शिव-पार्वती के मिलन का प्रतीक है यह दिन, प्रेम विवाह के लिए आप भी कर सकते हैं उपाय

कोलकाताः प्रत्येक वर्ष फाल्गुन मास की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस बार महाशिवरात्रि का व्रत 11 मार्च 2021 दिन गुरूवार को मनाया जाएगा। पौराणिक ग्रंथों में मिलने वाली कथाओं के अनुसार इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव का विवाह हुआ था, इसलिए यह दिन शिव भक्तों के लिए बेहद खास होता है। मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से वैवाहिक जीवन की सभी समस्याएं दूर होती हैं, इसके साथ ही जिन लोगों के विवाह में देरी हो रही हो या फिर जो लोग अपने सच्चे प्रेम की प्राप्ति करना चाहते हैं तो महाशिवरात्रि का पर्व उनके लिए बहुत ही शुभ दिन है। यदि आप शीघ्र विवाह या फिर प्रेम विवाह की कामना रखते हैं तो इस दिन सच्चे समर्पण के भाव से कुछ उपायों को करने से आपकी मनोकामना पूर्ण हो सकती हैं। तो चलिए जानते हैं उपाय।
जो लोग अपने प्रेम को रिश्ते में बदलना चाहते हैं यानि विवाह करना चाहते हैं या फिर किसी के विवाह में बाधाएं आ रही हो तो महाशिवरात्रि के दिन किसी ऐसे मंदिर में जाएं जहां पर शिव-पार्वती की प्रतिमाएं एक दूसरे के पास बनी हुई हो। इसके बाद लाल रंग की मौली लेकर भगवान शिव और माता पार्वती की परिक्रमा करते हुए सात बार मौली से दोनों के बांध दें। यदि परिक्रमा करने के लिए उपयुक्त स्थान न हो तो एक ही स्थान पर खड़े होकर भी मौली बांध सकते हैं। तत्पश्चात दोनों की संयुक्त रूप से पूजा अर्चना करें। भगवान शिव और माता पार्वती से मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें।
मनचाहे जीवन साथी के लिए
महाशिवरात्रि के दिन लाल रंग के वस्त्र पहनकर किसी शिव मंदिर में जाएं। भगवान शिव, माता पार्वती की संयुक्त रूप से पूजा करें। इसके बाद माता पार्वती को सुहाग की वस्तुएं लाल चूड़ियां, लाल चुनरी, मेहंदी, बिंदी, सिंदूर, कुमकुम आदि चीजें अर्पित करें। इसके बाद माता पार्वती से प्रार्थना करें। इसके बाद रामचरितमानस में वर्णित शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग अवश्य पढ़ें। विवाह में आने वाली बाधाओं को दूर करने और मनाचाहे जीवन साथी की प्राप्ति के लिए यह पाठ बहुत ही शुभफलदायक माना गया है।
यदि आप किसी से बहुत प्रेम करते हैं और उसे जीवनसाथी के रूप में पाना चाहते हैं तो महाशिवरात्रि के दिन माता पार्वती के समक्ष रामचरित मानस की इस चौपाई का पाठ करें। इस उपाय को अचूक माना जाता है।
‘तौ भगवानु सकल उर बासी। करिहि मोहि रघुबर कै दासी।।
जेहि कें जेहि पर सत्य सनेहू। सो तेहि मिलइ न कछु संदेहू।।’
रामचरित मानस में यह प्रसंग बालकांड का है। जिसके अनुसार प्रभु श्री राम को देखकर सीता जी उनसे विवाह करने की कामना के लिए देवी पार्वती के मंदिर जाकर, इस चौपाई को पढ़ते हुए मां पार्वती से भगवान राम को वर के रूप में प्राप्त करने की कामना की थी।

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