कश्मीर जैसी हो गई है पूर्वोत्तर की स्थिति-कांग्रेस

नई दिल्ली : नागरिकता संशोधन विधेयक पर असम समेत पूर्वोत्तर राज्यों में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शन के बीच गुरुवार को लोकसभा में हंगामा मच गया। लोकसभा में विपक्षी दलों के सांसदों द्वारा जमकर नोरबाजी की गई। कांग्रेस के सांसदों ने ‘पूरा नॉर्थ-ईस्ट जल रहा है’ के नारे लगाए। वहीं, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्वोत्तर की स्‍थिति कश्मीर की तरह हो गई है। वहां भी सेेना की तैनाती हो गई है। रणनीतिक तौर पर हमारे लिए दोनों ही क्षेत्र महत्वपूर्ण हैं। यहां तक कि बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने भी मोदी सरकार के दावों को खारिज कर दिया है।

लोकसभा में विपक्ष ने दिया स्‍थगन नोटिस

लोकसभा में कांग्रेस के नेता चौधरी, गौरव गोगोई और के सुरेश ने पूर्वोत्तर राज्यों में जारी विरोध प्रदर्शन और कानून व्यवस्था के मौजूदा हालात पर स्‍थगन नोटिस दिया है। वहीं, इस विरोध को लेकर कांग्रेस नेता रिपुन बोरा ने राज्यसभा की कार्यवाई को रद्द करने की मांग उठाई है। दूसरी तरफ, लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (द्वितीय संशोधन) बिल पेश किया गया। साथ ही लोकसभा में मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी बिल और विदेश मंत्री एस जयशंकर एंटी मैरीटाइम पायरेसी बिल पेश करेंगे।

‘विधेयक है ऐतिहासिक भूल का सुधार’

उल्लेखनीय है कि नागरिकता संशोधन विधेयक को बुधवार को राज्यसभा में 125 वोटों से और उससे पहले सोमवार को लोकसभा में 311 वोटों के साथ मंजूरी मिल गई थी। विधेयक पर करीब 8 घंटे तक राज्यसभा में बहस चली जिसमें अमितशाह ने इस विधेयक को ऐतिहासिक भूल के सुधार के लिए लाए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि अपने धर्म और बहू-बेटियों के सम्मान की रक्षा के‌ लिए जिन अल्पसंख्यकों ने भारत में शरण ली है, हमारी सरकार उन्हें नागरिकता प्रदान करेगी।

‘मुस्लिम अल्पसंख्य नहीं हैं’

नागरिकता संशोधन विधेयक के तहत अब 11 वर्ष के बजाय गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यक शरणार्थियों (हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई) को भारत की नागरिकता पाने के लिए देश में कम से कम 6 वर्ष रहना अनिवार्य होगा। वहीं, मुस्लिमों और अन्य देशों के नागरिकों के लिए यह अवधि 11 वर्ष ही रहेगी। शाह के अनुसार पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान इस्लामिक देश हैं। इन देशों में मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं हैं। विधेयक में 31 दिसंबर, 2014 के पहले बिना वैध दस्तावेजों के भारत अाए गैर-मुस्लिमों को या जिनके दस्तावेजों की वैधता समाप्त हो चुकी है उन्हें भारत की नागरिकता दिए जाने का प्रावधान है। लेकिन विदेशी मुस्लिम अगर बिना वैध दस्तावेजों के पाए जाते हैं तो उनके लिए जेल या निर्वासित किए जाने का प्रावधान ही रहेगा।

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