्टूबर में अपना राशि परिवर्तन करेंगे। 30 अक्टूबर 2023 को राहु अपने स्वाभाविक वक्र गति से मेष से मीन राशि में एवं केतु भी इसी दिन तुला से कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। तत्पश्चात दोनों ही पूरे बचे बाकी वर्ष की अवधि तक इन्हीं दो राशियों में रहेंगे। मंगल 12 मार्च को कर्क से मिथुन में, 10 मई को मिथुन से कर्क में, 30 जून को कर्क से सिंह में, 18 अगस्त को सिंह से कन्या में, 3 अक्टूबर को कन्या से तुला में, 16 नवम्बर को तुला से वृश्चिक में एवं 27 दिसम्बर को वृश्चिक से धनु में संचरण करेंगे। सूर्य, बुध, शुक्र और चन्द्रमा शीघ्रगामी ग्रह हैं, अत: इनका वर्णन नहीं किया जा रहा है।
प्रमुख त्योहार : 15 जनवरी को मकर संक्रांति, 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस, 26 को ही वसंत पंचमी, 5 फरवरी को रविदास जयंती, 18 फरवरी को महाशिव रात्रि, 6 मार्च को होलिकादहन, दोलयात्रा, 7 मार्च को होली, 22 मार्च को नववर्ष सम्वत्सर 2080 प्रारंभ, 30 मार्च को श्री रामनवमी, 4 अप्रैल को महावीर जयंती, 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती, 22 अप्रैल को रमजान (ईद), 5 मई को बुद्ध पूर्णिमा, 20 जून को रथयात्रा, 29 जून को बकरीद, 15 अगस्त को भारतीय स्वतंत्रता दिवस, 31 अगस्त को रक्षाबंधन, 7 सितम्बर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, 17 सितम्बर को विश्वकर्मा पूजा, 2 अक्टूबर को गांधी जयंती, 24 अक्टूबर को विजयादशमी (दशहरा), 12 नवम्बर को दीपावली, 18 नवम्बर को सूर्य षष्ठी व्रत (डाला छठ), 25 दिसम्बर को क्रिसमस डे (बड़ा दिन)।
प्रमुख एकादशी : निर्जला एकादशी 31 मई, हरिशयनी एकादशी 29 जून, देवोत्थान एकादशी, 23 नवम्बर, मोक्षदा एकादशी 22 दिसम्बर।
ग्रहण : इस वर्ष सन् 2023 में चार ग्रहण लग रहे हैं, जिनमें से तीन ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होंगे, अत: उनका उल्लेख नहीं किया जा रहा है लेकिन 28 अक्टूबर 2023 को खण्डग्रास चन्द्र ग्रहण अश्विनी नक्षत्र एवं मेष राशि पर लगेगा। यह ग्रहण भारत में दृश्य होगा।
मेष- यह वर्ष मेष राशि वालों के लिए मीठा भी रह सकता है और खट्टा-तीता भी हो सकता है इसलिए उनकी प्रकृति और जन्म कुंडली के अनुसार अनुकूलता बढ़ाई जा सकती है और प्रतिकूलता को कम किया जा सकता है। वर्ष का आरंभ आपके धैर्य, स्वजन और मित्रों की परीक्षा का भी हो सकता है, किन्तु अप्रैल से अच्छी स्थिति बन सकती है। आर्थिक समस्याओं में सुधार हो सकता है और उल्टी-सीधी बातें भी अनुकूलता ला सकती हैं। किसी विशेष स्थिति में प्रचुर अर्थहानि का योग होने से तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, स्थिर बुद्धि और स्वजन कम करने में सहायक हो सकते हैं एवं यह हानि लाभ में बदल सकती है किन्तु अपने कर्मक्षेत्र पर पूरा ध्यान रखना आवश्यक होगा और जहां तक हो सके; पूंजी निवेश में सावधानी बरतना होगा। मंगल और धार्मिक कार्य के लिए भी यह वर्ष अनुकूल हो सकता है। स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान रखना अनिवार्य होगा जिससे प्रत्येक अवसर का लाभ उठाया जा सके। चिकित्सा संबंधी परामर्श लेने में भी लापरवाही नहीं होनी चाहिए। जहां तक हो सके, वाद विवादों से दूर रहने की चेष्टा होती रहनी चाहिए अन्यथा कोर्ट कचहरी की स्थिति आ सकती है। वर्ष की तिमाही अर्थात् जनवरी से मार्च तक की अवधि सामान्य रहते हुए भी आर्थिक चिंता पैदा कर सकती है और तरह-तरह की असुविधाओं का सामना करना पड़ सकता है। विद्यार्थी कठोर परिश्रम से उत्तम परिणाम पा सकते हैं इसलिए उन्हें कर्मक्षेत्र में नये प्रयोग पर गंभीरतापूर्वक विचार करना चाहिए। दूसरी तिमाही अर्थात् अप्रैल से जून तक की अवधि उन्नतिकारक होने से पूंजी निवेश या नये काम के लिए आगे बढ़ सकते हैं जिससे सफलता की आशा की जा सकती है। नौकरी पेशा से संबंधित लोग पदोन्नति और व्यवसायी लाभवान हो सकते हैं। राजनीति करने वाले लोग अपनी प्रतिष्ठा में वृद्धि कर सकते हैं। महिलाएं प्रसन्न रहेंगी और सामान्यजन सुख का अनुभव कर सकते हैं। तीसरी तिमाही अर्थात् जुलाई से सितम्बर किसी भी प्रकार के विवाद से बचते रहना होगा और शांतिपूर्वक अपने-अपने काम में लगे रहने का होगा। बाजार की स्थिति में उतार-चढ़ाव रहने से व्यापारी वर्ग को सावधानी रखना अनिवार्य होगा। बीच-बीच में अच्छी रोशनी दिखाई देती रहेगी और सामान्य खर्च में वृद्धि हो सकती है। अत : कोई भी अनावश्यक खर्च टालते रहें। चौथी तिमाही अर्थात् अक्टूबर से दिसंबर स्वास्थ्य को लेकर सावधानी बरतने का होगा किन्तु सभी क्षेत्र में लोग प्राय: सुख का अनुभव करेंगे। मांगलिक कार्य सम्पन्न होंगे, आध्यात्मिक भाव बढ़ेंगे। महिलाएं अपनी इच्छा पूरी कर सकेंगी। पर्यटन या तीर्थाटन का अवसर मिल सकता है। विद्यार्थी अध्ययन में पूरी रुचि रखेंगे, साथ ही अच्छा परिणाम पा सकेंगे। इस वर्ष बाद अच्छे परिणाम के लिए नित्य स्नान के बाद ग्यारह बार श्रीहनुमान चालीसा पाठ करना सहायक होगा। मेष लग्न के जातक के लिए यह वर्ष उन्नतिकारक होगा। शुभांक 1-4-7। शुभ रंग रक्तिता लाल।
