इतनी सी बात पर स्‍मोकिंग छोड़ दी थी ऋषि कपूर ने

अभिनेता ऋषि कपूर अब हमारे बीच नहीं हैं। उनकी जिंदगी के कई ऐसे रोचक किस्से हैं, जो बॉलीवुड के गलियारों में खूब सुने जा सकते हैं। इनमें से कुछ का जिक्र उन्होंने अपनी ऑटोबायोग्राफी ‘खुल्लम खुल्ला : ऋषि कपूर अनसेंसर्ड’ में किया था, जो मीना अय्यर ने लिखी और हार्पर कॉलिन्स ने प्रकाशित की है। आइये, पुस्तक में वर्णित कुछ रोचक किस्सों पर एक नजर डालते हैं।

बेटी के एक कमेंट के बाद छोड़ दी थी स्मोकिंग

ऋषि कपूर पहले खूब सिगरेट पीया करते थे, लेकिन बेटी ऋद्धिमा के एक कमेंट के बाद उन्होंने इसे हमेशा के लिए छोड़ दिया। उन्होंने लिखा है, “मैं बहुत ज्यादा स्मोकिंग करता था, लेकिन मैंने तब सिगरेट छोड़ दी, जब उसने (बेटी ने) कहा- मुझसे आपको सुबह-सुबह किस नहीं होगा, क्योंकि आपके मुंह से बदबू आती है।”

बच्चों पर पूरा ध्यान देते थे ऋषि

ऋषि कपूर ने बुक में बताया है कि वे उस वक्त बहुत बिजी थे और बच्चे बहुत छोटे थे, लेकिन वे उनके साथ समय बिताने की पूरी कोशिश करते थे। सन्डे को उनका ऑफ रहता था और हर साल एक महीने के लिए बच्चों को अब्रॉड भी ले जाते थे। इसके अलावा, आउटडोर शूट पर भी बच्चे उनके साथ होते थे। ऋषि की मानें तो वे उन्हें पूरा अटेंशन देते थे। फिर चाहे वर्क शेड्यूल कितना भी हैक्टिक क्यों न हो। उन्होंने लिखा है कि जब वे आउटडोर शूट पर जाते थे तो उनके साथ सारे नौकर-चाकर भी होते थे। फिर चाहे वह कुक हो या मेड।

जब नशे में ऋषि की गर्लफ्रेंड से झगड़ने पहुंच गए थे संजय

बायोग्राफी में ऋषि ने बताया है, “टीना मुनीम ने स्क्रीन पर अलग आकर्षण बनाया था। मैंने उनके जैसी किसी और मॉर्डन-खूबसूरत को-स्टार के साथ कभी काम नहीं किया। लोग कहते थे कि हम स्क्रीन पर अच्छे लगते हैं। ‘कर्ज’ में हमने साथ काम किया, जो मेरे दिल के बेहद करीब है। हमारी दोस्ती और साथ आ रही फिल्मों के कारण हमारे सीक्रेट अफेयर की अफवाह उड़ी। लोगों ने कहानियां बनाना शुरू कर दी थीं। तब मैं शादीशुदा नहीं था और टीना का अफेयर संजय दत्त के साथ था। जब संजू ने हमारे अफेयर की खबर सुनी तो एक दिन वे ड्रग्स के नशे में गुलशन (ग्रोवर) के साथ नीतू कपूर के पाली स्थित अपार्टमेंट में झगड़ने पहुंच गए।” बुक में ऋषि लिखते हैं, गुलशन ने मुझे बाद में बताया कि फिल्म ‘रॉकी’ की शूटिंग के दौरान संजय, नीतू के घर झगड़ने पहुंच गए थे, लेकिन नीतू ने इस सिचुएशन को बेहतरीन तरीके से संभाला। उन्होंने शांतिपूर्वक संजू को समझाया कि वे बातें महज अफवाहें हैं। नीतू ने उनसे कहा था-‘टीना और चिंटू के बीच ऐसा कुछ नहीं है। वे सिर्फ अच्छे दोस्त हैं। इंडस्ट्री में रहते हुए तुम्हें अपनों पर भरोसा करना सीखना चाहिए।’ कुछ वक्त बाद, मैं और संजू इन बातों को याद करके हंसते थे। ये अफवाहें तब साफ हुईं जब नीतू और मेरी शादी हुई और इस शादी में मेरी सारी हीरोइन्स पहुंचीं।”

अमिताभ बच्चन के साथ रहा अनकहा तनाव

ऋषि ने अपनी ऑटोबायोग्राफी में लिखा है, “जीतेंद्र से तो मेरे रिलेशन अच्छे थे, लेकिन अमिताभ और मेरे संबंधों में तल्खी थी। मैं उनके साथ अनकम्फर्टेबल महसूस करता था। वे मुझसे 10 साल बड़े थे, लेकिन मैं उन्हें अमितजी की जगह अमिताभ ही बुलाता था। शायद मैं बेवकूफ था। ‘कभी-कभी’ की शूटिंग के वक्त तो न मैं उनसे बात करता था और न ही वे। हालांकि, बाद में सब ठीक हो गया और हमारे रिश्ते बेहद अच्छे हो गए। अब तो उनसे फैमिली रिलेशनशिप है। उनकी बेटी श्वेता की शादी मेरी बहन ऋतु नंदा के बेटे निखिल से हुई है।’’

30 हजार में खरीदा था बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड

ऋषि ने ‘खुल्लम खुल्ला’ में लिखा है, “ऐसा लगता है कि ‘बॉबी’ के लिए मुझे बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिलने से अमिताभ निराश हो गए थे। उन्हें लगा था कि ये अवॉर्ड ‘जंजीर’ के लिए जरूर मिलेगा। दोनों ही फिल्में एक ही साल (1973) में रिलीज हुई थीं। मुझे ये कहते हुए शर्म आती है कि मैंने वह अवॉर्ड खरीदा था। दरअसल उस वक्त में भोला-भाला सा था। तारकनाथ गांधी नामक एक पीआरओ ने मुझसे कहा, सर 30 हजार दे दो, तो मैं आपको अवॉर्ड दिलवा दूंगा। मैंने बिना कुछ सोचे उन्हें पैसे दे दिए। मेरे सेक्रेटरी घनश्याम ने भी कहा था, सर, पैसे दे देते हैं। मिल जाएगा अवॉर्ड। इसमें क्या है। अमिताभ को बाद में किसी से पता चला कि मैंने अवॉर्ड के लिए पैसे दिए थे। मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि 1974 में मैं महज 22 साल का था। पैसा कहां खर्च करना है, कहां नहीं, इसकी बहुत समझ नहीं थी। बाद में मुझे अपनी गलती का अहसास हुआ। कभी-कभी के दौरान रिलेशन में गर्मजोशी न होने की एक और कहानी है। अमिताभ फिल्म में सीरियस रोल में थे। जबकि मेरा रोल थोड़ा उलट था। फिल्म में मैं खिलंदड़ा किस्म का हूं। अमिताभ रोल में गंभीरता बनाए रखने के लिए सेट पर अलग-थलग रहते थे। शायद सच तो ये है कि मैंने अवॉर्ड खरीदा था, सबने ये जान लिया था।”

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