धूप विटामिन डी का श्रेष्ठ एवं प्राकृतिक स्रोत



समय के साथ धूप तेज व कम हो जाती है। गर्मी की धूप तेज होती है। वर्षाकाल में धूप कम निकलती है, फिर भी तेज होती है। ठंड की धूप प्यारी होती है। ठंड के समय सूर्योदय से लेकर प्रारंभिक तीन घंटे की धूप बहुत उपयुक्त होती है। इससे बहुत लाभ मिलता है। धूप तेज, हल्की या कोमल हो, कभी भी 15-20 मिनट से ज्यादा धूप में नहीं रहना चाहिए। धूप में इतने समय रहने से पर्याप्त लाभ मिल जाता है। यह विटामिन डी का श्रेष्ठ एवं प्राकृतिक स्रोत है। इससे हड्डियां एवं मासपेशियां मजबूत होती हैं। इससे बीपी नियंत्रित होता है एवं पाचन सुधरता है। जोड़ों का दर्द दूर होता है। धूप में बैठने से शुगर लेवल भी नियंत्रित होता है। स्त्री-पुरुष दोनों की प्रजनन क्षमता में वृद्धि होती है। पुरुष के शुक्राणुओं की संख्या बढ़ती है जबकि स्त्री की गर्भधारण क्षमता बढ़ जाती है। सूर्य धूप से लाभ पाने की चाह रखने वाले धूप में आंखें बंद रखें। शरीर के प्रत्येक अंग पर धूप का सेंक पड़े, इसका प्रयास करें।
दूध पीने से तेज होता है दिमाग

नवजात शिशु के लिये मां का दूध सर्वश्रेष्ठ होता है। मां के बाद बढ़ते बच्चे के लिये गाय का दूध उपयुक्त होता है। गाय का दूध सभी मरीजों के लिये उपयुक्त होता है। इसका उपयोग कोलेस्ट्रॉल पीड़ित या हृदय रोगी भी कर सकते हैं। वैसे सभी के दूध की अपनी-अपनी विशेषता है। पढ़ते एवं बढ़ते बच्चे के लिये दूध बहुत काम का होता है। यह पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण खानपान के पोषक तत्वों की कमी को दूर करता है। नये वैज्ञानिक शोध के मुताबिक दूध पीने से दिमागी ताकत बढ़ जाती है। इससे किसी भी उम्र के व्यक्ति का मानसिक कौशल बेहतर हो जाता है। दैनिक एक गिलास दूध पीने से दिमागी ताकत और प्रदर्शन और भी अच्छा हो जाता है। इसमें मौजूद मैग्नीशियम से स्मरण शक्ति अच्छी होती है। इससे दिल की बीमारियों एवं बीपी से राहत मिलती है।
डायरिया से आंखें हो रही हैं खराब

दस्त एवं कुपोषण का प्रभाव अब शरीर के अन्य अंगों पर भी पड़ने लगा है। इससे शरीर में विटामिन ए की कमी होती जा रही है जिसके चलते आंखें कमजोर हो रही हैं एव मरीज अंधेपन का शिकार हो रहा है। इसके शिकार गरीब बच्चे अधिक हो रहे हैं। आंखों को बचाने के लिये दस्त व डायरिया पीड़ित बच्चे को सात-आठ बार दस्त के बाद विटामिन ए जरूर देना चाहिए ताकि इसकी कमी से उसकी आंखों की काॅर्निया को नुकसान न पहुंचे। विटामिन ए की कमी से कार्निया कमजोर एवं संक्रमित हो जाती है, अतः दस्त पीड़ित बच्चे को सात-आठ बार दस्त हो जाने के बाद चौबीस घंटे के भीतर विटामिन ए का इंजेक्शन देना चाहिए। 48 घंटे के बाद दूसरा एवं दो हफ्ते के बाद विटामिन ए का इंजेक्शन लगाना चाहिए, तब कहीं जाकर बच्चे के शरीर में विटामिन ए की कमी पूरी हो पाती है और दस्त पीड़ित बच्चे की आंखें सुरक्षित रह पाती हैं।
शेयर करें

मुख्य समाचार

टीएमसी नेता कुणाल घोष ने ईडी को भेजा नोटिस, आज होगी पेशी

कोलकाताः पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर टीएमसी नेताओं पर केंद्रीय एजेंसियों ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। अब टीएमसी नेता कुणाल घोष को आगे पढ़ें »

anupam kher

‘Sooryavansham’ पर चैनल ने पूछा सवाल, अनुपम खेर ने दिया ऐसा जवाब: पढ़कर लोटपोट हो जाएंगे आप

मुंबई: बॉलीवुड की कुछ चुनिंदा फिल्में ऐसी हैं जो टीवी चैनलों पर कई बार दिखाई जाती हैं। इन फिल्मों के कई बार प्रसारण होने के आगे पढ़ें »

ऊपर