वृष- इस वर्ष वृष राशि वालों को अच्छे परिणाम की आशा करनी चाहिए किन्तु स्वास्थ्य के प्रति भी थोड़ा ध्यान अवश्य देना होगा। सार्वजनिक क्षेत्र में उनका महत्व बढ़ेगा और आर्थिक उन्नति की मात्रा भी कम रुकावटों के साथ होती रहेगी। कर्मक्षेत्र चाहे वह शिक्षा हो, नौकरी हो, राजनीति हो, उद्योग-व्यापार हो या भूमि संबंधी कोई काम हो, इनमें अनुकूलता की सूचना मिलते रहने से उत्साहित होते रहेंगे और निरंतर कोई चिंतन में लगे रहेंगे। आलस्य या लापरवाही का तयाग अवश्य करना होगा। सम्मानित और प्रभावशाली लोगों से अनायास ही सम्पर्क बनता रहेगा, जिसका लाभ कर्मक्षेत्र में प्राप्त हो सकता है। वह वर्ष आर्थिक सपनों को साकार कर सकता है यदि इसका उचित रूप से प्रयोग किया जाए। भूमि या गृह निर्माण में लगे लोग अच्छा लाभ कमा सकते हैं किन्तु किसी भी दांव पेंच से स्वयं को अलग रखना होगा। अधिकारी वर्ग अनुकूल परिवर्तन की आशा कर सकते हैं। कुंवारियां विवाहित हो सकती हैं और माताएं संतान सुख प्राप्त कर सकती हैं। वर्ष की पहली तिमाही अर्थात् जनवरी से मार्च व्यक्तित्व और क्रियात्मक बल को विकास और प्रकाश से भरेंगे। उचित समय पर उचित निर्णय के साथ आप सफलतापूर्वक अपना मार्ग बना सकते हैं। किसी चल रही समस्या का समाधान करने में कठिनाई नहीं होगी। ऐसी कोई स्थिति बन सकती है जो ऊंचाई तक ले जा सकती है। आर्थिक आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास साथ रहे, इसका प्रयास भी करते रहना चाहिए। दूसरी तिमाही अर्थात् अप्रैल से जून के महीने भी पहली तिमाही को दुहरा सकते हैं किन्तु इस समय स्वास्थ्य के प्रति सावधानी रखना उचित होगा। वर्ष की तीसरी तिमाही अर्थात् जुलाई से सितम्बर कुछ परेशानी के महीने हो सकते हैं और साझेदारों से थोड़ी सावधानी रखना उचित होगा। वर्ष की तीसरी तिमाही अर्थात् जुलाई से सितम्बर कुछ परेशानी के महीने हो सकते हैं और अपनी​ स्थिति को स्थिर रखने में संघर्ष के साथ सक्षमता की आवश्यकता पड़ सकती है। घर-गृहस्थी की स्थिति शांतिपूर्ण बनी रहे, इसका दायित्व महिलाओं को निभाना पड़ेगा और अपनी आकांक्षाओं को सीमित करना पड़ सकता है। वर्ष की चौथी तिमाही अर्थात् अक्टूबर से दिसम्बर के महीने नया काम प्रारम्भ करने के होंगे; साथ ही आवश्यक धन की कमी नहीं होगी। प्रसन्नता के अवसर मिलते रहेंगे मांगलिक प्रयास सफल हो सकते हैं। कभी-कभी खर्च की स्थिति आपकी आ​​र्थिक क्षमता को चुनौती दे सकती है। समझ बूझ कर कदम उठाने से ही रक्षा संभव है। विद्यार्थी अध्ययन के प्रति अपनी रुचि बनाए रखें। महिलाएं अपनी सीमा का ध्यान रखकर ही खर्च करें। राजनीति से जुड़े लोग परिस्थितियों पर पैनी दृष्टि रखें। वृष लग्न के लिए वर्ष प्राय: अनुकूल बना रह सकता है। अनुकूलता बनाए रखने के लिए मां काली का दर्शन प्रत्येक शनिवार को करें; साथ ही गरीबों को शक्ति भर दान अवश्य करें। शुभांक 4-6-9। शुभ रंग दूधिया सफेद।
मिथुन- यह वर्ष मिथुन राशिवालों के लिए सभी प्रकार से उत्साहप्रद और उन्नतिप्रद बने रहने की संभावना है। आर्थिक क्षेत्र में भी मजबूती के साथ पांव जमाए रखने में परिस्थितियां सहायक बनी रहेंगी किन्तु मानसिक प्रकृति दुविधा में रहने के कारण कभी-कभी स्वयं निर्मित समस्या का निर्माण हो सकता है, अत: निर्णायक बुद्धि को अनेक शाखाओं में किन्तु-परन्तु से बाहर निकल कर निश्चय को अटल बनाए रखना आवश्यक होगा। कर्मक्षेत्र में जितना स्पष्ट रहना संभव हो, उतना रहने से अति अनुकूल समय की अनुकूलता बनी रहेगी। उद्योगियों, व्यवसायियों को आर्थिक लाभ के लिए प्रतिकूल या सहज यानी सट्टे-लाटरी को आधार बनाना उचित नहीं होगा। सही मार्ग ही अनुकूलता की रक्षा कर सकेगा। नौकरी पेशा वाले लोगों को किसी भी परिवर्तन में यदि थोड़ी भी प्रतिकूलता दिखाई पड़े तो उन्हें तटस्थ हो जाना उचित होगा। महिलाएं जहां तक हो सके, अपनी आशा-आकांक्षा को नियंत्रण में रखेें तो पारिवारिक सुख-शांति की रक्षा में एकता हो सकेगी। विद्यार्थी अध्ययन के सिवाय दूसरी चीजों की तरफ आकर्षित न हों तो सफलता प्राप्त कर सकते हैं। राजनीति और प्रशासनिक क्षेत्र में लगे लोग भी पूरी तत्परता बनाए रखने से पदमान की सुरक्षा कर सकेंगे। वर्ष की पहली तिमाही अर्थात् जनवरी से मार्च तक के महीने कर्मक्षेत्र में सफलता के संकेत देते रहेंगे किन्तु कभी-कभी अपनी अनिर्णय की स्थिति से स्वयं ही समस्या उत्पन्न कर सकते हैं। अत: सावधानी और दृढ़ता की आवश्यकता होगी। अधीनस्थों और साझेदारों से अच्छा व्यवहार अनुकूल फल प्रदान कर सकता है। आयात-निर्यात से जुड़े लोग प्रशासनिक नीतियों का आंकलन करते रहें। ऋण पाना सुलभ हो सकता है लेकिन यही निज शक्ति पर निर्भरता हो तो अच्छा रहेगा। वर्ष की दूसरी तिमाही अर्थात् अप्रैल से जून के महीने नये-नये शौक और नयी कार्य प्रणाली के प्रति आकर्षित कर सकती है, जिससे बचना होगा। अति परिश्रम ही मनचाही सफलता दिलाने में सक्षम होगा। आनेवाले दिनों की चिंता में वर्तमान को प्रभावित नहीं होने देना उचित होगा। बेकार लोगों के लिए रोजगार की व्यवस्था हो सकेगी और नया काम भी प्रारम्भ किया जा सकता है। वर्ष की तीसरी तिमाही अर्थात् जुलाई से सितम्बर के महीने आरम्भ में कुछ परेशानी की सृष्टि कर सकते हैं किन्तु यदि वस्तु स्थिति की समझ बनी रही तो अशांति को दूर किया जा सकेगा। कभी-कभी विरोधी स्थिति बन सकती है जिसका समाधान शुभ चिंतक का परामर्श कर सकेगा। चौथी तिमाही अर्थात् अक्टूबर से दिसंबर के महीने चौतरफा उन्नति, लाभ और सुख देते रहेंगे। इस समय दुविधा की ​स्थिति से बचना होगा। विद्यार्थियों, राजनीतिज्ञों, प्रशासनिक सेवकों और महिलाओं के लिए यह तिमाही विशेष लाभप्रद हो सकती है। मिथुन लग्न के लिए यह वर्ष आर्थिक लाभ का होगा और कर्मक्षेत्र अनुकूल बनाए रखने का होगा। अच्छे परिणाम के लिए भगवान विष्णु के वामन मंत्र का पाठ नित्य करते रहें। शुभांक 1-4-8 एवं शुभ रंग हरा मिश्रित काला।
