अयोध्या फैसले पर पीएम मोदी बोले- रामभक्ति हो या रहीमभक्ति, समय है भारतभक्ति का

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नई दिल्ली : शीर्ष न्यायालय ने शनिवार को वर्षों से कानूनी लड़ाई में उलझे देश में सबसे चर्चित अयोध्या भूमि विवाद मामले में फैसला सुनाया है। राजनीतिक रूप से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले पर शनिवार को शीर्ष न्यायालय के पांच जजों की पीठ ने सर्वसम्मति यानी 5-0 से ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। 9 नवंबर को न्यायालय ने फैसले के तहत केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि शीघ्र विवादित भूमि पर राम मंदिर बनाया जाए। इसके साथ ही तीन से चार महीने के भीतर सेंट्रल गवर्नमेंट ट्रस्ट की स्थापना के लिए केंद्र सरकार को योजना बनाने का आदेश दिया गया है। उच्चतम न्यायालय द्वारा मुस्लिम पक्ष के लिए कहा गया कि अयोध्या में पांच एकड़ वैकल्‍प‍िक जमीन सुन्नी वक्‍फ बोर्ड को प्रदान की जाएगी।

भारतभक्ति की भावना को सशक्त करने का समय- मोदी

अयोध्या मामले पर आए फैसले को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर ट्वीट किया कि देश के सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या पर अपना फैसला सुना दिया है। इस फैसले को किसी की हार या जीत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। रामभक्ति हो या रहीमभक्ति, ये समय हम सभी के लिए भारतभक्ति की भावना को सशक्त करने का है। देशवासियों से मेरा अनुरोध है कि शांति, सद्भाव और एकता बनाए रखें।

अखाड़े की याचिका को किया गया खारिज

गौरतलब है कि अयोध्या भूमि विवाद पर अंतिम निर्णय सुनाते हुए भारत के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि इस बात के स्पष्ट सबूत हैं कि हिंदू मानते हैं कि भगवान राम का जन्म ‌अयोध्या के विवादित स्थान पर हुआ था। इस बात को उन्होंने पूरी तरह भरे न्यायालय कक्ष में अयोध्या भूमि विवाद का एकमत फैसला पढ़ते हुए कहा। न्यायालय ने भारतीय पुरातत्व सवेर्क्षण विभाग की रिपोर्ट में कही बात को आधार मानते हुए कहा, “बाबरी मस्जिद का निमार्ण खाली जमीन पर नहीं हुआ था। विवादित जमीन के नीचे एक ढांचा था और यह इस्लामिक ढांचा नहीं था।” अदालत ने कहा कि निमोर्ही अखाड़े का दावा केवल प्रबंधन का है। सरकार ने अखाड़े की याचिका को खारिज कर दिया।

संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़,न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल हैं। संविधान पीठ ने कहा कि पुरातात्विक साक्ष्यों को सिर्फ एक राय बताना भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के प्रति बहुत ही अन्याय होगा।

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