चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग देखने का सुनहरा मौका, 19 जुलाई से ऑनलाइन पंजीकरण

Chandrayaan-2 will be able to see the launch, online registration to see the launch,

नई दिल्ली : इसरो 22 जुलाई को दोपहर 2.43 बजे चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण करने जा रहा है। क्या आप भी इस ऐतिहासिक क्षण के प्रत्यक्ष गवाह बनना चाहते हैं? यदि आपके मन में ऐसी इच्छा है तो यह संभव है। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के लॉन्च व्यू गैलरी से लॉन्चिंग देखने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण 19 जुलाई 2019 को शाम 6 बजे से शुरू होने जा रहा है।

लिंक पर जा कर सम्पर्क करें

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने ट्वीट कर पंजीकरण के लिए लिंक दिया है। इस लिंक पर पंजीकरण करवा कर आप चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग को देखने का सपना साकार कर सकते हैं। इसके लिए https://www.shar.gov.in/VSCREGISTRATION/index.jsp लिंक पर जाकर पंजीकरण कर सकते हैं।

56 मिनट पहले ट्वीट कर दी थी गड़बड़ी की जानकारी

मालूम हो कि इसरो के एसोसिएट डायरेक्टर (पब्लिक रिलेशन) बीआर गुरुप्रसाद ने बताया था कि लॉन्चिंग से ठीक पहले लॉन्चिंग व्हीकल सिस्टम में खराबी आ गई थी जिसके कारण 16 जुलाई के तड़के इस मिशन को टाल दिया गया था। लॉन्चिंग मिशन की शुरुआत से लगभग 56 मिनट पहले इसरो ने ट्वीट कर तकनीकी गड़बड़ी की बात बताई। मालूम हो कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग देखने पहुंचे थे।

थीम पार्क बनाया गया है

इसरो की वेबसाइट पर इस बात की जानकारी मिली है कि भारत के सतीश धवन स्पेस सेंटर से होने वाले प्रक्षेपण को देखने के लिए एक थीम पार्क बनाया गया है। इस पार्क में रॉकेट गार्डन, लॉन्च व्यू गैलरी और स्पेस म्यूजियम भी है। 31 मार्च 2019 को 5,000 क्षमता वाली लॉन्च व्यू गैलरी का उद्घाटन किया गया था। यह एक स्टेडियम के रूप में बनाया गया है। यहां पर आने वाले दर्शक इस गैलरी से प्रत्यक्ष रूप से लॉन्चिंग की सारी प्रक्रिया को वास्तविक समय में नंगी आंखों से देख सकेंगे। लांचर और उपग्रहों को समझाने के लिए बड़ी स्क्रीन भी लगाई गई है। गौरतलब है कि इसरो द्वारा प्री और पोस्ट लॉन्च गतिविधियों को टेलीकास्ट करने की भी तैयारियां की जा रही हैं।

3,877 किलोग्राम वजनी अंतरिक्ष यान

गौरतलब है कि ‘बाहुबली’ कहे जाने वाले चंद्रयान-2 को भारत के सबसे ताकतवर जीएसएलवी मार्क-III रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा। यह 3,877 किलोग्राम वजनी अंतरिक्ष यान अपने साथ एक ऑर्बिटर, एक लैंडर (विक्रम) और एक रोवर (प्रज्ञान) लेकर जाएगा। चंद्रयान-2 को चंद्रमा पर उतरने में 54 दिन लगेंगे। इसरो के अनुसार यह यान चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में उतरेगा, जहां वह चंद्रमा के अनछुए पहलुओं को जानने का प्रयास करेगा। इससे 11 साल पहले इसरो ने पहले चंद्र मिशन के तहत सफलता पूर्वक चंद्रयान-1 का प्रक्षेपण किया था जिसने चंद्रमा के 3,400 से अधिक चक्कर लगाए और 29 अगस्त 2009 तक 312 दिनों तक काम करता रहा। यह चंद्रयान-1 मिशन (1380 किलो) से लगभग तीन गुना ज्यादा वजनी है। इसके साथ ही भारत चांद के दक्षिणी ध्रुव पर यान उतारने वाला पहला देश बन जाएगा।

ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर क्या काम करेंगे?

चांद की कक्षा में चंद्रयान-2 के पहुंचने के बाद ऑर्बिटर एक साल तक काम करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य पृथ्वी और लैंडर के बीच संचार स्‍थापित करना है। साथ ही ऑर्बिटर चांद की सतह का नक्शा तैयार करेगा जिससे कि चांद के अस्तित्व और विकास का पता लगाया जा सकेगा। लैंडर का कार्य होगा चांद की सतह पर भूकंप आते हैं या नहीं इसकी जांच करना। वहीं रोवर की मदद से चांद की सतह पर खनिज तत्वों की मौजूदगी का पता लगाया जाएगा।

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