कर्क- यह वर्ष कर्क राशि वालों के लिए लाभप्रद होते हुए भी कुछ नकारात्मक स्थितियां उत्पन्न कर सकता है जिसे सकारात्मक बनाने के लिए प्रयत्न होना चाहिए और प्र्रयत्न भी समय के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखकर होना सफलतादायक हो सकता है। अनुमान, आश्वासन और काल्पनिक आंकलन के आधार पर कार्यक्रम का निर्धारण करना अनिश्चय की स्थिति उत्पन्न कर सकता है। यद्यपि आर्थिक स्थिति वृद्धि पर रहते हुए वर्ष के उत्तरार्द्ध में रुकावटें और दूसरे प्रकार के विलंब उत्पन्न कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में स्वयं को संयमित रखना; साथ ही आत्म विश्वास के साथ उद्योग करते रहने पर सबकुछ अनुकूल हो सकता है। मंगल कार्यों में समस्या उत्पन्न हो सकती है, जिसका समाधान धीरज बनाए रखने से हो सकता है। शारीरिक स्वास्थ्य भी कभी-कभी पारिवारिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। उद्योग-व्यापार से जुड़े लोग पूरे वर्ष वस्तु स्थिति को यथार्थ रूप से समझते हुए ही काम करें तथा प्रशासनिक सेवा से जुड़े लोग भी कुछ न कुछ उतार-चढ़ाव का अनुभव कर सकते हैं। महिलाएं अपने स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान रखें और विद्या​र्थियों की सफलता उनके परिश्रम पर निर्भर करेगी। वर्ष की पहली तमाही अर्थात् जनवरी से मार्च के महीने उन्नतिकारक हो सकते हैं। कर्मक्षेत्र में सफलता प्राप्त की जा सकती है और संतान द्वारा सुख का अनुभव कर सकते हैं। संभव है कि कोई मांगलिक या धार्मिक काम भी सम्पन्न हो सके। इस अवधि का अंतिम भाग अचानक ही उलझनें पैदा कर सकता है। व्यवस्था सुचारु रूप से चले; इसका प्रयत्न करते रहना चाहिए। कुछ परस्पर संबंधों में अविश्वास बढ़ सकता है, जिसका विशेष ध्यान रखना होगा। आर्थिक स्थिति में भी उतार-चढ़ाव का अनुभव हो सकता है। दूसरी तिमाही अर्थात् अप्रैल से जून के महीने विशेष सावधानी के हो सकते हैं। व्यर्थ के वाद विवाद हानि न पहुंचाएं, इसका ध्यान रखना होगा, जितना हो सके उन्हें टालते रहना अच्छा होगा। इस अवधि में स्वास्थ्य को लेकर अधिक सावधान रहने की आवश्यकता होगी। सामाजिक-पारिवारिक शांति रहते हुए भी कोई पुरानी घटना परेशान कर सकती है। आर्थिक ​स्थिति सामान्य रहने की संभावना होगी। वयोवृद्ध लोग विशेष संयम रखते रहे तो किसी अदृश्य घटना से बच सकते हैं। कर्मक्षेत्र में अभी नया आरंभ कुछ दिनों के लिए टालते रहें तो आगे चलकर सु​विधाप्रद स्थिति हो सकती है। तीसरी तिमाही अर्थात जुलाई से सितम्बर के महीने व्यवसायियों के लिए अच्छा अवसर दे सकते हैं लेकिन जोखिम भरे काम से बचना होगा। आवश्यकता के लिए ऋण प्राप्त करने में कठिनाई नहीं होगी किन्तु शर्तों पर ध्यान रखने की उतनी ही आवश्यकता होगी। राजनीति में रहने वाले लोग कठिन प्रतियोगिता के लिए तैयार रहें, तो उनके लिए हितकर होगा। चौथी तिमाही अर्थात् अक्टूबर से दिसंबर के महीने चौतरफा कामयाबी के हो सकते हैं। मांगलिक प्रयास सफल होंगे। कर्मक्षेत्र अवसरों से भरा रह सकता है। उचित समय पर उचित निर्णय ऋण मुक्ति में सहायक हो सकता है। भ्रमण आदि के लिए भी अच्छा अवसर प्राप्त होगा, साथ ही आय में भी सहज स्थिति बनी रहेगी। कानूनी बातों का सामना हो सकता है। महिलाएं अपनी अभिलाषा पूरी कर सकेंगी। विद्यार्थी सफल हो सकते हैं और सामान्यजन भी प्रसन्न और स्वस्थ रहेंगे। कर्क लग्न के लिए यह वर्ष प्रसन्नतादायक और उद्योग की प्रेरणा देता रहेगा। शुभ फल अधिक से अधिक हों और अशुभता कम हो सके, इसके लिए भगवान शिव की पूजा प्रत्येक सोमवार को करें और हो सके तो प्रत्येक मासिक शिवरात्रि को उपवास रखें। शुभांक 4-7-9 और शुभ रंग पीला और लाल।
सिंह- सिंह राशिवालों के लिए यह वर्ष उनकी प्रकृति और प्रवृत्ति के अनुसार लक्ष्य की ओर धीर और गंभीर भाव रखते हुए विवेक के साथ छलांग मारने का होगा। कभी-कभी सफलता प्राप्त करने में चूक हो सकती है किन्तु अन्तत: आप सफलता प्राप्त कर सकते हैं, अत: निराशा नहीं उत्साह बनाए रखना ही आपका प्रयत्न होना चाहिए। सुख-शांति पर अपना वर्चस्व स्थापित करने में मन को एकाग्र रखना और अपनी गति की समीक्षा करते रहना आवश्यक होगा। अभी न तो विश्राम करने का और न ही पिछली गलतियों को दुहराने का समय होना चाहिए। प्रगति के नये रास्ते नये रूप में सामने आ सकते हैं। कभी-कभी पुरानी भूलों पर पश्चाताप करने की अपेक्षा उन्हें अनदेखा करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। कर्मक्षेत्र की संभावनाओं को कार्यरूप में परिणत करने के नये-नये द्वार खुल सकते हैं जिन्हें गंभीरतापूर्वक समझना सफल बना सकता है। आर्थिक स्थिति में सुधार के लक्षण दिखाई पड़ सकते हैं। जीविका का साधन खोजने वाले लाभान्वित हो सकते हैं। अनियुक्त व्यक्ति अपनी योग्यता के अनुसार नियुक्ति पा सकते हैं। साथ ही महिलाएं भी अपनी योग्यता प्रमाणित कर सकती हैं। मानसिक द्वंद्व और शारीरिक स्वास्थ्य भी कभी-कभी रुकावट उत्पन्न कर सकता है जिन्हें थोड़े प्रयत्न और संयम से नियंत्रित किया जा सकता है। व्यवसाय-वाणिज्य क्षेत्र के लोग सरकार की नीतियों के साथ सामंजस्य रखें तो लाभ कमा सकते हैं। वर्ष की पहली तिमाही अर्थात् जनवरी से मार्च के महीने बुद्धि तथा सत्कर्म का आश्रय लेने से प्रतिष्ठा के साथ आर्थिक क्षेत्र में वृद्धि कर सकते हैं। कर्मक्षेत्र का विस्तार किया जा सकता है। इसके साथ ही सतर्क रहना भी आवश्यक रहेगा