सुप्रीम कोर्ट ने एनआरसी को-ऑर्डिनेटर प्रतीक हजेला का असम से किया ट्रांसफर

Prateek Hejal

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने असम में नेशनल रजिस्‍टर ऑफ सिटिजंस (एनआरसी) लिस्ट को अपडेट करने का काम देख रहे आईएएस अधिकारी प्रतीक हजेला का तुरंत प्रभाव से मध्यप्रदेश में प्रतिनियुक्ति पर भेजने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने हालांकि इसके पीछे की वजह नहीं बताई है, लेकिन मीडिया रिपोर्टों की मानें तो सुरक्षा के मद्देनजर ये कदम उठाया गया है। प्रतिनियुक्ति का आदेश जारी करने के लिए केंद्र सरकार को सात दिन में इसकी अधिसूचना जारी करने को कहा गया है।

कारण बताने से किया इनकार

कोर्ट के इस आदेश पर सरकार के वकील अटॉर्नी जरलन केके वेणुगोपाल ने जब कोर्ट से पूछा कि क्या इस प्रतिनियुक्ति की कोई वजह है तो मुख्‍य न्‍यायाधीश रंजन गोगोई ने सख्त लहजे में जवाब देते हुए कहा कि हां, इसकी वजह है। हालांकि, उन्‍होंने इसका कारण बताने से इनकार कर दिया। दरअसल, हजेला ने सुप्रीम कोर्ट को एक गोपनीय रिपोर्ट सौंपी थी, जिसके बाद यह फैसला लिया गया।

अंतिम सूची ऑनलाइन जारी कर दी गई थी

गौरतलब है कि कुछ समय पहले ही असम में बहुप्रतीक्षित राष्ट्रीय नागरिक पंजी की अंतिम सूची ऑनलाइन जारी कर दी गई थी। एनआरसी के राज्य समन्वयक कार्यालय ने कहा था कि 3,30,27,661 लोगों ने एनआरसी में शामिल होने के लिए आवेदन दिया था। इनमे से 3,11,21,004 लोगों को शामिल किया गया है और 19,06,657 लोगों को बाहर कर दिया गया है।शामिल किए गए और बाहर किए गए नामों को लोग एनआरसी की वेबसाइट पर देख सकते हैं। शामिल किए गए लोगों की पूरक सूची एनआरसी सेवा केंद्रों (एनएसके), उपायुक्त के कार्यालयों और क्षेत्राधिकारियों के कार्यालयों में उपलब्ध है, जिसे लोग कामकाज के घंटों के दौरान देख सकते हैं।

कुछ गड़बड़ियां मिली थीं

बता दें कि हजेला 1995 बैच के असम और मेघालय काडर के आईएएस अधिकारी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने असम में एनआरसी की डेडलाइन को 31 जुलाई से बढ़ाकर 31 अगस्त किया था। गौरतलब है कि एनआरसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले भी कड़ा रुख अपनाता रहा है। कुछ महीने पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने असम के एनआरसी संयोजक प्रतीक हजेला से विवरण मांग थी। हजेला ने कहा था कि हमें कुछ गड़बड़ियां मिली थीं।

जानबूझकर नाम सूची से बाहर करने का आरोप

31 अगस्‍त को जारी एनआरसी की अंतिम सूची में कथित विसंगतियों के कारण पिछले महीने दो बार हजेला पर मामले भी दर्ज कराए गए। कुछ संगठनों ने आरोप लगाया कि लोगों ने एनआरसी में अपना नाम दर्ज कराने के लिए सही दस्‍तावेज दिए थे। बावजूद इसके एनआरसी समन्‍वयक हजेला ने गोरिया, मोरिया और कई अन्‍य नाम वाले लोगों को जानबूझकर अंतिम सूची से बाहर कर दिया। उन्‍होंने आरोप लगाया कि प्रतीक हजेला ने जानबूझकर असम के मूल निवासियों के साथ ज्‍यादती की है।

शेयर करें

मुख्य समाचार

diabetes-day-image

ऐसी जीवनशैली अपनाएंगे तो नहीं होगी डायबिटीज

मधुमेह के लक्षण, इलाज और घरेलू उपचार हमारी बिगड़ती जीवनशैली के कारण हमारा शरीर कई बीमारियों का घर बन गया है। इन्हीं बीमारियों में से एक आगे पढ़ें »

डेहरी ऑन सोन : बोलेरो और गैस टैंकर की टक्कर में दो की मौत, पांच गंभीर

डेहरी ऑन सोन : बिहार में रोहतास जिले के डेहरी के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी संजय कुमार ने बुधवार को यहां बताया कि स्थानीय सूअरा मोड़ आगे पढ़ें »

ऊपर