नासा ने माना बिना संस्कृत के बोलने वाला कंप्यूटर नहीं बन सकता- निशंक

नई दिल्ली : केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने बॉम्बे आईआईटी के 57वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि संस्कृत एक वैज्ञानिक भाषा है। उन्होंने कहा कि इस बात को अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भी माना है। उन्होंने कहा कि नासा ने ऐसा इसलिए माना क्योंकि यह एक एेसी भाषा है जिसमें शब्दों को जिस तरह लिखा जाता है उसी तरह वे बोला जाता है। निशंक ने दावा किया कि भविष्य में चलता-फिरता या बोलने वाले कंप्यूटर के अविष्कार के ‌लिए संस्कृत की आवश्यकता पड़ेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि परमाणु और अणु की खोज ऋषि चरक नेे की थी।

बोलने वाले कंप्यूटर बनाने की तैयारी : नासा

दीक्षांत समारोह में निशंक ने कहा कि नासा की ओर से बयान आया है कि बोलने वाले कंप्यूटर का अविष्कार संस्कृत से ही संभव है। दरअसल, अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा बोलने वाले कंप्यूटर के अविष्कार की तैयारी कर रहा है।

वैश्विक गुरु के तौर पर स्थापित करने का लक्ष्य

रमेश पोखरियाल निशंक ने दीक्षांत समारोह में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 तक बॉम्बे आईआईटी को शिक्षा में वैश्विक गुरु के तौर पर स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार के लक्ष्य को पूरा करने में आईआईटी को भी अपनी भूमिका निभानी पड़ेगी। इसके अलावा उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ संस्कृत भाषा को जोड़ना चाहिए।

बता दें कि 22 जुलाई को संसद में कहा गया था कि भारत में अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) के लिए किया गया खर्च पिछले 10 सालों में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 0.7 फीसदी रहा है।

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