ताकि सहयोगियों और साझेदारों की भूल कानूनी समस्या न खड़ी कर सके। चौकन्नी दृष्टि सदा अच्छा परिणाम दे सकती है। यह अवधि वर्ष भर का कार्यक्रम बनाने की होगी तथा इसमें मांगलिक कार्य भी सम्पन्न हो सकते हैं। वर्ष की दूसरी ​तिमाही अर्थात् अप्रैल से जून के महीने थोड़ी बहुत समस्याओं के साथ प्रगति के रहेंगे। इस अवधि में घर-गृहस्थी की समस्या संभव है और किसी पारिवारिक संबंध से तनाव बढ़ सकता है। अपने व्यवहार से ही सुरक्षा हो सकेगी, फिर भी कर्मक्षेत्र में प्रगतिशीलता बनी रहेगी और आप अपने धैर्य और उत्साह से समस्याओं का समाधान निकाल सकते हैं। उद्योग, व्यवसाय में लगे लोग परिणाम से संतुष्ट रहेंगे। सामान्यजन, विद्यार्थी, महिलाएं और बुद्धिजीवी​ भी प्रसन्नता का अनुभव कर सकेंगे। वर्ष की तीसरी तिमाही अर्थात् जुलाई से सितम्बर के महीने पिछली भूलों को सुधार कर नए उत्साह के साथ काम करने में सहयक होंगे। परस्पर मतभेद या किसी भी प्रकार के विरोध की समाप्ति होना संभव है। अगर दाम्पत्य संबंधों में तनाव चल रहा होगा तो उसका भी समाधान मिल सकता है। कानूनी क्षेत्र में भी सफलता मिल सकती है। इस अवधि का भरपूर लाभ उठाने की चेष्टा होती रहनी चाहिए। वर्ष की चौथी तिमाही अर्थात् अक्टूबर से दिसम्बर के महीने कुछ तनाव, कभी सफलता तो कभी विफलता, कभी मेल तो कभी बेमेल के तीखे-मीठे परिणामों के साथ अंतत: अच्छे परिणाम ही देंगे किन्तु ऋण पर भविष्य की कल्पना करना दिक्कतों में वृद्धि कर सकता है। अत: केवल अपनी क्षमता पर भरोसा रखना शुभ फलदायी रहेगा। आलस्य से बचे रहने की चेष्टा होती रहनी चाहिए जिससे रुकावटें दूर रहें। सिंह लग्न के लिए इस वर्ष जैसा कर्म वैसा लाभ की सच्चाई बनी रहेगी और अच्छी प्रवृत्ति अच्छा फल देगी। अनुकूल परिणाम की प्राप्ति के लिए प्रत्येक रविवार को दूध, केसर और मधु मिश्रित जल से सूर्य को अर्घ्य देना एवं सूर्यास्त तक नमक का त्याग करना श्रेष्ठ उपाय होगा। शुभांक 3-7-9 और शुभ रंग हल्का नीला और लाल मिला।
कन्या- यह वर्ष कन्या राशि वालों के लिए​ मिश्रित परिणाम दे सकता है जिसमें अनुकूलता के अनुपात में प्रतिकूलता की मात्रा अधिक हो सकती है इसलिए मानसिक स्थिरता को बनाए रखकर ही कर्मक्षेत्र में व्यवहार करना होगा और स्वयं को नकारात्मकभाव से मुक्त रखकर प्रत्येक स्थिति में सकारात्मक रहना ही सफलतादायक हो सकता है। वस्तुस्थिति के यथार्थ को कल्पना के आधार पर नकार देना इस वर्ष आर्थिक उलझनों को बढ़ा सकता है अत: मनोभाव को विवेचना की कसौटी पर जांच परख कर ही आगे कदम उठाना और पूर्व निर्धारित आर्थिक कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए दुहराना होगा या नयी कार्यशैली को अपनाना होगा। घर-गृहस्थी की उपेक्षा न हो, न सामाजिक-पारिवारिक रिश्ते तनाव में रहें, इसकी चेष्टा करनी होगी। मांगलिक कार्यों में पूर्वाग्रह को छोड़ना ही सफलता दे सकता है। उद्योग-व्यापार, विदेशी मुद्रा तथा निर्माण कार्य से जुड़े​ लोग सोच समझ कर ही सौदा करें तो अच्छा होगा। प्रशासनिक सेवा में लगे लोग दबाव का अनुभव कर सकते हैं। विद्यार्थी लोग अपने अध्ययन में किसी भी प्रकार की शिथिलता न आने दें अन्यथा निराशा की मात्रा बढ़ सकती है। कृषि उत्पाद से जुड़े लोग भी शायद असंतुष्ट रह सकते हैं। बुद्धिजीवियों की रचनात्मक क्षमता बनी रहे इसका उद्योग करते रहना ही अच्छा होगा। महिलाएं अपने दायित्व को संभालने की क्षमता का विकास करें तो घर-गृहस्थी को सुचारु रूप से चला सकती हैं। वर्ष की पहली तिमाही अर्थात् जनवरी से मार्च के महीने किसी पुरानी समस्या का समाधान कर सकते हैं और किसी भी सीमा तक आ​र्थिक समस्याओं का समाधान भी हो सकता है। किसी भी परिस्थिति में ऋण का भुगतान, ऋण लेकर करना अच्छा नहीं होता है, इस सत्य को सर्वदा मस्तिष्क में रखना उचित होगा। किसी भी क्षेत्र में वादा करना और निभाना व्यस्तता बढ़ा सकता है, इसलिए वादों से दूर रहना ही अच्छा होगा। अत: अपनी शक्ति का विस्तार करते हुए सफलता अर्जित करने की चेष्टा करें। काम-धंधा अपनी गति में चलता रहे, इसका प्रयत्न करते रहना होगा जो आने वाली तिमाही में सफलतादायक स्थिति का निर्माण कर सकता है। वर्ष की दूसरी तिमाही अर्थात् अप्रैल से जून आशा और विश्वास के प्रकाश को बढ़ाते रहेंगे जिसके परिणामस्वरूप अनुकूलता तो अधिक होगी और समस्याओं का समाधान होता रहेगा जिसमें आर्थिक स्थिति प्रमुख होगी। मांगलिक प्रयास सफल हो सकते हैं और नये साथी एवं सहायक भी मिल सकते हैं। नौकरीपेशा लोग उन्नति पा सकते हैं। परिश्रम के साथ हर क्षेत्र में पांव पसारा जा सकता है लेकिन शारीरिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना होगा। वर्ष की तीसरी तिमाही अर्थात् जुलाई से सितम्बर के महीने अपने आपको नये रूप से स्थापित करने के रहेंगे। तरह -तरह की समस्याओं का सामना करते रहने में स्वयं ही सफलता मिलती रहेगी। अपने उत्साह से किसी भी प्रतिकूलता को पराजित किया जा सकता है। सहयोगी साथ देंगे और घर गृहस्थी में सुख-शांति बनी रहेगी। वर्ष की चौथी तिमाही अर्थात् अक्टूबर से दिसम्बर के महीने भी उत्साहप्रद रहेंगे। प्रसन्नता का वातावरण बना रहेगा। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और नये दायित्वों को निभाने की क्षमता का विकास होगा। महिलाओं में उत्साह बढ़ेगा, विद्यार्थी प्रसन्न रहेंगे। कन्या लग्न के लिए वर्ष उतार-चढ़ाव के साथ कुछ न कुछ अनुभवों का रहेगा। शुभता बढ़ती रहे, इसके लिए नित्य श्रीसूक्त का पाठ अच्छा रहेगा। लक्ष्मीनारायण के मंदिर में कुछ दान अवश्य करें। शुभांक 2-5-8 एवं शुभ रंग हरा तथा चाकलेटी।
