सुप्रीम कोर्ट ने सेना में महिलाओं के स्थायी कमीशन को मंजूरी दी

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नई दिल्ली : सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले पर शीर्ष न्यायालय ने भी मुहर लगा दी है। न्यायालय ने कहा कि केंद्र सेना में कंबैट क्षेत्रों को छोड़कर सभी इलाकों में महिलाओं को स्थाई कमान देने के लिए बाध्य है। बता दें कि केंद्र सरकार ने मार्च 2010 में दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उच्च न्यायालय ने सेना को अपनी सभी महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने का आदेश दिया था। केंद्र का कहना था कि भारतीय सेना में यूनिट पूरी तरह पुरुषों की है और पुरुष सैनिक महिला अधिकारियों को स्वीकार नहीं कर पाएंगे। यह भी मालूम हो कि अभी केवल 14 साल तक शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) में सेवा दे चुके पुरुष सैनिकों को ही स्थायी कमीशन का विकल्प दिया जाता है।

महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देना चाहिए

जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ​​दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले के बाद केंद्र को महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देना चाहिए था। महिलाओं को स्थायी कमीशन न देना केंद्र का पूर्वाग्रह ही दिखाता है। न्यायालय ने यह भी कहा है कि 14 साल से ऊपर सेवा दे चुकी महिलाओं को इसका लाभ मिलेगा और सैनिकों के पास शारीरिक क्षमता होनी चाहिए।

सरकार की ओर से मानसिकता में बदलाव जरूरी

शीर्ष न्यायालय ने कहा कि स्थायी कमीशन सेना में सभी महिला अधिकारियों की सेवा में लागू करेगा, चाहे उनकी सेवा कितने ही वर्ष की हो गई हो। जस्टिस चंद्रचूड़ ने केंद्र की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि 3 महीने में अदालत के इस फैसले का अनुपालन होना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि सेना में महिला अधिकारियों को कमान पोस्ट देने पर पूरी तरह रोक अतार्किक और समानता के अधिकार के खिलाफ है। सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन दिया जाए, क्योंकि सशस्त्र बलों में लिंग आधारित भेदभाव खत्म करने के लिए सरकार की ओर से मानसिकता में बदलाव जरूरी है।

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