आखिर क्यों आती हैं हिचकियां

कोलकाता : किसी भी इंसान को हिचकी आना एक सामान्य बात है। बड़े बुजुर्गों का कहना है कि जब कोई हमें याद करता है तो हिचकी आती है। यह कहावत सही हो सकती है। हालांकि इसके पीछे एक बड़ा वैज्ञानिक कारण भी है।
फेफड़ों में हवा भरने से आती है हिचकी
मेडिकल एक्सपर्ट के मुताबिक, जब हम सांस लेते हैं तो हमारे फेफड़ों में हवा भर जाती है। इसके चलते सीने और पेट के बीच के हिस्से (डायाफ्राम) में कंपन होती है और वह सिकुड़ जाता है। कई बार इस थरथराहट से सांस लेने का फ्लो टूट जाता है और हिचकी आने लगती है।
तीखा भोजन करने से भी आती हैं हिचकियां
डॉक्टरों का कहना है कि कई बार ज्यादा मसालेदार या तीखा भोजन करने से भी लोगों का हिचकी आने लगती है। वहीं कई बार बिना पर्याप्त तरीके से चबाए भोजन को निगलने की कोशिश करने से भी हिचकी आने लगती हैं। कई बार खाना खाने या गैस के चलते जब पेट बहुत ज्यादा भर जाता है तो भी हिचकी आने लगती है।
गले से निकलने लगती है आवाज
जब भी हिचकी शुरू होती हैं तो गले से अजीब तरह की आवाजें आने लगती हैं। ये आवाजें हमारे वोकल कॉर्ड से जुड़ी होती हैं। दरअसल डायाफ्राम के सिकुड़ जाने से वोकल कॉर्ड कुछ क्षणों के लिए बंद हो जाता है, जिसके चलते मुंह से हिचकी की ध्वनि निकलने लगती है। जिसके चलते व्यक्ति को परेशानी होने लगती हैं। ऐसे में कुछ उपाय करके आप हिचकियों को बंद कर सकते हैं।
हिचकी रोकने के उपाय
– हिचकी को रोकने के लिए आप एक गिलास बर्फीले ठंडे पानी की लगातार 9-10 घूंट पिएं। जब आप पानी को निगल रहे होते हैं तो अन्नप्रणाली के लयबद्ध संकुचन डायाफ्राम की ऐंठन को खत्म कर सकते हैं।
– हिचकी आने पर एक छोटे पेपर बैग में धीरे-धीरे और गहरी सांस लें। फिर धीरे-धीरे सांसों के जरिए बैग को फुलाएं। यह ब्लड में कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर को बढ़ा सकता है और ज्यादा ऑक्सीजन लाने के लिए डायाफ्राम कॉन्ट्रेक्ट को और ज्यादा गहरा कर सकता है। ध्यान रहे कि इसके लिए आप कभी भी प्लास्टिक बैग का उपयोग न करें।
– हिचकी लगातार आने पर आप जीभ बाहर निकाल कर इसे रोक सकते हैं। सुनने में यह थोड़ा अजीब लग सकता है लेकिन यह ट्रिक काम की साबित होगी। दरअसल आपकी जीभ एक दबाव बिंदु है और अपनी जीभ को खींचने से आपके गले की मांसपेशियां उत्तेजित होती हैं।
फायदे-नुकसान
– हिचकी को रोकने के लिए आप कुछ देर के लिए अपनी सांस रोक सकते हैं। कुछ सेकंड के लिए अपनी सांस रोककर रखने से आपके शरीर में कार्बन डाइऑक्साइड इफेक्टिव रूप से बनी रहती है। यह डायाफ्राम में ऐंठन को खत्म करने में मदद करता है और इस तरीके से हिचकी को रोका जा सकता है।
– अगर आपके पास पेपर बैग नहीं है तो किसी आरामदायक जगह पर बैठ जाएं, अब अपने घुटनों को अपनी छाती पर लाएं और उन्हें दो मिनट के लिए वहीं रखें। घुटनों को खींचने से छाती संकुचित होती है, जिससे डायाफ्राम की ऐंठन बंद हो जाती है।

 

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