तुला- यह वर्ष तुला रा​शि वालों के लिए विशेष प्रगति का हो सकता है किन्तु कभी न कभी अस्वीकृति भी स्वीकृति बनकर जब सामने आती है तो आश्चर्यजनक प्रसन्नता मनुष्य को चकित कर देती है, यही इस वर्ष की विशेषता होगी। यदि सावधानी से योजना बनाई जाए और उसे शीघ्रता से कार्य रूप में परिणत किया जाए तो सफलता के साथ यश,मान, सम्मान में वृद्धि हो सकती है। नई दिशाओं पर खुलते पथ पर चलने की क्षमता और कुशलता सहज ही प्राप्त हो जा सकती है लेकिन अहंकार से भी बचना होगा, अन्यथा रुकावटें उत्पन्न हो सकती हैं। अपनी आकांक्षाओं को पूरा होते हुए देखने का यह वर्ष हो सकता है। आय-व्यय की विडम्बना आर्थिक तालमेल को बिगाड़ न सके, इसके लिए स्पष्ट आंकलन के साथ सुलझे हुए विचार आवश्यक होंगे। अपने प्रत्येक कदम को सुनिश्चित करके आगे बढ़ना उतना ही आवश्यक होगा। यह वर्ष किसी भी श्रम संघर्ष को सार्थक बनानेे का हो सकता है। सभी मिलने जुलने वाले मित्र ही होंगे इस पर भी गंभीरतापूर्वक विचार आवश्यक होगा ताकि वर्ष क​ठिनाई मुक्त बना रहे। इस वर्ष के पास इस राशि को देने के लिए बहुत कुछ होगा, लेना आपकी कुशलता पर निर्भर करेगा। दोनों ओर लेन-देन की प्रक्रिया चलेगी, जिसमें शालीनता, धैर्य, परिश्रम और बुद्धिमानी का सही-सही उपयोग होना चाहिए। वर्ष की पहली तिमाही अर्थात् जनवरी से मार्च तक महीने आनंददायक, अर्थ प्राप्ति में सहजता और वैचारिक दक्षता प्रदान कर सकते हैं। परिवार में सुख-शांति का अनुभव कर सकते हैं। पुरुष को प्रारब्ध मार्ग दिखा सकते हैं। व्यापारी, उद्योगी, विद्यार्थी और शिक्षण से अब लोग अपने-अपने क्षेत्र में लगन लगाए रखेंगे जिसका परिणाम भी उत्साहदायक होगा। यदि आप नया काम करना चाहें तो भी कर सकते हैं। महिलाएं भी किसी न किसी रूप से लाभान्वित हो सकती हैं। सामान्य जन अपने-अपने क्षेत्र में उन्नति कर सकते हैं, फिर भी सबको अपनी क्षमता का ध्यान रखना होगा। वर्ष की दूसरी तिमाही अर्थात् अप्रैल से जून के महीने वा​णिज्य-व्यापार क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए कुछ चिंता के हो सकते हैं जिसमें छोटे कारोबारी अधिक प्रभावित हो सकते हैं जिसे समझदारी से पार करते रहने की चेष्टा उचित होगी। राजनीति में रहने वाले अपनी सोच को नई दिशा दे सकते हैं एवं अपने दायित्व के पालन द्वारा सुखी हो सकते हैं। सभी अपनी घर-गृहस्थी पर विशेष ध्यान दें, कोई भी ऐसा काम न करें, ​जिससे समस्या उत्पन्न हो। इस अवधि में स्वास्थ्य का ध्यान रखना अनिवार्य होगा। तीसरी तिमाही अर्थात् जुलाई से सितम्बर के महीने सबके लिए अच्छाई की ओर रहेंगे। इसमें पिछली प्रतिकूलता को ठीक किया जा सकता है। आत्मविश्वास और क्षमता का ह्रास हो रहा हो तो उसे लौटा लेने से कठिनाइयों का शमन हो सकता है। प्रयत्न उन्नति की ओर रहेंगे। प्रारब्ध भी पुरुषार्थ का साथ दे, इसके लिए अपने-अपने इष्ट देवता की शरण में जाना अच्छा होगा, जो सफलता को सुनिश्चित करेगा। महिलाएं विशेष प्रसन्न रह सकती हैं। वर्ष की चौथी तिमाही अर्थात् अक्टूबर से दिसम्बर के महीने, शरीरिक, मा​नसिक या किसी भी क्षेत्र में विशेष सावधानी के रहेंगे। इस अवधि में अच्छा परामर्श आवश्यक होगा। व्यापारी वर्ग और राजनीति से जुड़े लोग कठिन परिश्रम और समयानुसार उचित निर्णय से ही सफला प्राप्त कर सकेंगे। समयनिष्ठ जीवनचर्या स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होगी। मांगलिक कार्य संपन्न हो सकता है। तुला लग्न के लिए वर्ष प्रसन्नतादायक रहेगा और क्ष​ति की पूर्ति करा सकता है। विशेष सफलता के लिए भगवती दुर्गा और शनिदेव की प्रसन्नता आवश्यक होगी। प्रत्येक शुक्रवार को सादे और नीले पुष्प से देवी का अर्चन और काले तिल का दान करना अच्छा रहेगा और शुभांक 2-4-8 एवं शुभ रंग हल्का नीला और हरा।
वृश्चिक- इस वर्ष वृश्चिक राशिवालों के लिए समतल मार्ग में भी नीचे देखते हुए और दो कदम चलने के बाद एक कदम पीछे चलते हुए थोड़ा आंकलन करना उचित होगा। यदि कर्म मार्ग में कोई परिवर्तन मिले तो उसकी उपेक्षा न कर उस पर चल देना चाहिए किन्तु प्रत्येक परिवर्तन मार्ग का कोई अंश भी रुकावट बन सकता है, इसका ध्यान भी रखना प्रगति में सहायक होता है। अपने उद्देश्य के प्रति समर्पण के साथ ही कभी विपरीत स्थिति आने पर हठ के स्थान पर नम नीरा बन जाना और वस्तु स्थिति को देखते हुए विग्रह के बदले संधि का सहारा लेना लाभदायक होगा। सामर्थ्य को भी सहारे की आवश्यकता होती है जो, चाहे वह जिससे और जहां मिले, अपना लेना चाहिए। चाहे जो कोई क्षेत्र हो, उपरोक्त व्यवहार प्रगतिकारक होगा। व्यापार-उद्योग, परीक्षा-प्रतियोगिता, सार्वजनिक, व्यक्तिगत सेवा, घर-गृहस्थी या इसके बाहर भी इस सच्चाई को अपनाने से सुख की रक्षा हो सकती है। प्रत्येक क्रिया की प्रतिक्रिया भी होती है, इस सच्चाई का अनुभव हो सकता है। आर्थिक उन्नति के लिए आय-व्यय में संतुलन बनाना आवश्यक होगा। शरीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना होगा। वर्ष की पहली तिमाही अर्थात् जनवरी से मार्च के महीने प्रगतिकारक रहेंगे। प्रत्येक क्षेत्र के लोग सहयोग से अपनी स्थिति मजबूत बना सकते हैं। मांगलिक काम और धार्मिक आयोजन सरलता से पूरे हो सकते हैं। अर्थाभाव प्राय: नहीं के बराबर होगा। उद्योग-व्यापार से जुड़े लोग लाभ कमा सकते हैं। महिलाएं अपना दायित्व पूरा करने में