उत्तर प्रदेश : अब कैदियों को नहीं ले जाया जाएगा अदालत!

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में अब जेल में बंद कैदियों को पेशी के लिए अदालत नहीं ले जाया जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि मुख्यमंत्री योगी ‌आदित्यनाथ ने कहा कि अब सभी कैदियों पर चल रहे केस की सुनवाई वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए होगी। इस नियम के लागू होने के बाद कैदियों को बाहर ले जाने की जरूरत नहीं होगी और वे बाहरी व्यक्तियों के सम्पर्क में नहीं आ सकेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर इस नियम को लागू करने में किसी प्रकार की दिक्कत आती है तो हम कानून में बदलाव भी लाएंगे।

कानून में संशोधन का सुझाव

दरअसल, सीएम योगी ने अदालत में कैदियों की पेशी पर कारागार प्रशासन और सुधार विभाग के साथ मंगलवार की रात समीक्षा बैठक की। जिसमें उन्होंने अधिकारियों को अदालत में कैदियों की पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से करवाने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर कानून में संशोधन किए जाएंगे।

वीडियो कांफ्रेंसिंग के मुख्य लक्ष्य

सूत्रों का कहना है कि गत माह सम्‍भल में अदालत ले जाते समय अज्ञात बदमाश पुलिस वैन में मौजूद दो पुलिसकर्मियों की हत्या कर अपराधियों को छुड़ा ले गए थे। इसके अलावा पहले भी अदालत में पेशी के दौरान दो कैदी फरार हो गए थे। कैदियों को पेशी के लिए ले जाते वक्त फरार हो जाने और छुड़ा ले जाने की घटनाओं को रोकने के लिए मुख्यमंत्री द्वारा लिया गया फैसला अहम माना जा रहा है।

कारागारों में सीसीटीवी कैमरा लगाने के निर्देश

कैदियों की वीडियो कांफ्रेंसिंग के लिए प्रदेश सरकार पूरे एक्शन में है। उन्होंने कारागारों में जल्द से जल्द सीसीटीवी कैमरा और अन्य आवश्यक उपकरण लगाने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने कारागारों में चल रही अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के भी निर्देश दिए। इसके अलावा उन्होंने कारागार के अधिकारियों को कैदियों के साथ रियायत न बरतने को भी कहा है।

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