डायबिटिज अवेयरनेस वीक: ये योगासन हैं डायबिटीज रोगियों के लिए फायदेमंद

कोलकाता : मधुमेह का जोखिम पिछले एक दशक में वैश्विक स्तर पर काफी तेजी से बढ़ता हुआ देखा गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, डायबिटीज किसी भी उम्र और लिंग वाले व्यक्ति को हो सकती है। दुनियाभर में 20 से 80 वर्ष की आयु के करीब 54 करोड़ लोगों को साल 2021 में मधुमेह के रोग से पीड़ित पाया गया। गंभीर बात है कि मधुमेह का खतरा कम उम्र में लोगों में भी तेजी से बढ़ता जा रहा है। फिलहाल स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ी चिंता का कारण यह रोग है। योगासनों को कई प्रकार के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं में लाभकारी माना जाता है। मधुमेह रोगी ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने के लिए नियमित योगासनों का अभ्यास कर सकते हैं। योगासनों के अभ्यास की आदत कई तरह की स्वास्थ्य जटिलताओं को दूर करने में मददगार है। अगर आप डायबिटीज की समस्या से परेशान हैं तो दिनचर्या में कुछ फायदेमंद योगासनों को जरूर शामिल करें।
पश्चिमोत्तानासन योग


पश्चिमोत्तानासन योग का अभ्यास मधुमेह रोगियों के लिए कारगर माना जाता है। यह योगासन रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रण में रखने में मदद करता है। जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या होती है, उन्हें इसके अभ्यास से संबंधित जटिलताओं के जोखिमों को कम करने में लाभ मिल सकता है। हालांकि पीठ की चोट, अस्थमा या हाल में सर्जरी करा चुके रोगियों को इस आसन के अभ्यास से बचना चाहिए।
पवनमुक्तासन योग का अभ्यास


मधुमेह रोगियों के लिए पवनमुक्तासन योग का अभ्यास भी लाभकारी है। इस अभ्यास से पेट के अंग स्वस्थ और फिट बने रहते हैं। पेट की मांसपेशियों को मजबूती देने के साथ ही पेट की चर्बी को भी कम करने के लिए इस योगासन का अभ्यास किया जा सकता है। हार्मोन्स के स्राव को बेहतर बनाने के लिए नियमित पवनमुक्तासन का अभ्यास करें। इस आसन से पाचन को बढ़ावा मिलता है और कब्ज में राहत मिलती है। हालांकि योगाभ्यास करते समय गर्दन पर ज्यादा दबाव न डालें और शरीर अधिक मत खींचें।
सर्वांगासन योग का अभ्यास


सर्वांगासन का अभ्यास संपूर्ण शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है। मधुमेह से पीड़ित लोगों को सर्वांगासन का अभ्यास करना चाहिए। यह रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है। इस आसन को करते समय सही तकनीक से अभ्यास करने पर नींद की गुणवत्ता को ठीक रखने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि गर्भावस्था, स्लिप डिस्क, स्पोंडिलोसिस, गर्दन में दर्द, मासिक धर्म, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, ग्लूकोमा और थायराइड से पीड़ित लोगों को इस आसन के अभ्यास से बचना चाहिए।

 

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