पीछे नहीं रहेंगी और विद्यार्थी भी अपने प्रयत्न में सफल हो सकते हैं। नौकरी पेशा वाले कुछ कठिनाई का अनुभव कर सकते हैं किन्तु बेरोजगारों को रोजगार मिल सकता है। मनचाहा परिवर्तन भी संभव होगा। वर्ष की दूसरी तिमाही अर्थात् अप्रैल से जून के महीने मिलेजुले परिणाम वाले हो सकते हैं। मानसिक, शारीरिक स्वास्थ्य में कमी आ सकती है। प्रत्येक कदम सावधानी से उठाने की आवश्यकता हो सकती है। घर-गृहस्थी अच्छी तरह चल सके, इसके लिए परिवार का प्रत्येक सदस्य प्रयत्नशील रहे तो अच्छा होगा। व्यर्थ के वैर-विरोध से दूर रहना उचित होगा। आलस्य से जितना हो सके, दूर रहना अच्छा होगा। राजनीति और प्रशासनिक सेवा में लगे लोग कुछ असुविधा का अनुभव कर सकते हैं। परिवर्तन इस तिमाही की विशेषता होगी, अत: सावधानी और मिलनसारिता के साथ काम करना होगा। वर्ष की तीसरी तिमाही अर्थात् जुलाई से सितम्बर के महीने कम अनुकूल रह सकते हैं। किसी षड्यंत्र का शिकार न बने इसके लिए अपनी बुद्धि को संयत रखना होगा। अपने लाेग भी कभी-कभी विपरीत व्यवहार कर सकते हैं। शारीरिक स्वास्थ्य की समस्या और कर्मक्षेत्र में तनाव की स्थिति बन सकती है।​ विवेक और शुभचिंतकों का परामर्श सहायता कर सकेगा। आत्मविश्वास कभी भी विचलित नहीं होने से प्रत्येक विरोध को सहजता से पार कर सकते हैं। स्थिर बुद्धि ही लाभ और सुख के अवसर को पहचान सकती है, इसका ध्यान रखें। वर्ष की चौथी तिमाही अर्थात् अक्टूबर से दिसम्बर के महीने प्रत्येक क्षेत्र के लोगों के लिए उत्साहप्रद होंगे। यह अवधि सफलता की होगी। बिगड़ा या रुका हुआ काम बन सकता है। यश-मान-मर्यादा बढ़ेगी और परिश्रम तथा स्पष्ट विचार से लाभ होगा। किसी विलंबित न्याय संबंधी समस्या का अंत हो सकता है। वृश्चिक लग्न के लिए वर्ष परिश्रम, परीक्षा और क्षमता के सटीक प्रयोग करते रहने का होगा। अच्छे ​ परिणाम के लिए हनुमान जी की पूजा करें और मंगलवार को इक्कीस बार हनुमान चालीसा का पाठ करें। शुभांक 3-5-8 और शुभ रंग गैरिक लाल।
धनु- यह वर्ष धनु राशि वालों के लिए सर्वदा उन्मुक्त, प्रगतिकारक, सफलताओं से ओतप्रोत एवं प्रत्येक क्षेत्र में सशक्त स्थिति बनाने में सहायक होगा। हर ओर फैला हुआ प्रकाश कभी-कभी अ​तिरिक्त उत्साह से चकाचौंध हो जाता है और कई महत्वाकांक्षाओं को जन्म देने लगता है, लेकिन शीघ्रता से उठाया गया कदम या अमर्यादित आत्मविश्वास भटका भी सकता है, इसका ध्यान रखना होगा। मंद गति से चलते हुए हर विषय का सही-सही आकलन करना एवं अपनी क्षमता के अनुसार अवसरों को पकड़ना आपकी दक्षता का परिचय देगा। चल रही समस्याओं की समाप्ति,नये कार्यक्रम के निश्चय में सहायक होगी। आर्थिक रूप से समृद्धि की यात्रा में कहीं ऐसा नहीं हो कि गलत रास्ता पकड़ लें। उद्योग-व्यापार में लगे लोग तीव्र गति से सफलता प्राप्त कर सकते हैं। नौकरी पेशा लोग चाहेें वह प्रशासनिक हों या सामान्य, मनचाहा स्थानांतरण, निवास परिवर्तन या प्रोन्नति कर सकते हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि, नेतृत्व की क्षमता में विकास, यश देने वाले कृतित्व में सफलता, किसी पुराने रोग से मुक्ति, नया आत्मविश्वास संभव है। यदि सधा हुआ कदम हो, तो शायद रास्ता बदलने की आवश्यकता न पड़े। आलस्य और लापरवाही को स्थान न देना ही प्रगति सुनिश्चित करेगा। वर्ष की पहली तिमाही अर्थात् जनवरी से मार्च के महीने आर्थिक उत्थान के लिए प्रेरणा देंगे और नये काम के लिए प्रोत्साहन भर देंगे। प्रभावशाली लोगों का साथ मिलेगा और रुके हुए काम शीघ्रता से पूरे हो सकते हैं। फिर भी थोड़ा संभल कर चलना पड़ सकता है। अविवाहितों के लिए वैवाहिक स्थिति बन सकती है। घर-गृहस्थी का आनंद प्राप्त होगा। महिलाएं, बुद्धिजीवी, विद्यार्थी और सामान्यजन भी सुखी हो सकते हैं। वर्ष की दूसरी तिमाही अर्थात् अप्रैल से जून के महीने कर्मक्षेत्र में व्यस्तता बढ़ाते रहेंगे। अपनों को साकार होते हुए देख सकते हैं किन्तु इस अवधि में कहीं क्षमता का दुरुपयोग न हो और व्यर्थ के प्रयास उलझन पैदा न करें, इसका ध्यान गंभीरता से रखना होगा। यह समय थकान रहते हुए विश्राम के लिए नहीं रुकने का होगा। महिलाएं अपनी आकांक्षा को नियंत्रित करती रहें और भविष्य को सुखद बनाने का प्रयास करें। कष्टकारी और क्षति पहुंचाने वाली योजनाओं पर ध्यान रखना होगा और शीघ्रता को थोड़ी धीमी गति देना सुरक्षा प्रदान करेगा। व्यर्थ के खर्च से बचते हुए लाभ के आसान तरीकों से जहां तक हो सके सावधानी बरतनी होगी। वर्ष की तीसरी तिमाही अर्थात् जुलाई से सितम्बर के महीने शायद भूमि और दलाली के काम में अच्छा लाभ दिला सकते हैं। विदेशी मुद्रा और आभूषण विक्रेता अधिक लाभवान हो सकते हैं। व्यापारी​ सफलतापूर्वक उन्नति की ओर जा सकते हैं। सभी क्षेत्र के लोग सक्रिय रहें तो अपनी किस्मत बदल सकते हैं। कोई भी भूल पूरी न होने वाली क्षति की ओर धकेल सकती है, अत: फिसलन से बचना होगा। वर्ष की चौथी तिमाही अर्थात् अक्टूबर से दिसम्बर के महीने पिछली तिमाहियों की समीक्षा करते हुए अलग कार्यक्रम निर्धारित करने का होगा। अधिक व्यस्तता और दांवपेंच को समझते हुए चलना उचित होगा। राजनीति में रहने वाले अच्छी प्रगति कर सकते हैं। दूसरों की जिम्मेदारी अपने सिर पर ओढ़ लेना समस्याप्रद हो सकता है। अगर कोई आर्थिक योजना हो तो उसे लागू करने की चेष्टा होनी चाहिए। प्रारब्ध, आत्मविश्वास, सहयोग, शांति और तत्परता आवश्यक है, जिसे ध्यान में रखना आवश्यक होगा। धनु लग्न के लिए वर्ष चौतरफा उत्साह का रहेगा। अच्छे परिणाम के लिए भगवती लक्ष्मी की उपासना और शक्ति के अनुसार दान-पुण्य करते रहना उचित होगा। शुभांक 3-5-7 और शुभ रंग पीला।
