रामलला के वकील का शीर्ष न्यायालय में दावा, विवादित स्‍थल पर देवी-देवताओं के चित्र मिले

ayodhya

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सांतवे दिन भी अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि विवाद पर सुनवाई हुई। इस दौरान वकील सीएस वैद्यनाथन ने रामलला विराजमान की ओर से दलीलें पेश की । कोर्ट में उन्होंने कहा कि अयोध्या में विवादित स्‍थल के स्तंभों पर हिंदू देवी-देवताओं के चित्र मिले है। साथ ही उन्होंने कोर्ट को विवादित स्‍थल पर निरीक्षण के लिए नियुक्त किए गए कमिश्नर की रिपोर्ट भी पढ़कर सुनाई। इसके अलावा वैद्यानाथ ने कोर्ट में अयोध्या से मिला एक नक्‍शा भी पेश किया जिसमें स्तंभों के चित्रों का जिक्र था। साथ ही उन्होंने कहा कि खुदाई के दौरान मिले पाषाण स्तंभ पर शिव तांडव, हनुमान और अन्य देवी देवताओं की मूर्तियां मिली थी।

भगवान शिव सहित अन्य देवी-देवताओं के चित्रों ‌का जिक्र

वैद्यनाथन ने बताया कि अयोध्या में विवादित स्‍थल पर कमिश्नर ने 16 अप्रैल 1950 को निरीक्षण किया था। निरक्षण के दौरान कमिश्नर ने एक रिपोर्ट तैयार किया था, जिसमें भगवान शिव सहित अन्य देवी-देवताओं के चित्रों की बात कही गयी थी। इसके अलावा उस रिपोर्ट में कहा गया कि वहां किसी मस्जिद के अवशेष नहीं मिले थे।

पिछली सुनवाई के दौरान कहा गया अयोध्या भगवान राम का जन्मस्थान है

सुप्रीम कोर्ट में पिछली सुनवाई के दौरान रामलला विराजमान के वकील ने कहा था कि हिंदुओं का मानना है कि अयोध्या भगवान राम का जन्मस्‍थान है। उन्होंने यह भी कहा कि कोर्ट को राम के प्रति लोगों के विश्वास, भाव और निष्ठा को मानना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा था कि मुगल काल के शासक अकबर और जहांगीर के काल में भारत आने वाले विदेशी यात्री विलियम फिंच तथा हॉकिन्स ने अपने यात्रा-वृतांत में अयोध्या में राम जन्मभूमि के बारे में जिक्र किया है।

रोज सुनवाई की बात कही थी

सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि विवाद को लेकर मध्यस्थता पैनल का गठन किया था। कोर्ट ने कहा था यदि सभी पक्ष आपस में इस मामले का समाधान नहीं निकाल पाते हैं तो अदालत रोजाना सुनवाई के बारे में विचार करेगी। मामले के बेनतीजा रहने पर गत 6 अगस्त से अदालत इसपर सुनवाई कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि नियमित सुनवाई तब तक चलेगी, जब तक कोई नतीजा नहीं निकल जाता।

हो चुकी है छह सुनवाई

इस मामले पर अब तक छह सुनवाई हो चुकी है। 6 अगस्त को पहली सुनवाई में पूरी 2.77 एकड़ विवादित जमीन पर निर्मोही अखाड़ा ने अपना दावा किया। अखाड़ा की ओर से कहा गया था कि विवादित जमीन पर वर्ष 1934 से मुसलमानों प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। वहीं 7 अगस्त को हुई दुसरी सुनवाई में जब अखाड़ा से कोर्ट ने 2.77 एकड़ भूमि के दस्तावेज पेश करने को कहा गया तो अखाड़ा ने बताया कि साल 1982 में हुई डकैती में दस्तावेज गायब हो गए। तीसरी सुनवाई 8 अगस्त को हुई। इस सुनवाई के दौरान जजों की बेंच ने जानना चाहा कि देवता के जन्मस्‍थान को न्याय का इच्छुक कैसे माना जा सकता है जो इस केस में पक्षकार भी हो। कोर्ट के इस सवाल पर वकील ने कहा था कि हिंदू धर्म में किसी स्थान को पवित्र मानने और उसकी पूजा के लिए मूर्तियों की जरूरत नहीं है। साथ ही नदियों और सूर्य की भी पूजा किए जाने की दलील भी दी थी। वहीं 9 अगस्त को हुई चौथी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भगवान राम के वंशज के दुनिया या अयोध्या में होने को लेकर सवाल किया था जिसके जवाब में वकील ने कहा था कि हमें इसकी जानकारी नहीं है। बाद में जयपुर राजघराने की दीयाकुमारी ने दावा किया था कि वे श्री राम के बड़े बेटे कुश की वंशज हैं। वहीं दूसरी ओर सप्ताह में पांच दिन सुनवाई किए जाने पर मुस्लिम पक्ष ने आपत्ति जताई थी। पांचवी सुनवाई 13 अगस्त को हुई। इस दौरान वकील सीएस वैद्यनाथन ने रामलला विराजमान की और से दलीलें पेश की थी। कोर्ट में उन्होंने कहा  कि मूर्ति रखे जाने के बाद से वहां नमाज नहीं पढ़ी गई है। साथ ही ये भी कहा कि वर्ष 1949 में मूर्ति रखे जाने से पहले भी राम का जन्मस्थान हिन्दुओं के लिए पूजनीय था। वैद्यनाथन ने कहा कि यह  जरूरी नहीं है कि मूर्ति रखे जाने के बाद ही कोई स्‍थान पूजनीय हो, हिंदू धर्म में नदियों और सूर्य की भी पूजा की जाती है गंगा और गोवर्धन पर्वत इसके उदाहरण हैं।

 

 

 

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