आम्रपाली के अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करेगी एनबीसीसी- सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनबीसीसी) को आदेश दिया कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में वह आम्रपाली के अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करे। आम्रपाली की अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए एनबीसीसी के पास पैसा कहां से आएगा इस बात पर अभी कुछ खुलासा नहीं किया गया है।

आशा की किरण ‌जगी है‌

बता दें कि जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने इससे पहले 10 मई को हुई सुनवाई में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से 42 हजार से ज्यादा घर खरीदने वालों को बड़ी राहत मिली है। इससे आम्रपाली ग्रुप में पैसा लगाने वाले लोगों के अन्दर एक आशा की किरण जगी है‌ कि अब उन्हें उनका आशियाना मिल पाएगा।

इस ग्रुप की सभी कंपनियों के पंजीकरण रद्द किये जायेंगे

इस सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस ग्रुप की सभी कंपनियों का पंजीकरण जल्‍द रद्द किया जाए। साथ ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को भी आदेश दिया गया कि वह इस कंपनी द्वारा निवेशकों के पैसों की हेराफेरी की जांच करे। आदेश के बाद ईडी ने कंपनी और उसके मालिकों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग (धनशोधन) का आपराधिक मामला दर्ज किया है। ईडी के लखनऊ कार्यालय ने नोएडा पुलिस के समक्ष कंपनी के खिलाफ कम से कम 16 प्राथमिकी दर्ज होने का संज्ञान लेते हुए इस महीने की शुरुआत में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया और डायरेक्टर की संपत्तियों को कुर्क करने का आदेश दिया है। फिलहाल आम्रपाली के सीएमडी (मुख्य प्रबंध निदेशक) समेत अन्य जेल में बंद हैं।

प्राधिकरण को सुप्रीम कोर्ट की फटकार

गौरतलब है कि इस दाैरान नोएडा व ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि जब बिल्डर फंड डायवर्ट कर रहा था तब बैंक और संस्‍था आंखें मूंदे हुए थी। इसके सा‌‌थ ही कोर्ट ने उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार से कहा कि जितने भी बिल्डरों ने फ्लैट नहीं दिए हैं उनके खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाई की जाए। खरीदारों के हित सुरक्षित करने के जिस प्रकार के इन्तजाम किए जाएंगे उनका विवरण समय-समय पर दिया जाए।

संसाधन और अनुभव की कमी

गौरतलब है कि कुछ महीने पहले हुई सुनवाई में नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि आम्रपाली समूह की रुकी हुई परियोजनाएं पूरी करने के लिए उनके पास संसाधन और अनुभव नहीं है। साथ ही दोनों प्राधिकारों ने अपने जवाब में यह भी कहा ‌‌था कि आम्रपाली पर उनका 5 हजार करोड़ रुपये बकाया है। इसके बाद कोर्ट ने 8 मई को कहा कि वह आम्रपाली की 15 प्रमुख आवासीय संपत्तियों का मालिकाना अधिकार उनको सौंप सकती है।

कई बिल्डर भाग गए

बता दें कि निवेशकों की सबसे बुरी स्थिति नोएडा और ग्रेटर नोएडा में है क्योंकि इन जगहों के प्रोजेक्ट का काम पूरा किए बिना लगभग 25 प्रतिशत बिल्डर भाग गए हैं। यहीं नहीं अगर गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और गाजियाबाद के प्रोजेक्ट को देखा जाए तो वहां भी स्थिति एेसी ही है।

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