मकर- कभी-कभी विशेष सावधानी बड़ी विपत्ति से रक्षा कर देती है। यह वर्ष मकर राशि वालों के लिए यही सत्य मार्गदर्शक का काम कर सकता है। इस वर्ष आर्थिक-सामाजिक क्षेत्र झूले की तरह कभी दायें तो कभी बायें होते रहने से तनाव की स्थिति उत्पन्न कर सकता है जिसमें शांत रहना एक अच्छा प्रयोग सिद्ध हो सकता है जो स्थिर मस्तिष्क से ही संभव है। यदि यह हो सका तो कठिन से कठिन व्यवस्था को भी सरलता से पार किया जा सकता है। कल्पित योजना बनाना और यथार्थ को भुलाये रखना एक ऐसी स्थिति सामने खड़ी कर सकता है जिसे सम्भालना कठिन होगा। किसी भी प्रकार का सहयोग जांच- परख कर स्वीकार करना ही उचित होगा। कभी- कभी उत्साहहीनता दुस्साहस का रूप ले सकता है। अत: आत्मविश्वास के साथ उत्साह बनाये रखना उचित होगा। कर्मक्षेत्र में भी सावधानी रखने से पुरुषार्थ प्रारब्ध को बदलने में सफल भूमिका निभा सकता है और संभव है कोई अनहोनी जैसी सफलता मिल जाय। शुभचिंतकों का परामर्श सुरक्षा प्रदान करने में सहायक होगा। कानूनी बातों को कल पर छोड़ना उचित नहीं होगा। समस्या को समस्या नहीं प्रगति की एक अवस्था मानकर चला जाय तो बड़ी उपलब्धि हो सकती है। यदि कोई मंगल कार्य हो तो उसे शीघ्र पूरा करना उचित होगा। वर्ष की पहली तिमाही अर्थात् जनवरी से मार्च के महीने संघर्षपूर्ण रहते हुए कर्मक्षेत्र को नयी दिशा दे सकते हैं। मनोयोग से किया गया काम निष्फल नहीं होगा। महिलाएं पूरी मजबूती के साथ अपनी घर गृहस्थी को संभालें और अपनी आकांक्षाओं को कम करें। विद्यार्थियों के पास फालतू बातों के लिए समय नहीं होना चाहिए। साथ ही संगी-साथियों के साथ व्यर्थ का समय न गंवाएं। नौकरी पेशा के लोग लाभवान हो सकते हैं। सटोरिये सावधान रहें। वर्ष की दूसरी तिमाही अर्थात् अप्रैल से जून के महीने आर्थिक उन्नति के हो सकते हैं। व्यवसायी सुख का अनुभव कर सकते हैं। सामान्यजन भी सुख-शांति का अनुभव कर सकते हैं। इस अवधि में ऋण का बोझ उतार फेंकने की चेष्टा होती रहनी चाहिए। कोई अप्रत्याशित सफलता भी मिल सकती है। थकान मिटाने के लिए सार्वजनिक या धर्म संबंधी किसी काम में जुट जाना लाभदायक सिद्ध होगा। विद्यार्थियों के लिए परीक्षा- प्रतियोगिता में सफल होने और काम के किसी भी अवसर को नहीं खोने देने का उपयुक्त समय होगा। वर्ष की तिमाही अर्थात जुलाई से सितम्बर के महीने थोड़ा लाभ और अधिक खर्च के हो सकते हैं। संघर्ष की बढ़ती अवस्था में विवेक ही आपका वास्तविक मित्र और सहयोगी होगा। इस अवधि में प्रत्येक आहार- व्यवहार शारीरिक स्वास्थ्य का निर्णय करेगा, लेकिन आर्थिक स्वास्थ्य में वृद्धि कर सकेगा। विरोधी और प्रतियोगी ताकतों पर विजय मिल सकती है। शुभ विचार द्वारा किसी भी समस्या का समाधान संभव हो सकेगा। विद्यार्थी अच्छा परिणाम ला सकेंगे। महिलाएं भी शौक पूरा कर सकती हैं। यह अवधि अच्छा समाचार भी दे सकती है। वर्ष की चौथी तिमाही अर्थात् अक्टूबर से दिसम्बर के महीने कुछ व्यवधानों के रहते हुए भी आर्थिक विकास में सहायक होंगे। इस अवधि में अनुमान से परे किसी आकस्मिक घटना का सामना करना पड़ सकता है। गृहस्थी सम्भाल रखने में घर के सदस्य सहायक होंगे और आर्थिक स्वालंबन बढ़ सकता है। आवश्यक खर्च पर नियंत्रण और समय का सदुपयोग आवश्यक होगा। मकर लग्न के लिए वर्ष मिलाजुला परिणाम दे सकता है। अच्छे परिणाम को सार्थक बनाने के लिए प्रत्येक शनिवार को मां काली का दर्शन करें और यथाशक्ति गरीबों को अन्न का दान करें। शुभांक 4, 6, 8 और शुभ रंग नीला।
कुम्भ- यह वर्ष कुम्भ राशि वालों के लिए उचित निर्णय लेने से लाभदायक सिद्ध हो सकता है। किसी भी क्षेत्र में उत्थान या पतन में प्रारब्ध, पुरुषार्थ और देश- काल व पात्र की भूमिका होती है, साथ ही स्वयं ही स्वयं के उत्थान और स्वयं ही स्वयं का पतन, यह भी स्वयं का उत्तरदायित्व है, इस ध्रुव सत्य को समझना और इसके अनुसार ही कर्मक्षेत्र में पूरे आत्मविश्वास के साथ जमे रहना शून्य काे सहस्र में बदल सकता है, इसका ध्यान रखें। दूसरे के वादों पर निर्भरता समस्या में डाल सकती है। किसी भी योजना की सफलता तब साकार होती है जब अपनी क्षमता का सदुपयोग करते हुए कल्पना जगत से बाहर आकर यथार्थ का सामना किया जाय। शारीरिक स्वास्थ्य की रक्षा और मानसिक स्थिति को द्वंद्व से निकालते रहना ही इस राशि का कल्याण कर सकता है। व्यापारी, विद्यार्थी, राजनीतिक, शिक्षण, सरकारी सेवा या अन्य लोगों के लिए भी यही सच्चाई बनी रहेगी। साथ ही यही वह रास्ता होगा जिस पर चलकर प्रारब्ध, पुरुषार्थ के साथ होगा। अत: किसी भी कदम को व्यर्थ नहीं जाने देना होगा। इस राशि की साढ़ेसाती भी कल्याणकारक होती है यदि हर स्थिति को कर्मफल माना जाय। संभव है कि अचानक यह वर्ष एक ऐसी स्थिति को बना दे कि गंतव्य जातक के अनुमान के विपरीत भाग्यशाली बन जाय। वर्ष की पहली तिमाही अर्थात् जनवरी से मार्च के महीनों में ऐसे पथ पर चलना है जिस पर प्रकाश ही प्रकाश हो और दु:ख भी सुख बन जाय। स्वास्थ्य भी श्रम करने में सहायक होगा और वर्षों की मनोकामना हठात् पूरी होती दिखेगी। परिवार,मित्र, उच्चाधिकारी और अन्य सहयोगी खुलकर साथ देने में कमी नहीं रखेंगे जिससे उन्नति की ओर अबाध यात्रा होती रहेगी। सर्राफा के व्यापारी अधिक सुखी हो सकते हैं। बुद्धिजीवी, शिक्षा से जुड़े लोग, विद्यार्थी और महिलाएं