राजस्थान में मोरों के पंखों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने पर होगा विचार

जयपुर : राजस्थान के वन राज्य मंत्री सुखराम विश्नोई ने बुधवार को विधानसभा में कहा कि राष्ट्रीय पक्षी मोर को शिकार से बचाने के लिए उसके पंखों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने पर विचार किया जायेगा।
सुखराम विश्नोई प्रश्नकाल में विधायकों के पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार द्वारा सारस, गिद्ध, गोडावण, मोर जैसे पक्षियों के संरक्षण के लिए गंभीरता से प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सारस एवं गिद्ध की कैप्टिव ब्रीडिंग करने के अतिरिक्त गोडावण के नये अंडे एकत्रित कर चूजे तैयार कर इन पक्षियों के संरक्षण का काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पक्षियों के घायल या बीमार होने की सूचना मिलने पर तत्काल टीम द्वारा उन्हें बचाने का प्रयास किया जाता है। इसके अतिरिक्त शिकार करने की सूचना मिलने पर तत्काल प्रभाव से कार्यवाही कर मुकदमा दर्ज करने, चालान पेश करने तथा गिरफ्तारी का काम किया जाता है। इससे पहले विधायक भरत सिंह के मूल प्रश्न के जवाब में विश्नोई ने बताया कि गत वर्ष प्रदेश के कुछ वन मंडलों में जहरीला दाना डालकर पक्षियों के मारे जाने के प्रकरण सामने आये हैं। इस प्रकार की घटनाओं की रोकथाम के लिए अधीनस्थ स्टाफ द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों की नियमित गश्त की जाती है। उन्होंने बताया कि इस प्रकार का प्रकरण संज्ञान में आने पर वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम 1972 के प्रावधानों के तहत आरोपितों के विरुद्ध कार्रवाई की गयी है। इसके अतिरिक्त विभाग द्वारा आमजन में जागरूकता लाने के लिए पक्षी महोत्सव एवं वन्यजीव सप्ताह के आयोजन किये गये हैं। विश्नोई ने बताया कि वर्तमान में राज्य के जिलों में ऑनररी वाइल्ड लाइफ वार्डन नियुक्त नहीं किये हुए हैं। इसका परीक्षण किया जा रहा है।

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