अनलॉक : कोविड नियम नहीं मानने वालों को बसों में ‘नो एंट्री’

सिर्फ सिटिंग की होगी व्यवस्था खड़े होकर यात्रा करने वालों को इजाजत नहीं
राज्यभर में सरकारी बसों की संख्या 3500
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : 1 जुलाई से राज्य में परिवहन सेवाएं चालू की जा रही है, जिसमें बस, ऑटों, टैक्सी, ट्राम, जलपथ सेवा शामिल है। इन अनलॉक में परिवहन सेवाओं को चालू करना तथा यात्रियों की आवाजाही की व्यवस्था पर नजर रखना सरकार के लिए भी बड़ी चुनौती होगी। इस चुनौती का सामना करने के लिए राज्य का परिवहन विभाग पूरी तरह तैयार है। परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हमारी तरफ से पूरी तैयारी कर ली गयी है। यहां हम सरकारी बसों की बात कर रहे है जिन पर विभाग की ओर से पूरी निगरानी की जाएगी कि वहां कोविड के नियमों का सही तरीके से पालन किया जा रहा है कि नहीं। इस दौरान अगर कहीं कोई कोताही देखी जाती है तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई तक करने की योजना है।
रोजाना होगा बसों का सैनिटाइजेशन
अधिकारी ने बताया कि बसों का रोजाना सैनिटाइजेशन किया जाएगा ताकि संक्रमण का खतरा न बढ़े। कोलकाता में ही करीब 900 बसें है जो प्रतिदिन कम से कम 4-5 ट्रीप पूरा करती है। ऐसे में अलग-अलग जगहों के यात्री उसमें चढ़ेंगे तो सफाई पर ध्यान देना अति आवश्यक है।
मास्क नहीं है तो बस में चढ़ने की इजाजत नहीं
इसबार के अनलॉक में कोविड नियमों को मानना सभी की प्राथमिकता होगी। सबसे जरूरी मास्क नहीं पहनने वालों को किसी भी हाल में बस में चढ़ने की इजाजत नहीं होगी। इसलिए आम लोगों को भी सचेत होने की जरूरत है क्योंकि लापरवाही लोगों की ओर से बरती गयी तो उसका खामियाजा सभी को भुगतना पड़ेगा।
खड़े होकर सवारी पर रोक होगी
राज्य सरकार की तरफ से बसों में 50 फीसदी यात्रियों की सवारी की ही इजाजत दी गयी है। यानी एक बस में जितनी सीट है उनके ही यात्री चढ़ेंगे। खड़े होकर सवारी करने वालों को कतई चढ़ने नहीं दिया जाएगा। इसमें भी ध्यान रखना होगा कि किसी की तरफ से नियमों की अवहेलना न हो।
कर्मचारियों का वैक्सिनेशन पूरा हुआ
अधिकारी ने बताया कि परिवहन विभाग के समस्त अधिकारियों का वैक्सिनेशन पूरा कर लिया गया है। खासकर बस ड्राइवर और कंडक्टरों को प्राथमिकता स्तर पर वैक्सिनेट किया गया है। कुछ लोग बाकी है उनका वैक्सिनेशन भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा।लोकल ट्रेन नहीं, बसों पर जिलेवालों की टिकी उम्मीद
15 जुलाई तक लोकल ट्रेन और मेट्रों नहीं चलने वाली है इसलिए बसों पर ही लोगों को निर्भर रहना होगा। खासकर के जिलों से कोलकाता आने वाले लोगों के लिए ये बसे ही लाइफलाइन साबित होगी जबकि बस वालों के लिए यह बड़ी चुनौती होगी क्योंकि परिसेवाओं में पाबंदियां है जबकि लोगों की संख्या अपार है।

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