इस बार गंगासागर मेला में ई-रजिस्ट्रेशन नहीं तो एंट्री नहीं

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : राज्य सरकार ने मकर संक्रांति पर गंगासागर आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए ई-रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है। बगैर ई-रजिस्ट्रेशन कराए किसी भी तीर्थयात्री को पुण्य स्नान करने के लिए गंगासागर में प्रवेश करने नहीं दिया जाएगा। कोरोना महामारी के मद्देनजर तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
ऑनलाइन के साथ होगी ऑफलाइन र​जिस्ट्रेशन की भी व्यवस्था
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, ‘gangasagarmela.in’ में लॉग इन करके ई-रजिस्ट्रेशन कराया जा सकेगा। यह वेबसाइट जल्द प्रभावी होगी। जो ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने में असमर्थ हैं, उनके लिए ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था होगी। रजिस्ट्रेशन कराते समय नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी के साथ आधार कार्ड, मतदाता परिचय पत्र अथवा पासपोर्ट की प्रति परिचय पत्र के तौर पर जमा करानी होगी। गंगासागर मेले में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति के बारे में राज्य सरकार के पास सटीक जानकारी हो, इस बाबत यह पहल की जा रही है। ई-रजिस्ट्रेशन होने के बाद तीर्थयात्रियों को क्यूआर कोड लगा रिस्ट बैंड दिया जाएगा। इससे मेले में उनके गुम होने पर आसानी से उन्हें तलाशा जा सकेगा। गौरतलब है कि गंगासागर मेले के दौरान हर साल कई बुजुर्ग खो जाते हैं। राज्य सरकार की तरफ से गंगासागर मेले के लिए एक मोबाइल ऐप भी तैयार किया गया है।
गंगासागर मेला 2022 ऐप करेगा तीर्थयात्रियों को गाइड
‘गंगासागर मेला 2022’ नामक यह एप तीर्थयात्रियों को गाइड करेगा। गंगासागर आने-जाने के लिए कब कहां से बस व लांच मिलेगी, नदी में ज्वार-भाटा का समय क्या है, इत्यादि जानकारियां इस ऐप के जरिए आसानी से मिल जाएंगी। गंगासागर स्थित कपिल मुनि मंदिर में ऑनलाइन पूजा देखने की भी व्यवस्था होगी। गौरतलब है कि मकर संक्रांति पर देश-विदेश से लाखों की तादाद में श्रद्धालु पुण्य स्नान करने गंगासागर आते हैं। ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति पर गंगासागर में पुण्य डुबकी लगाने से मोक्ष की प्रााप्ति होती है। राज्य सरकार इस बार गंगासागर मेला को धार्मिक पर्यटन स्थल के तौर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने के लिए सीधे ई-प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना चाहती है। इसके लिए राज्य के आईटी विभाग को परियोजना तैयार करने की जिम्मेदारी दी गयी है। तीर्थयात्रियों को आसानी से मेला प्रांगण तक पहुंचाने से लेकर पुण्य स्नान व पूजा की व्यवस्था तक के लिए एक पैकेज के बारे में भी राज्य सरकार विचार कर रही है।
ऐसा होगा पैकेज
सूत्रों के अनुसार, पैकेज की सुविधा लेने के लिए श्रद्धालुओं को सरकारी वेबसाइट पर ई-रजिस्ट्रेशन कराकर आना होगा। बाबूघाट में सरकारी कियोस्क समेत भ्रमण के तथ्य व टिकट लेने की व्यवस्था रहेगी। यात्री ये परिसेवा लेना चाहें तो उन्हें निर्दिष्ट गाड़ी या लंच से मेला प्रांगण में ले जाने की व्यवस्था की जाएगी। समुद्र तट में रहने की व्यवस्था भी प्रशासन द्वारा की जाएगी। गाइड के द्वारा तीर्थ भूमि दिखाने की व्यवस्था की जाएगी। स्वेच्छयासेवी संस्थाओं को नियुक्त कर तीर्थयात्रियों को पुण्य स्नान कराना व पूजा की व्यवस्था की जाएगी। केवल मेला दर्शन ही नहीं, शाही स्नान के समय का संगम जल, गंगा की मिट्टी व कपिल मुनी मंदिर का प्रसाद भी सीधे देश-विदेश में मौजूद भक्तों तक पहुंचाने की व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा की जाएगी। हालांकि गंगा जल के बदले श्रद्धालुओं को ऑनलाइन कपिल मुनी मंदिर में पूजा की व्यवस्था भी करायी जा सकती है।

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