जानिए नवरात्रि में क्यों जरूरी है कन्या पूजन, जानें शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व

कोलकाता :नवरात्रि के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है और इस दिन ज्यादातर घरों में कन्या पूजन भी किया जाता है। कुछ लोग अष्टमी के दिन भी कन्या पूजन करते हैं लेकिन इस तिथि को व्रत रखने के कारण ज्यादातर घरों में नवमी के दिन पूजा-अर्चना करने के बाद कन्या पूजन किया जाता है। कंजक पूजा की परंपरा हमारे समाज में कई सालों से चली आ रही है। मान्यता है कि बिना कंजक पूजा के नवरात्रि का शुभ फल प्राप्त नहीं होता हौ और माता की कृपा भी अधूरी रह जाती है। कंजक पूजन में दस वर्ष तक की कन्याओं को बिठाकर उनको दुर्गा स्वरूप मानकर पूजन किया जाता है। इसी परंपरा को कुमारी पूजन के नाम से जाना जाता है। आइए जानते हैं कैसे करनी चाहिए कंजक पूजा
2 से 10 वर्ष की कन्या का करें पूजन
स्कंद पुराण के अनुसार, 2 वर्ष की कन्या को कुमारी, 3 वर्ष की कन्या को त्रिमूर्ती, 4 वर्ष की कन्या को कल्याणी, 5 वर्ष की कन्या को रोहिणी, 6 वर्ष की कन्या को कालिका, 7 वर्ष की कन्या को चंडिका, 8 वर्ष की कन्या को शांभवी और 9 वर्ष की कन्या को मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। वहीं 10 वर्ष की आयु की कन्या को सुभद्रा कहा जाता है। कंजक पूजन में कन्याओं की संख्या दो से कम और नौ से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। कंजक पूजन में एक छोटे लड़के को बटुक भैरव या लांगूरा कहा जाता है। मान्यता है कि जिस प्रकार भगवान शिव ने हर शक्तिपीठ पर एक-एक भैरव को रखा है, उसी तरह कन्या पूजन में भी एक बालक को रखना जरूरी है। इसलिए कंजकों में एक भैरव को बैठाया जाता है।
कन्या पूजन विधि
कन्या पूजन के लिए सभी कन्या और लांगूरा को घर पर बुलाने पर पूरे परिवार को उनका स्वागत करना चाहिए। उनको भी माता का दर्जा देते हुए, सेवा-सत्कार करनी चाहिए। साथ ही माता के जयकारे लगाने चाहिए। इसके बाद उन सभी के पैरों और हाथों को धोएं और उनके पैर छूकर आशीष लें। इसके बाद सभी कन्याओं के सिर पर लाल चुनरी उठाएं। फिर हलवा, पूड़ी, सब्जी, काले चने, फल आदि का भोजन कराएं। भोजन कराने के बाद रोली, कुमकुम और अक्षत का टीका लगाएं और दक्षिण देकर उनके चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लें। इसके बाद उनके सम्मान सहित विदा करें।
कन्या पूजन का महत्व
कन्या पूजन करने से माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि बिना कन्या पूजन के नवरात्रि का पूरा फल नहीं मिलता है। इससे माता रानी प्रसन्न होती हैं और सुख-शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। कन्या पूजन करने से परिवार के सभी सदस्यों के बीच प्रेम भाव बना रहता है और सभी सदस्यों की तरक्की होती है। 2 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की कन्या की पूजा करने से व्यक्ति को अलग-अलग फलों की प्राप्ति होती है। जैसे कुमारी की पूजा करने से आयु और बल की वृद्धि होती है। त्रिमूर्ति की पूजा करने से धन और वंश वृद्धि, कल्याणी की पूजा से राजसुख, विद्या, विजय की प्राप्ति होती है। कालिका की पूजा से सभी संकट दूर होते हैं और चंडिका की पूजा से ऐश्वर्य व धन की प्राप्ति होती है। शांभवी की पूजा से विवाद खत्म होते हैं और दुर्गा की पूजा करने से सफलता मिलती है। सुभद्रा की पूजा से रोग नाश होते हैं और रोहिणी की पूजा से सभी मनोरथ पूरे होते हैं।
कन्या पूजा का शुभ मुहूर्त
नवमी तिथि – 13 अक्टूबर रात 08 बजकर 07 मिनट से 14 अक्टूबर को शाम 06 बजकर 52 मिनट तक रहेगी।
कन्या पूजा का शुभ मुहूर्त – 11 बजकर 43 मिनट से 12 बजकर 30 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त में रहेगा।
रवि योग – सुबह 09 बजकर 36 मिनट से अगले दिन 06 बजकर 22 मिनट से।

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