एक ही दिन है तीसरी और चौथी नवरात्रि, पढ़ें माता चंद्रघंटा और कूष्मांडा व्रत कथा

कोलकाताः नवरात्रि के नौ दिन हिंदू समाज में काफी शुभ माना जाता है। इस बार तीसरी और चौथी नवरात्रि एक ही दिन मनाई जा रही है। इसलिए इस बार नवरात्रि 9 की बजाए 8 ही दिनों की है।

तृतीया और चतुर्थ नवरात्रि एक ही दिन यानी 9 अक्टूबर को है। 9 अक्टूबर को सुबह 7 बजकर 38 मिनट तक तृतीया तिथि है उसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी। इस दिन मां चंद्रघंटा और मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है। यहां पढ़ें इन दोनों मां की व्रत कथा।
मां चंद्रघंटा की व्रत कथा
बहुत समय पहले जब असुरों का आतंक बढ़ गया था तब उन्हें सबक सिखाने के लिए मां दुर्गा ने अपने तीसरे स्वरूप में अवतार लिया था। दैत्यों का राजा महिषासुर राजा इंद्र का सिंहासन हड़पना चाहता था जिसके लिए दैत्यों की सेना और देवताओं के बीच में युद्ध छिड़ गई थी। वह स्वर्ग लोक पर अपना राज कायम करना चाहता था जिसके वजह से सभी देवता परेशान थे। सभी देवता अपनी परेशानी लेकर त्रिदेवों के पास गए।
मां कुष्मांडा की व्रत कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, मां कूष्मांडा से तात्पर्य है कुम्हड़ा। कहा जाता है कि मां कूष्मांडा ने संसार को दैत्यों के अत्याचार से मुक्त करने के लिए ही अवतार लिया था। इनका वाहन सिंह है। हिंदू संस्कृति में कुम्हड़े को कुष्मांड कहते हैं इसलिए इस देवी को कुष्मांडा। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था देवी ने ही ब्रह्मांड की रचना की थी। इन्हें आदि स्वरूपा और आदिशक्ति भी कहा जाता है। मान्यता है कि इनका निवास सूर्यमंडल के भीतर के लोक में स्थित है। इस दिन मां कूष्मांडा की उपासना से आयु, यश, बल, और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है।

 

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