हिन्दी नाट्य उत्सव को खूब सराहा लोगों ने

‘नाटक तो पहले भी देखे हैं, मगर ऐसा नहीं देखा’
सन्मार्ग संवाददाता
सिलीगुड़ी : शुक्रवार को सिलीगुड़ी के दिनबंधु मंच पर पश्चिम बंग हिन्दी अकादमी के सहयोग से प्रथम हिन्दी नाट्य उत्सव 2021 का आयोजन किया गया जिसकी दर्शकों ने खूब सराहना की। पूरा दर्शक दीर्घा मौजूद लोगों की तालियों से गूंज रहा था। नाट्य उत्सव का आयोजन भोजपुरी के प्रख्यात भिखारी ठाकुर के नाटक पर किया गया था। नाट्य उत्सव देखने आये लोगों ने कार्यक्रम की जमकर सराहना की। इस तरह के कार्यक्रम आयोजित होने चाहिये।
कार्यक्रम के सह संयोजक दिलीप दुगड़ ने कहा, ‘हिन्दी अकादमी की मीटिंग में फैसला लिया गया कि ना केवल सिलीगुड़ी बल्कि उत्तर बंगाल के हर हिस्से में इस तरह के कार्यक्रम आयोजित होंगे ताकि अधिक से अधिक हिन्दीभाषियों को एक साथ जोड़ा जा सके।’
मंतोष प्रसाद ने कहा, ‘सिलीगुड़ी में 10 साल पहले हिन्दी का नाटक मैंने देखा था, लेकिन इतने सालों बाद फिर से इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन बेहतरीन कदम है।’ इसी तरह सेवक मोड़ के विजय प्रसाद ने कहा, ‘नाट्य उत्सव का आयोजन काफी अच्छा लगा। यह कार्यक्रम भोजपुरी समाज के लिए काफी बड़ी बात है और इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन आगे भी होना चाहिये। हम बचपन से भिखारी ठाकुर का नाम सुनते आ रहे हैं, अब इस तरह का नाटक देखकर काफी अच्छी अनुभूति हो रही है।’ ज्ञान प्रकाश ने कहा, ‘विश्व ख्याति प्राप्त भिखारी ठाकुर का नाटक देखना सौभाग्य की बात है। ये पश्चिम बंगाल के लिए भी बहुत बड़ी बात है। आयोजक मण्डल को इसके लिए बधाई देना चाहूंगा।’ संगीता प्रकाश ने कहा, ‘बचपन से भिखारी ठाकुर के बारे में सुनती आयी हूं, आज उनका नाटक देखकर काफी अच्छा महसूस हुआ। इस तरह के कार्यक्रम आगे भी होंगे, इसकी पूरी उम्मीद है।’ पूनम चौधरी ने कहा, ‘काफी अच्छा महसूस हुआ। काफी पहले से सुनते और देखते आयी हूं, ले​किन इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन होना अत्यंत सराहनीय है।’ उमेश चौधरी ने भी कार्यक्रम की काफी सराहना की। सोमा गोस्वामी ने कहा, ‘पहले भी कई नाटक देखे हैं, लेकिन हिन्दी में इस तरह का आयोजन सराहनीय है। उम्मीद करते हैं कि आगे भी ऐसा आयोजन होता रहे।’ रूपा ने कहा, ‘सिलीगुड़ी में मैंने कई बंगाली नाटक देखे, लेकिन हिन्दी में मैंने यह पहला नाटक देखा। काफी खुशी हो रही है। सिलीगुड़ी के लोगों के लिए और विशेषकर हिन्दीभाषियों के लिए यह काफी गर्व की बात है। भोजपुरी के शेक्सपीयर कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर का नाटक देखकर काफी अच्छा लगा।’ पेशे से शिक्षक डॉ. बी. के प्रसाद ने कहा, ‘आगे भी इस तरह के कार्यक्रम आयोजित होने चाहिये। इस कार्यक्रम की जितनी प्रशंसा की जाए, वह कम है।’ ऐसा ही रंजू सिंह भी मानती हैं। नाट्यकार व कवि मोहन लाल गुप्ता ने कहा, ‘इस तरह के कार्यक्रमों से हिन्दी भाषा को बढ़ावा मिलता है। आगे भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित होने चाहिये।’ वी. चौधरी ने कहा, ‘काफी सालों बाद हिन्दी में ऐसा बेहतरीन नाट्य उत्सव देखकर काफी अच्छा लग रहा है।’

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