पति पत्नी से शुरू हुआ रक्षाबंधन, ऐसे बना राखी भाई बहन का त्योहार

कोलकाताः रक्षाबंधन भाई बहन के प्रेम का प्रतीक यह त्योहार हर साल श्रावण महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस साल 11 और 12 अगस्त दोनों ही दिन पूर्णिमा तिथि रहने के कारण आप दो दिन राखी का त्योहार मना सकते हैं। रक्षाबंधन केवल राखी बांधने तक ही सीमित नहीं है बल्कि, यह बहन भाई की भावनाओं का पर्व भी है। आमतौर पर इस पर्व को भाई-बहन से जोड़कर ही देखा जाता है। लेकिन, आपको जानकर हैरानी होगी की रक्षाबंधन की शुरुआत पति पत्नी द्वारा की गई थी। तो आइए जानते हैं आखिर यह पर्व भाई बहन के प्रेम का प्रतीक कैसे बना।

भविष्य पुराण में रक्षाबंधन की कथा
दरअसल, भविष्य पुराण में रक्षाबंधन को लेकर एक रोचक कथा बताई गई है। दरअसल, सतयुग में एक वृत्रासुर नाम का दानव था। वृत्रासुर ने देवताओं के साथ युद्ध करके स्वर्ग पर जीत हासिल कर ली थी। दरअसल, इस असुर को वरदान मिला था कि उस पर किसी भी अस्त्र और शस्त्र का प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसी कारण इंद्र बार-बार वृत्रासुर से पराजित हो रहे थे। देवताओं की जीत के लिए महर्षि दधीचि ने अपने शरीर का त्याग कर दिया था। उनकी हड्डियों से अस्त्र और शस्त्र बनाए गए। इन्हीं से इंद्र का अस्त्र वज्र को भी बनाया गया।
देवराज इंद्र और वृत्रासुर का युद्ध
देवराज इंद्र जब वृत्रासुर के साथ युद्ध लड़ने के लिए जा रहे थे तो वह पहले अपने गुरु बृहस्पति के पास पहुंचे। तब उन्होंने गुरु बृहस्पति से कहा कि में वृत्रासुर से अंतिम बार युद्ध करने के लिए जा रहा हूं। इस युद्ध में मैं या तो जीत हासिल करुंगा या पराजित होकर लौटूंगा। इस संवाद को सुनकर देवराज इंद्र की पत्नी चिंतित हो गई और उन्होंने अपनी साधना और मंत्रों के बल पर एक विशेष रक्षासूत्र को तैयार किया और उसे देवराज इंद्र की कलाई पर बांधा।
पूर्णिमा तिथि के दिन बांधा रक्षासूत्र
जिस दिन इंद्राणी शची ने देवराज इंद्र की कलाई पर ये रक्षासूत्र बांधा उस दिन पूर्णिमा तिथि थी। इसके बाद जब इंद्र युद्ध करने के लिए पहुंचे तो उनका सहास और बल देखने लायक था। देवराज ने अपनी ताकत के बल पर वृत्रासुर को मार गिराया। इस कहानी से पता चलता है कि अपने सुहाग की रक्षा के लिए पत्नी भी अपने पति की कलाई पर रक्षासूत्र बांध सकती हैं।
दौपदी को श्रीकृष्ण ने दिया रक्षा का वरदान
इसे लेकर एक कथा यह भी मिलती है की एक बार भगवान कृष्ण और द्रौपदी की है। जब भगवान कृष्ण शिशुपाल का वध करने के लिए चक्र चलाया तो इस दौरान उनकी अंगुली कट गई और उनका खून टपकने लगा। तब भगवान कृष्ण का खून रोकने के लिए द्रौपदी ने अपनी साड़ी से एक टुकड़ा फाड़कर भगवान की अंगुली पर बांध दिया। तब कृष्ण ने द्रौपदी को वचन देते हुए कहा कि जब भी वह संकट में होंगी तो उनकी सहायता के लिए हमेशा पहुंच जाएंगे। द्रौपदी के चीरहरण के दौरान उन्होंने अपना वचन पूरा भी किया। रक्षाबंधन को लेकर ऐसी ही और भी कई कहानियां मौजूद है।
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