वनकर्मियों के प्रयास के बाद भी नहीं बच पाया रॉयल बंगाल टाइगर

इलाज के लिए जाते समय बाघ की मौत
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : वन क्षेत्र से भटके एक नर रॉयल बंगाल टाइगर (बाघ) की रविवार को इलाज के लिए सुंदरबन के सजनेखली ले जाने के दौरान मौत हो गई। वनकर्मियों के काफी प्रयास के बाद भी टाइगर को बचाया नहीं जा सका। टाइगर की उम्र करीब 11 – 12 थी। माना जा रहा है कि वृद्धावस्था के कारण टाइगर की मृत्यु हुई थी। हालांकि, उसकी मौत के पीछे कोई और कारण तो नहीं है, इसका पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम किया जायेगा। प्रधान मुख्य वनपाल विनोद कुमार यादव ने सन्मार्ग से कहा, बाघ हरिखली के जंगल में घूम रहा था। रविवार सुबह एक तालाब के किनारे लेटा हुआ मिला, कर्मियों ने उसे मुर्गा खिलाने की कोशिश की लेकिन उसने वह नहीं खाया। अचानक उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई। वह बीमार पड़ गया और उसे सजनेखाली लाया गया। वनकर्मियों ने काफी प्रयास किया। उसे पानी पिलाने के साथ अन्य प्रयास भी किये। हालांकि, बाघ बच नहीं पाया।
माना जाता है कि बाघ की मौत वृद्धावस्था के कारण किसी बीमारी से हुई है। उल्लेखनीय है कि सुंदरवन चक्रवात यास से तबाह हो गया है। सुंदरवन ब्राघ्य परियोजना का विशाल क्षेत्र पानी में डूबा है। टाइगर की मौत से कुछ दिन पहले इस बात की जांच की जा रही है कि उसे कुछ भी खाना मिला या नहीं। वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि बाघ की मौत की वजह चक्रवात ‘यास’ और इसके बाद की परिस्थितियों से संबंधित नहीं लग रही है। अधिकारी ने कहा कि सुंदरबन में बाघों की गणना (2019-20) के मुताबिक, सुंदरबन में रॉयल बंगाल बाघों की संख्या 96 है।

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