सुन्नी वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ जमीन दिए जाने पर शंकराचार्य स्वामी ने जताया रोष

Shankaracharya

जबलपुर : शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने शनिवार को अयोध्या भूमि विवाद पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि न्यायालय के फैसले से इस बात की पुष्टि हो गयी है कि अयोध्या की इसी भूमि पर भगवान श्री राम का जन्म हुआ था।

ज्योतिष और द्वारका-शारदा पीठ के शंकराचार्य सरस्वती ने कहा, ‘‘मैं उच्चतम न्यायालय के फैसले से बहुत खुश हूँ। ‌इस फैसले से यह बात साबित हो गयी है कि यही (विवादित स्थल) भगवान राम की जन्मभूमि है। इसमें कोई संदेह नहीं रह गया है कि श्रीराम का जन्म अयोध्या में ही हुआ था।’’

ट्रस्ट पहले से है स्थापित

हालांकि उच्चतम न्यायालय के फैसले के तहत सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ की वैकल्पि जमीन दिए जाने पर हिन्दू संत ने रोष जताया है। उनका कहना है कि अयोध्या में बहुत सारे मंदिर हैं।

उच्चतम न्यायालय द्वारा मंदिर निर्माण के लिए केन्द्र सरकार को ट्रस्ट बनाने का आदेश दिया गया है। इस पर जब शंकराचार्य सरस्वती की राय पूछी गयी तो उन्होंने कहा कि, ‘‘एक न्यास पहले से है जिसे पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंहराव के जमाने में स्थापित किया गया था।’’ सरस्वती ने कहा कि प्रस्तावित राम मंदिर परिसर का आकार कंबोडिया के अंकोर वाट जैसा विस्तृत होना चाहिए।

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