कोविड का दूसरा कहर और आयुर्वेद

कोविड संक्रमण महामारी का द्वितीय वर्ष कहूं अथवा द्वितीय लहर, बहुत कुछ अपने आप में कहानी समेटे हुए परिभाषित हो रही है। प्रथम वर्ष में इस महामारी की यात्रा शून्य से आरम्भ हुई, बहुत कुछ कहा गया, सुना गया, सीखा भी गया, देखा भी गया। कुछ लोग इसकी लहर में आकर संसार से अकाल विदा भी हो गये।
विगत वर्ष को यदि कोरोना काल कहा जाये तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। बहुत से सर्च, रिसर्च, व्यवस्था-अव्यवस्था, तर्क-कुतर्क, सफलता-असफलता, अच्छाई-बुराई, सत्य-असत्य के बीच पूरा विश्व तथा मानव जाति की जीवन शैली उलझ कर रह गयी। विश्व की सारी विकसित व्यवस्था चरमरा कर धराशायी हो गयी। ऐसा लग रहा है जैसे हमारा अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया हो, जबकि 80% कोविड वायरस प्रभावित लोग होम क्वारंटीन अर्थात् एकांतवास के जरिये ठीक होते रहे हैं।
इस द्वितीय वर्ष में कोविड संक्रमण हमारे देश में बहुत ही तेजी के साथ बढ़ रहा है। इसके ऊपर बहुत कुछ टिप्पणियां की जा सकती हैं लेकिन उससे कोई समाधान नहीं प्राप्त होगा। हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि किस तरह से इसके संक्रमण से बचाव किया जा सके। और मेरा मानना है कि अपना बचाव या सुरक्षा दूसरों के ऊपर दोषारोपण से कभी भी नहीं हो सकता। कहीं न कहीं हमें अपनी जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी। हालात गंभीर ही नहीं, बेहद गंभीर हैं। अपने अपने अनुभवों के आधार पर अपनी सुरक्षा-व्यवस्था को स्वयं तय करें और अपनायें भी। प्रत्येक भारतीय चिकित्सा की सूझ- बूझ कुछ न कुछ जरूर रखता है, जिसका सारा श्रेय आयुर्वेद को जाता है। हमारे खून में आयुर्वेद है। प्राचीन काल से आयुर्वेद परम्पराओं के माध्यम से हमें बहुत कुछ ज्ञान देता रहा है। आयुर्वेद का इस धरती पर अवतरण ही दीर्घायु प्राप्ति के लिए ही किया गया था। प्राचीन काल में भी विश्व को अनेक महामारियों से जूझना पड़ा था। इस प्रकार की व्याधियों को आयुर्वेद में ‘जनपदोध्वंसीय रोगों’ के नाम से वर्णित किया गया है। आप कल्पना करिये हजारों वर्ष पूर्व हम कितने साधन विहीन रहे होंगे फिर भी आयुर्वेद के प्रयोगों को अपना कर हमारे पूर्वजों ने अपनी रक्षा की थी। यहां एक बात हमें समझने की जरूरत है कि प्रथम लहर से द्वितीय लहर का वेग अवश्य ही तेज होगा। इसको दूसरी लहर से इस तरह से हम समझ सकते हैं कि जब दूसरी बार कोई सेना आक्रमण करने जाती है तो पूरी तैयारी के साथ। अब जीत-हार उस पर निर्भर करेगा कि सामने वाले ने कैसी तैयारी कर रखी है। आशा है आप समझ गये होंगे कि आज हम उसी मंजिल पर खड़े हैं। अपने बचाव के अपने-अपने ढंग से बहुत तरीके हैं । हम तो बहुत बड़ी-बड़ी, लम्बी-लम्बी बातें करते हैं, क्या ऐसे वायरस से हम अपनी सुरक्षा नहीं कर सकते जो इतना छोटा (माइक्रो) है कि दिखाई तक नहीं देता है ? आइये, हम सब तैयार हो जाएं, इससे बचाव के लिए, जरूर हमें सफलता मिलेगी।
दूरी रखना, मास्क का प्रयोग, यात्राओं से बचना, अनावश्यक भ्रमण न करना आदि कार्य जितना हमने देखा, सुना, पाया, समझा, सबका यथो​चित पालन अवश्य करें जिनका अपना महत्व है।
एक प्रयोग आप अवश्य कर लें, जिससे कोविड वायरस ही नहीं अनेक वायरसों से आपके सुरक्षा अवश्य होगी। वैसे ताे यह प्रयोग लोगों को चैत्र मास की नवरात्रि के प्रथम दिन से आरम्भ करना चाहिए। हजारों की संख्या में लोग इस प्रयोग को प्रत्येक वर्ष करके अपने को सुरक्षित रख रहे हैं। प्रयोग बहुत ही साधारण है। नीम की कोमल ताम्रवर्ण की कोपलें, काली मिर्च तथा हरी वाली मिर्च जो लाल वर्ण की हो गयी हो, सम मात्रा में लेकर मटर के आकार वाली गोली तैयार करें। हां, बनाते समय मिर्च का बीज ​निकाल दें। इसकी दो गोली सुबह खाली पेट सेवन करें। मात्र पन्द्रह दिनों तक इसका सेवन आपको जरूर सुरक्षित बनाएगा।
