सुंदरता के लिए किजिए सनबाथ

प्राय: यह देखा जाता है कि आजकल की आधुनिक महिलाएं व युवतियां अपने आप को अधिक से अधिक सुन्दर बनाने के लिए क्रीम, पाउडर, लिपस्टिक आदि प्रसाधनों की सहायता लेती हैं क्योंकि वे अधिक से अधिक सुन्दर दिखना चाहती हैं।
आजकल बढ़ते जा रहे तनावों के कारण प्राय: महिलाओं की प्राकृतिक सुन्दरता का हृास होता जा रहा है जिसे छिपाने का अथक प्रयास कृत्रिम सौन्दर्य प्रसाधनों द्वारा किया जाता है। यह कृत्रिम शृंगार जब उतर जाता है तो चेहरा पहले की अपेक्षा और अधिक खराब दिखाई देने लगता है।
अगर सौन्दर्य प्रसाधनों के बजाय प्राकृतिक उपायों की सहायता ली जाए तो आप में एक नई स्फूर्ति आएगी। आप अपने रहन-सहन, खान-पान आदि को संयत रखें तथा थोड़ा-बहुत शारीरिक श्रम भी करें जिससे स्वास्थ्य सुधरेगा और शरीर को आवश्यक पोषक तत्व भी प्राप्त होंगे।
प्रतिदिन सूर्योदय से पूर्व करीब पन्द्रह-बीस मिनट तक खुली हवा में गहरे सांस लें तथा इसके बाद लगभग पन्द्रह मिनट तक शरीर के ऊपर सूर्य की किरणें पड़ने दें। इससे सुन्दरता एवं स्वास्थ्य दोनों में ही वृद्धि होगी।
प्राय: देखा जाता है कि अधिकतर महिलाएं अपना चेहरा धोने के बाद किसी भी तौलिए से पोंछ लेती हैं। इस तरह से कभी मत पोंछिए, बल्कि अपने दोनों हाथों को थपथपाकर पानी सुखा लें। ऐसा करने से पानी का कुछ अंश त्वचा के रोम छिद्रों द्वारा शरीर में दाखिल हो जाता है, और इसके प्रभाव से त्वचा में ताजग़ी व सुन्दरता बनी रहती है।
ठंडा पानी ढीली त्वचा को कसकर रखने और रक्त संचार को ठीक करने के लिए एक बेमिसाल चीज है। इसकी सहायता से नाड़ी और पुट्ठों की गहराई तक रक्त सुगमता से पहुंचता रहता है और इसके फलस्वरूप चेहरे की त्वचा पर एक ताजग़ी और निखार तो आता ही है, साथ ही सारे शरीर की त्वचा में चमक भी आ जाती है।
प्रतिदिन प्रात: काल उठकर शौच आदि से निवृत्त होकर सूर्योदय से पूर्व ही मकान की छत पर जाकर खुली हवा में लगभग पैंतालीस मिनट तक गहरी सांस लें। इससे यह लाभ होगा कि शरीर के अंदर की दूषित वायु जो आपके चेहरे को मलिन व कांतिहीन बनाती है, बाहर निकल आएगी और शुद्ध वायु जिसमें रक्त को शुद्ध करने वाली आॅक्सीजन मिली होती है, शरीर के अन्दर जाती है। इस प्रकार फेफड़ों का व्यायाम हो जाता है और चेहरे पर लालिमा और शरीर में एक नए उत्साह का संचार होता है।
गहरे सांस लेने के बाद उगते हुए सूरज की किरणों को अपने शरीर पर अधिक से अधिक पडऩे दें। इस प्रकार इन किरणों के माध्यम से शरीर की त्वचा को विटामिन ‘ए’ तथा ‘डी’ अपने प्राकृतिक रूप में और बिना खर्च किए ही प्राप्त हो जाते हैं और इससे शरीर पुष्ट, सुडौल व आकर्षक बन जाता है।

 

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