हृदय रोग में लाभप्रद है अनन्नास

अनन्नास एक बीजपत्री कुल का पौधा है। यह विश्व के अधिकांश गर्म भागों में होता है। भारत में यह तमिलनाडु कर्नाटक, केरल, असम, बंगाल और उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में होता है।
अनन्नास फल की पत्तियों और तने में ब्रोमेलीन नाम का एंजाइम पाया जाता है जो प्रोटीन को पचाता है। कैरेबियन द्वीप के लोग भोजन पचाने के लिए इसका व्यापक रूप से प्रयोग करते थे।
इसमें पर्याप्त मात्रा में विटामिन ए, बी सी, कैल्शियम, फास्फोरस, लोहा, चीनी इत्यादि पाये जाते हैं। यह कुछ खट्टापन लिए होता है। इसकी सुगंध मन भावन होती है। इसे छील कर खाया जाता है। यह एक अति स्वादिष्ट फल है। इसके अलावा अन्य फलों के रस में मिलाकर भी इसका सेवन किया जाता है। अनन्नास से शरबत, मुरब्बे और मिसरी बनाई भी जाती है। यह त्वचा को सुन्दर बनाता है, सौंदर्य बढ़ाता है और हृदय रोग को दूर रखता है। यह प्रोटीन को पचाता है।
अनन्नास के तनों में काफी ब्रोमेलीन होता है। इसके तने को एकत्र कर तने के बाहरी भाग को निकालकर अंदर के सफेद भाग को पीस कर उसका रस प्राप्त कर लिया जाता है। इस रस में कुछ रसायन मिलाकर ब्रोमेलिन अलग कर दिया जाता है।
ब्रोमेलीन सुखाने पर महीन सफेद चूर्ण का रूप धारण कर लेता हैं। इसका उपयोग अनेक प्रकार के रोगों के उपचार में किया जाता हैं। हृदय रोग में इसका काफी प्रयोग किया जाता हैं। प्रोटीन के कण रक्त वाहिकाओं में थक्के बनाकर रक्त की प्रवाह को रोक देते हैं।
ब्रोमेलीन रक्त वाहिका में बने थक्कों को नष्ट करके रक्त के प्रवाह को सुगम बनाता है। अनन्नास से प्राप्त एंजाइम का प्रयोग जली हुई त्वचा के उपचार में भी किया जाता हैं। जली और भरी हुई त्वचा को निकाल कर जब उस पर शरीर के किसी अन्य स्थान से निकाली गई नई त्वचा प्रत्यारोपित की जाती है तो उसमें ब्रोमेलीन का प्रयोग अत्यंत लाभदायक होता है। यह सूजन को कम करने के साथ-साथ घावों को भरने में भी सहायता करता है।

 

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