दूसरा प्रयोग आपको करना है कि लवंग के भाप का सेवन नासिका तथा मुख के द्वारा। इसको आप ध्यान से समझिए। लवंग में बहुत बड़ी ताकत है। यह रुद्ध कंठ द्वारा तथा नासिका एवं श्वासनलिका के शोथ (सूजन) को दूर करके खोल देगी। इससे श्वास-प्रश्वास की क्रिया में सुधार होगा और ऑक्सीजन (प्राणवायु) का स्तर ठीक व्यवस्थित रहेगा। जिनका कम हो गया है, उनका ठीक हो जायेगा। यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। यह प्रयोग तो कोविड वायरस के लिए ही नहीं,​ किसी तरह के श्वास के रोगियों जैसे दमा के रोगियों के लिए भी लाभप्रद सिद्ध होगा। संक्षेप में लवंग आपकी इम्युनिटी बढ़ाकर सर्दी जुकाम से आपकी रक्षा करता है, पाचन क्रिया को सुधारता है, दर्दनिवारक है, बुखार में भी लाभप्रद है। अम्लपित्त तथा पौरुष शक्ति के लिए भी लाभप्रद है। ये सब आयुर्वेद की बातें हैं।
तीसरा प्रयोग-कोविड वायरस से बचने के लिए निम्न काढ़ा का प्रयोग करें-
हल्दी चौथाई चम्मच, लवंग-2, कालीमिर्च-2, छोटी पीपल-1, कलौंजी-आधा चम्मच । इनको कूट-पीसकर एक कप पानी में मंद आंच पर पकायें। जब आधा कप पानी शेष रहे तो छान लें। गरमागरम चाय की तरह पी लें ।
चतुर्थ प्रयोग अपने को वायरस मुक्त बनाने का हैअब तक जितना भी कहा गया, सुना गया कि कोविड वायरस नासिका के द्वारा फेफड़ों तक पहुंचकर संक्रमण का दुष्प्रभाव दिखला रहा है लेकिन यह वायरस शरीर की त्वचा को भी प्रभावित कर रहा है। अत: इस पर भी कुछ अवश्य विचार करना चाहिए। इसके लिए हल्दी का लेप बहुत ही उचित सिद्ध होगा। यह बात आज भले ही लोगों को नहीं समझ में आये लेकिन कल यह जरूर सही साबित होगी।
हम सभी हल्दी के लेपन की पद्धति से परिचित हैं। हमारे देश में वर-वधू को हल्दी लगाने की परम्परा रही है। आज लोग न तो इसे समझ रहे हैं और न ही इसे महत्व दे रहे हैं लेकिन इसमें बहुत बड़ा रहस्य है। इस परम्परा के वैज्ञानिक पक्ष के साथ व्यावहारिक पक्ष भी हैं। वर-वधू को एक बार नहीं, दिन में पांच-पांच बार, एक दिन नहीं पांच-पांच दिनों तक, एक बार हल्दी लगाने के लिए एक व्यक्ति नहीं, पांच-पांच, सात-सात व्यक्तियों द्वारा शरीर के नीचे से पैर से लेकर सिर तक लगायी जाती रही है। इसका कुछ तो महत्व जरूर है। अभिप्राय यही है कि हल्दी लेपन रस्म के माध्यम से दोनों को किसी भी तरह के संक्रमण से सुरक्षित करने का ही सहज और सुलभ उपाय होता रहा है। अत: आज इस हल्दी के लेप की सभी के शरीर की जरूरत है। आप सोचिए, बताया तो यहां तक जा रहा है कि कोई सामान भी किसी संक्रमित व्यक्ति ने अपने हाथ से स्पर्श कर दिया है तो आपतक वायरस आसानी से पहुंच जायेगा। उसके पास तक बैठना, उसके घर में जाने की भी मनाही है। तो इस तथ्य को स्वीकार करने में क्या परेशानी है कि शरीर की त्वचा के माध्यम से भी संक्रमण फैल रहा है। जो लोग हल्दी का लेप अपने शरीर पर कर सकें, वे लोग जरूर कर लें, कम से कम एक सप्ताह तक अवश्य। जो लेप नहीं लगा सकें वे लोग स्नान के समय अपने जल में हल्दी मिलाकर स्नान करें। इससे भी हम स्वयं को वायरस मुक्त अवश्य कर सकेंगे।
अंत में पांचवीं बात यह है कि आपके आसपास जहां कहीं भी पीपल का वृक्ष मिले तो उसके आसपास, नीचे, बगल में 10-20 मिनट बैठने का प्रयास करें, टहलें, घूमें जो सुलभ-सहज हो कुछ करें। पीपल का वृक्ष आपको आक्सीजन देगा। यह किसी भी हास्पिटल के ऑक्सीजन सिलिंडर से अधिक लाभ पहुंचाएगा। आपके स्वास्थ्य में सुधार लाायेगा। अगर सुबह जायें तो दो कोमल पत्ती तोड़ लें और उसे चबाकर सेवन करें। हां, चबाने से पहले उसे अच्छी तरह से धो लें। पीपल का वृक्ष दिव्य गुणों से भरपूर है। आयुर्वेद में पीपल वृक्ष को पवित्र तथा जीवनरक्षक के रूप में माना गया है। इसके प्रयोग से बुखार, दमा, खांसी तथा त्वचा से जुड़ी कई समस्याओं से राहत पायी जा सकती हैं। कोविड महामारी के ऊपर आज बहुत संधान-अनुसंधान चल रहे हैं। अरबों-खरबों के खर्च वाले प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं। आगे भी होते ही रहेंगे। इनके बीच कोविड संक्रमण से बचाव में उपरोक्त प्रयोग अवश्य लाभकारी सिद्ध होगा।

 

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