चेहरे के कई हिस्सों में होते हैं वाइटहेड्स, जानिए क्या है कारण

नई दिल्ली : चेहरे के वाइटहेड्स बहुत खराब लगते हैं। ये चेहरे के किसी भी हिस्से पर हो सकते हैं। आम तौर पर लोग वाइटहेड्स को फोड़ने या दबाने की कोशिश करते हैं। हालाँकि चेहरे के अलग अलग हिस्से में वाइटहेड्स होने के कई कारण है।

नाक पर क्यों होता है वाइटहेड्स
नाक के आसपास की जगह यानी टी ज़ोन वो जगह है, जहां तेल का उत्पादन सबसे ज़्यादा होता है। यह ऑइली या कॉम्बिनेशन स्किन टाइप पर और ज़्यादा होने और दिखाई देने वाली समस्या है। यहां वाइटहेड्स अक्सर ब्लैकहेड्स के साथ होते हैं और जल्दी हटते नहीं, क्योंकि उनकी जड़ें हमारी त्वचा के भीतर गहराई में छुपी होती हैं। ऐसे स्किनकेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल, जिनमें सैलिसिलिक ऐसिड, ग्लाइकॉलिक ऐसिड या लैक्टिक ऐसिड मौजूद हो नाक के आसपास के वाइटहेड्स को हटाने में बहुत प्रभावी होते हैं।

माथे पर वाइटहेड्स
इस हिस्से में भी ज्यादा वाइटहेड्स होते हैं, क्योंकि यहां तेल का उत्पादन ज्यादा होता है। यदि आपके शॉर्ट हेयर हैं और बाल माथे पर आते हैं तो यह भी रोमछिद्रों के बंद होने की वजह हो सकती है। आपके बालों की नमी, तेल और बैक्टीरिया माथे पर ट्रांसफर होते हैं और जिसकी वजह से वाइटहेड्स या पिम्पल्स होते हैं। ऐसा हेयर स्टाइल रखें, जिससे माथे पर बाल ना आएं और आपकी त्वचा की सेहत अच्छी हो सकती है। अपने माथे को साफ करने के लिए सौम्य एक्स्फ़ॉलिएटिंग क्लेंज़र का इस्तेमाल करें, जिससे यहां के बंद रोमछिद्र खुल जाएं और इस हिस्से में अतिरिक्त तेल के उत्पादन कम हो।

गालों पर वाइटहेड्स
गालों पर छोटे-छोटे फूले हुए हिस्से यानी बम्प्स नज़र आते हैं तो ये वाइटहेड्स हो सकते हैं या फिर केराटोसिस पिलैरिस भी हो सकते हैं। यदि आपकी त्वचा हेयर फ़ॉलिकल्स में अतिरिक्त केराटिन का उत्पादन करती है तो आपको केराटोसिसस पिलैरिस (केपी) हो सकता है। ये वाइटहेड्स की तरह ही होते हैं, लेकिन इसका इलाज अलग तरीके से किया जाता है। जिनकी त्वचा रूखी होती है, उन्हें केपी होने की संभावना ज़्यादा होती है, जबकि जिनकी त्वचा ऑइली होती है उन्हें वाइटहेड्स होने की संभावना अधिक होती है। यह जाने की गालों पर मौजूद ये बम्प्स वाइटहेड्स हैं या केपी जानने के बाद इलाज करवाएं और अपनी डाइट में ओमेगा 3 और विटामिन A शामिल करें।

ठोढ़ी पर वाइटहेड्स
माथे और नाक की ही तरह चेहरे पर भी प्राकृतिक रूप से तेल का ज़्यादा होता है। ठोढ़ी पर होने वाले वाइटहेड्स हॉर्मोनल बदलाव के कारण भी होते हैं और अक्सर ऐन्ड्रोजेन का स्तर बढ़ने से ज़्यादा और बहुत गाढ़ा सीबम निकलता है। वाइटहेड्स और पिम्पल्स हॉर्मोनल असंतुलन की वजह से होते हैं और आपको ऐसी चीज़ों को अपनी डायट से बाहर निकाल देना चाहिए, जिनमें हॉर्मोन्स का इस्तेमाल होता है, जैसे- डेयरी प्रोडक्ट्स।

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