एंबुलेंस के इंतजार में पड़ा रहा महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का पार्थिव शरीर

Vashistha Narayan Singh

पटना : महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का निधन गुरुवार को पटना के पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) में हुआ। अपनी मेधा से भारत को गौरवान्वित करने वाले महान गणितज्ञ सिंह का पार्थिव शरीर सरकारी उपेक्षा का शिकार बना और काफी देर तक उनके शव को लेकर एंबुलेंस का इंतजार किया जाता रहा। अलबर्ट आइंस्टीन के सिद्धांत को चुनौती देने वाले वशिष्ठ सिंह की योग्यता का डंका देश-दुनिया में बजा, लेकिन उनके पार्थिव शरीर को 5 घंटे तक स्ट्रेचर पर ही रखा गया।

5 घंटे तक स्ट्रेचर पर पड़ा रहा महान गणितज्ञ का पार्थिव शरीर

राज्य के भोजपुर जिले के बसंतपुर गांव के निवासी 74 वर्षीय वशिष्ठ सिंह का लंबी बीमारी के बाद गुरुवार को पीएमसीएच में निधन हो गया। वशिष्ठ सिंह के भाई अयोध्या प्रसाद सिंह ने आरोप लगाया कि उनके भाई के पार्थिव शरीर को पटना स्थित उनके आवास ले जाने के लिए पीएमसीएच प्रशासन ने समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं करवाई, जिसके कारण शव को काफी देर तक स्ट्रेचर पर रखना पड़ा।

सूचना मिलते ही एंबुलेंस उपलब्ध करवाई गई : पीएमसीएच अधीक्षक

वहीं इस आरोप के बारे में पीएमसीएच के अधीक्षक राजीव रंजन प्रसाद ने दावा किया कि उन्हें जैसे ही सूचना मिली, तुरंत एंबुलेंस उपलब्ध करवाई गई। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सिंह के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि सिंह ने पूरे विश्व में भारत एवं बिहार का नाम रौशन किया। उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताते हुए कुमार ने सिंह के परिजनों के प्रति संवेदना जताई और कहा कि सिंह का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जा रहा है। कुमार ने पटना के कुल्हड़िय कॉम्पलेक्स पहुंचकर सिंह की पार्थिव देह पर पुष्पचक्र अर्पित किए और उन्हें श्रद्धांजलि दी।

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से की थी पीएचडी

भोजपुर जिले के वसंतपुर गांव से शुरू हुआ सफर नासा तक पहुंचा। बर्कले के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से वर्ष 1969 में गणित में पीएचडी तथा ‘साइकिल वेक्टर स्पेस थ्योरी’ पर शोध करने वाले सिंह लंबे समय से शिजोफ्रेनिया रोग (भूलने की बीमारी) से पीड़ित थे और पीएमसीएच में उनका इलाज चल रहा था। वाशिंगटन में गणित के प्रोफेसर रहे सिंह वर्ष 1972 में भारत लौट आये थे। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर और भारतीय सांख्यकीय संस्थान, कलकत्ता में अध्यापन का कार्य किया। वे बिहार के मधेपुरा जिला स्थित भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के विजिटिंग प्रोफेसर भी रहे थे।

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