प्रसन्नता के साथ अपनी-अपनी भूमिका पालन करते रहेंगे, किन्तु शारीरिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान रखना भी आवश्यक होगा। अत: संयम, नियम का पालन ​अनिवार्य रहेगा। वर्ष की दूसरी तिमाही अर्थात् अप्रैल से जून महीने कुछ स्वाभाविक रूप से समस्याप्रद हो सकते हैं। दिनचर्या को नियमों में रखना कठिन होगा। कभी-कभी निराशा भी बढ़ सकती है। अत: आत्मविश्वास को बनाये रखने से सबका समाधान हो सकता है। रोग, रिपु और ऋण अपना फंदा कस सकते हैं, जिनकी पकड़ में नहीं आने का एकमात्र साधन है, आलस्य का त्याग और कर्मक्षेत्र में लगे रहना। व्यवसायी कुछ असुविधा का अनुभव कर सकते हैं। बनता हुआ मंगल काम रुक जा सकता है किन्तु निराशा या सामयिक असफलता की ओर न देखकर आगे बढ़ते रहने से सभी कठिनाई दूर हो सकती है। स्वास्थ्य में भी सुधार की संभावना रहेगी और बकाये भुगतान की प्राप्ति आर्थिक दिक्कतों को कम कर सकता है। वर्ष की तिमाही अर्थात् जुलाई से सितम्बर के महीने मिलाजुला परिणाम दे सकते हैं। अत: विपरीत स्थिति में बुद्धि को स्थिर रखकर ही निर्णय लेना उचित रहेगा। आर्थिक और शारीरिक सावधानी रखने से किसी भी समस्या का समाधान हो सकता है। जोखिम उठाने और अंधाधुंध काम करने की प्रवृत्ति को नियंत्रित रखना कल्याणकारक होगा। वर्ष की चौथी तिमाही अर्थात् अक्टूबर से दिसम्बर के महीने कठिनाई उत्पन्न कर सकते हैं। सरकारी या कोई कानूनी उलझन परेशानी का कारण हो सकती है। व्ययभार से आर्थिक स्थिति तनाव में आ सकती है, आत्मविश्वास की परीक्षा हो सकती है, लेकिन अंतत: प्रतिकूलता अनुकूलता में परिवर्तित हो सकती है। कुम्भ लग्न के लिए वर्ष पग-पग पर संभलकर आगे बढ़ने का होगा। अच्छे परिणाम के प्रत्येक शनिवार को काला तिल, काला उड़द, काली मिठाई कुछ सिक्कों के साथ मंदिर में दान करें और यथा संभव गरीबों को भोजन करायें। शुभांक 3, 6, 8 और शुभ रंग आसमानी नीला।
मीन- यह वर्ष मीन राशि वालों के लिए कर्मक्षेत्र और आर्थिक क्षेत्र संगति और विसंगति के झूले पर बैठा मिलेगा। फिर भी हताश होने की जगह आत्मिक उत्साह की आवश्यकता प्राय: पड़ती रहेगी। सामाजिक रिश्ते और पारिवारिक रिश्ते तालमेल बैठाते रहने से आनंद देते हैं, इसका ध्यान कर्मक्षेत्र और व्यक्ति क्षेत्र में पूरे महत्व के साथ देना उचित होगा ताकि भटकने पर कोई संकेत देकर उचित पक्ष का निर्देश कर दे और डगमगाते कदम थमकर ही सही अपनी गति को नहीं रुकने दे। प्रतिक्रियाओं पर समय की बर्बादी उचित नहीं होगी। प्रकाश के बाद अंधेरा और अंधेरा के बाद सुहाना प्रकाश आवश्यक होता है, इन राशिवालों के लिए ऐसा ही कुछ हो सकता है। कर्म स्वयं में आनंद है, इसे कभी भी अवरुद्ध नहीं करना ही प्रगति को अबाध करता है तभी पुरुषार्थ को प्रारब्ध मार्ग दिखाता है। मन को शांत रखते हुए समय-समय पर शुभचिंतकों से परामर्श लेते रहना कठिन परिस्थितियों में भी आपके लिए सुरक्षा कवच का काम करेगा, ताकि आप प्रतिकूलता को अनुकूलता में परिवर्तित कर पाने में सक्षम रहें। वर्ष की पहली तिमाही अर्थात् जनवरी से मार्च के महीने प्रसन्नतापूर्वक व्यतीत होंगे, किन्तु इसमें आगामी समस्याओं का आभास भी होता रहेगा। जहां तक हो सके आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने की चेष्टा होती रहनी चाहिए। साथ ही स्वास्थ्य, सहयोग, कर्त्तव्य और परस्पर दायित्वों के प्रति निष्ठावान बने रहना आवश्यक होगा। व्यापारी वर्ग लाभवान रहेगा और शिक्षा से जुड़े लोग भी प्रसन्नता का अनुभव कर सकते हैं, साथ ही अवसर को उपलब्धि में बदल सकते हैं। विद्यार्थी, महिलाएं और सामान्य जन सुखी रहेंगे। राजनीति से जुड़े लोगों को ध्यान पूर्वक मधुर व्यवहार के साथ आगे बढ़ना होगा। वर्ष की दूसरी तिमाही अर्थात् अप्रैल से जून के महीने प्राय: हर क्षेत्र में सावधानी पूर्वक कदम उठाने के होंगे। अधिक खर्च या अर्थ हानि या कोई आर्थिक वादा पूरा न होने से समस्या बढ़ सकती है। वाणिज्य व्यापार से जुड़े लोग, बुद्धिजीवी सावधान रहें और अपने निर्णयों पर गंभीरता पूर्वक विचार करें। खानपान और दिनचर्या पर ध्यान रखना आवश्यक होगा। कर्त्तव्य- परायणता और संयमी भावना से श्रम साध्य सफलता मिल सकती है। वयोवृद्ध अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देते रहें। वर्ष की तीसरी तिमाही अर्थात् जुलाई से सितम्बर के महीने कुछ ऐसी समस्या पैदा कर सकते हैं जिन्हें संभालना संभवत: कठिन हो सकता है, इसमें आध्यात्मिक भावना सहारा देगी और सच्चे मित्रों की सहायता उपयोगी सिद्ध होगी। अत: मित्रता निभाना, बड़ाें का आशीर्वाद प्राप्त करना और आत्मविश्वास जगाये रखना सहायक रहेगा। महिलाएं अपनी आकांक्षाओं को कम करते हुए अनावश्यक खर्च से बचें। वर्ष की चौथी तिमाही अर्थात् अक्टूबर से दिसम्बर के महीने सार्थक खर्चे के साथ स्थिरता लाने की रोशनी दे सकते हैं। प्रभावशाली व श्रेष्ठजनों की संगति उत्साहित करने के साथ उचित मार्गदर्शन करती रहेगी जिससे हानि को लाभ में बदल पाने में सहायता होगी। अच्छे कामों के प्रति रुचि बढ़ेगी जिससे जो आनन्द प्राप्त होगा, उसमें प्रगति स्पष्ट होती रहेगी। पुरुषार्थ और प्रारब्ध एक दूसरे के साथ चलेंगे। मीन लग्न के लिए वर्ष सत्कर्म से सफलता का रहेगा। अच्छे परिणाम के लिए मां लक्ष्मी की उपासना करें और हो सके तो नित्य श्रीसूक्त का पाठ करें। शुभांक 4, 7, 8 शुभ रंग पीला।
सभी के कल्याण के लिए भगवान से प्रार्थना।

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