सनातन परंपरा में क्या है समलैंगिक विवाह को लेकर मान्यता? इनके दर्शन से लगता है बड़ा दोष!

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कोलकाता: जिस समलैंगिक विवाह को लेकर दुनिया के कुछेक देशों में कानूनी मान्यता मिली हुई है, उसे लेकर क्या कहता है हिंदू धर्म? सनातन परंपरा से जुड़े संत और विद्वान आखिर इसे क्यों मानते हैं मानसिक बीमारी, आईए जानते है- लोकमान्यताओं के अनुसार हिंदू धर्म में भगवान विष्णु और भगवान शिव के स्त्री रूप के मिलन से भगवान अयप्पा का जन्म हुआ था। इसी प्रकार एक श्राप के चलते राजा इल के स्त्री रूप में परिवर्तित होने के बाद ही उनका विवाह बुध से हुआ, लेकिन किसी देवी का अन्य देवी या फिर किसी देवता का किसी अन्य देवता के साथ विवाह का कोई जिक्र नहीं मिलता है। हमारे ऋषि-मुनियों ने न तो इसकी इजाजत दी और न ही कहीं इसका उल्लेख किया।

हिंदू महासभा के अध्यक्ष के अनुसार इस संसार के सबसे पहले ट्रांस्जेंडर का नाम राजा इल था। मान्यता है कि एक बार वे शिवलोक के उस प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश कर गए थे, जहां पर भगवान शिव और माता पार्वती विश्राम किया करते थे। मान्यता कि उस प्रतिबंधित क्षेत्र में जाना वाला कोई भी पुरुष व्यक्ति स्त्री में परिवर्तित हो जाया करता था। इस कारण राजा इल इला में परिवर्तित हो गए और उनका बाद में विवाह बुध से हुआ और उनसे पुरुरवा नाम की संतान हुई। जब पुरुरवा बड़े हुए तो उन्होंने अपनी मां के दु:खी होने पर उसका कारण पूछा। जब उन्हें सच्चाई ज्ञात हुई तो उन्होंने शिव साधना करके राजा इल को इस श्राप से मुक्ति दिलाई।

समलैंगिकों के दर्शन से लगता है बड़ा दोष!

साधु संत के अनुसार समलैंगिक विवाह समाज में कुरीति पैदा करने वाली परंपरा है। खास बात यह भी कि ऐसे विवाह की कोई सामाजिक उपयोगिता भी नहीं है। पौराणिक कथाओं में स्त्री श्रापवश या किसी अन्य कारण से स्त्री से पुरुष होने का प्रसंग तो मिलता है, लेकिन किसी पुरुष का पुरुष से या फिर स्त्री का स्त्री से विवाह होने का कोई भी जिक्र नहीं मिलता है। समलैंगिक विवाह करने वाले लोगों का दर्शन करने का ही बड़ा दोष लगता है।

इसे मान्यता देने का न सिर्फ केंद्र सरकार बल्कि साधु संत भी कर रहें विरोध

समलैंगिक विवाह को मान्यता देने का न सिर्फ केंद्र सरकार बल्कि साधु संत भी पुरजोर विरोध कर रहे हैं. स्वामी चक्रपाणि के अनुसार पुरातन काल में ऐसी घटनाएं परिस्थितिजन्य हुई हैं और उसमें भी स्त्री और पुरुष का ही विवाह हुआ है, न कि पुरुष और पुरुष का या फिर स्त्री और स्त्री और स्त्री का।

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