भगवान की पूजा करने पर हमलोग ताली क्यों बजाते है ?

caping on worship

आमतौर पर भगवान की पूजा करने पर हमलोग ताली क्यों बजाते है ? आखिर यह प्रचलन कब से आरम्‍भ हुई?

श्रीमद्भागवत के अनुसार भजन-कीर्तन में ताली बजाने की प्रथा भक्त प्रह्लाद ने शुरु की थी, क्योंकि जब वे भगवान का भजन करते थे तो जोर-जोर से ताली बजाते थे। उनको देखकर ही अन्य लोग उनकी तरह ताली बजाने लगे। हम किसी भी मंदिर में देखते है कि पूजा के दौरान भक्त ताली बजाते है। ऐसा करने से हमारे शरीर को कई तरह के लाभ होते हैं।

बता दें कि हमारे शरीर के 29 एक्यूप्रेशर पॉइंट्स हमारे हाथों में है। सभी एक्यूप्रेशर को दबाने का सबसे सरल तरीका है ताली बजाना । ताली बजाने से हाथों के सारे प्रेशर पॉइंट दबते है जिससे संबंधित अंग तक रक्त और ऑक्सीजन का संचार अच्छे से होता है। ताली बजाते हुए अगर हाथ लाल हो जाए और पसीना आने लगे तो समझ जाइए कि आपके आंतरिक अंगों मे ऊर्जा भर गयी है और सभी अंग सही ढंग से कार्य कर रहे है।

रक्त का संचार होता है अच्छा

1. ताली बजाने से रक्त में बुरे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होती है, जिससे हार्ट अटैक जैसी समस्या की आशंका कम हो जाती है। साथ ही शरीर के सभी भाग में रक्त का संचार अच्छे से होता है। इससे फेफड़ों में अस्थमा संबंधित रोग का खतरा भी टलता है।

2. तेज ताली बजाने से आंख, कान, दिमाग, रीढ़ की हड्डी, कंधे आदि सभी बिंदुओं पर प्रभाव पड़ता है जिससे तनाव, अनिद्रा, आंखों की कमजोरी, पुराना सिर दर्द, जुकाम, बालों का झड़ना जैसी समस्या से राहत मिलती है।

3. ताली से मांसपेशियां प्रभावित होती हैं जिससे पूरे शरीर में ऊर्जा का संचार अच्छे से होता है। इतना ही नहीं नियमित ताली की आदत से खून में सफेद कणों को ताकत मिलती है जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

शेयर करें

मुख्य समाचार

गुरु नानक के नाम पर भवन बनायेगी राज्य सरकार

कोलकाता : सोमवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घोषणा की कि सिख गुरुओं के पहले गुरु और सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक की 550वीं आगे पढ़ें »

तेज रफ्तार से आ रही स्कूल बस लैंप पोस्ट से टकरायी, 20 घायल

कोलकाता : ड्राइवर द्वारा नियंत्रण खोने से तेज रफ्तार स्कूल बस लैंप पोस्ट से जा टकरायी। घटना चितपुर थानांतर्गत पी.के मुखर्जी रोड व काशीपुर रोड आगे पढ़ें »

ऊपर