शनि अमावस्या की पूजा का जानें समय, साढ़ेसाती और ढैय्या से मिलेगी राहत

कोलकाता : शनि देव की पूजा के लिए 10 जुलाई 2021 शनिवार का दिन बहुत ही उत्तम है। इस दिन आषाढ़ मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है। इस अमावस्या की तिथि को शनि अमावस्या या शनिश्चरी अमावस्या भी कहा जाता है। शनि की साढ़ेसाती और शनि की ढैय्या जिन लोगों पर बनी हुई है, उनके लिए शनि अमावस्या की तिथि बहुत ही महत्वपूर्ण है। वर्तमान समय में मिथुन राशि, तुला राशि, धनु राशि, मकर राशि और कुंभ राशि पर शनि की विशेष दृष्टि है। मिथुन और तुला राशि पर शनि की ढैय्या और धनु,मकर और कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है।
शनि देव का फल
ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को नवग्रहों में न्याय करने वाला देवता माना गया है। इसके साथ ही शनि को मेहनत यानि परिश्रक का कारक भी माना गया है। शनि एक राशि में लगभग ढाई वर्ष तक रहते हैं, शनि की चाल बहुत ही धीमी बताई गई है। यही कारण है कि शनि देव एक राशि से दूसरी राशि में जाने पर लगभग ढाई साल का समय लेते हैं। शनि व्यक्ति को कर्मों के आधार पर फल प्रदान करते हैं। इसलिए जिन लोगों पर साढ़ेसाती, ढैय्या या फिर शनि की महादशा, अंर्तदशा चल रही है उन्हें गलत कार्य और आदतों से दूर रहना चाहिए।
शनि अमावस्या शुभ मुहूर्त
10 जुलाई को शनिवार के दिन अमावस्या की तिथि प्रात: 06 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगी। शनि देव की पूजा अमावस्या की तिथि के समापन से पूर्व करना उत्तम है। इस दिन शनि चालीसा और शनि मंत्र के साथ शनि आरती का पाठ करें। ऐसा करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं। पूजा के बाद शनि से जुड़ी चीजों का दान अवश्य करें।

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