संतोषी माता व्रत: जानिए पूजन सामग्री, पूजा विधि

कोलकाताः मां संतोषी को मां दुर्गा के सबसे शांत, कोमल रूपों में से एक माना जाता हैं। संतोषी माता कमल के फूल में विराजमान हैं। मां संतोषी के पिता भगवान गणेश और माता रिद्धि-सिद्धि हैं। धन-धान्य और रत्नों से भरा परिवार होने के कारण इन्हें देवी संतोषी कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार शुक्रवार का दिन माता संतोषी को समर्पित होता है। इस दिन मां संतोषी की पूजा करना बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दिन मां का व्रत रखने से आपकी हर इच्छा पूरी हो जाती हैं। जानिए पूजा विधि, व्रत कथा, सामग्री और आरती।
माता संतोषी के व्रत
शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि माता संतोषी के 16 शुक्रवार करने से विशेष फल प्राप्त होते हैं। इसके साथ ही व्रत का समापन सुहागन महिलाओं को घर में बुलाकर भोजन और प्रसाद खिलाया जाता है। इसके साथ ही अपनी इच्छानुसार उपहार देने चाहिए।
संतोषी माता के व्रत की पूजन सामग्री

कलश
नारियल (पूजा पूरी होने तक यही नारियल इस्तेमाल किया जाएगा)
पान के पत्ते
थोड़े फूल
प्रसाद के लिए चना और गुड़
कपूर, अगरबत्ती और दीपक
हल्दी
कुमकुम
पीले चावल ( इसके लिए चावल में हल्दी मिला लें।)
लाल वस्त्र
चुनरी
संतोषी माता के व्रत की पूजन विधि
सूर्योदय से पहले उठकर घर के सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान कर लें। इसके बाद किसी पवित्र जगह या फिर मंदिर पर माता संतोषी की प्रतिमा स्थापित करें। इसके साथ ही मां के पास एक कलश जल भर कर रखें। कलश के ऊपर एक कटोरा भर कर गुड़ व चना रखें। आप चाहे तो कलश के ऊपर कलावा लपेटकर नारियल रख सकते हैं। अब मां के समक्ष घी का दीपक जलाएं।

माता को अक्षत, फूल, सुगन्धित गंध, नारियल, लाल वस्त्र या चुनरी अर्पित करें। इसके साथ ही भोग के रूप में गुड़ व चने खिलाएं। इसके बाद थोड़ा सा जल अर्पण करें। इसके साथ ही कथा का आरंभ करें। कथा सुनने और सुनाने वाले हाथ में गुड़ और चना लें। कथा समाप्ति के बाद मां के जयकारे लगाते हुए आरती करें। कथा व आरती के बाद हाथ का गुड़ व चना गाय को खिला दें।
वही कलश पर रखा हुआ गुड़ चना सभी को प्रसाद के रुप में बांट दें। इसके साथ ही कलश का पानी तुलसी माता या किसी अन्य पौधें पर चढ़ा दें।

 

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