शनिदेव को बेहद पसंद है यह फूल, इस तरह करें इसका इस्तेमाल

कोलकाता : शनिदेव को न्याय के देवता कहा जाता है। शनिवार का दिन शनिदेव को अर्पित होता है। ऐसे में शनिदेव बुरों के साथ बहुत बुरे और अच्छों के साथ बहुत अच्छे हैं। शनि की कठोर दृष्टि एक बार किसी पर पड़ जाती है तो उसे शनि की ढैय्या या साढ़े साती कहा जाता है। हर व्यक्ति के जीवन काल में एक ना एक बार शनि की दशा जरूर आती है। शनि किसी एक राशि में करीब ढाई वर्षो तक रहते हैं। इस प्रकार से शनि किसी एक राशि में रहने के बाद दोबारा 30 वर्षो के बाद लौटकर आते हैं। ऐसे में जिन जातकों पर शनि की बुरी दशा आती है उन्हें इससे घबराने की जरूरत नहीं। आप कुछ खास उपायों से शनिदेव को प्रसन्न कर सकते हैं…
आपको बता दें कि शनिदेव को आक के फूल काफी पसंद होते हैं। शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए सरसों के तेल साथ आक के फूल भी अर्पित कर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए। शनिवार के दिन साबुत दाल और तिल का दान करने से शनि दोष से छुटकारा मिलता है। इसे मदार का फूल भी कहा जाता है। शनिवार को आक के फूल चढ़ाने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं। इस फूल से भगवान शिव भी प्रसन्न होते हैं। इसके साथ ही हनुमान जी शनिदेव के प्रिय कहलाए जाते हैं ऐसे में शनिवार के दिन हनुमान जी की पूजा करने से भी शनिदेव प्रसन्न होते हैं। लोग नियमित रूप से भगवान शिव और हनुमान जी की पूजा करते हैं वह शनि की बुरी दृष्टि से बचे रहते हैं।

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