इन तीन दिन गलती से भी बाल-नाखून न काटें

कोलकाताः हिन्दू धर्म में ऐसे हजारों नियम हैं जिसका वैज्ञानिक कारण है। या आप चाहे तो इन बातों को धर्म से जोड़कर न देखें। परंपराएं सैकड़ों-हजारों वर्षों के अनुभव के आधार पर विकसित होती हैं। उनमें से कुछ अतार्किक और अवैज्ञानिक होती हैं और कुछ तार्किक और वैज्ञानिक। दोनों में फर्क करना मुश्किल है।
जब गहराई और बारीकी से अध्ययन और विश्लेषण करते हैं, तो हम पाते हैं कि अधिकांश परंपराओं और रीति-रिवाजों के पीछे एक सुनिश्वित वैज्ञानिक कारण होता है। अनुभव, उदाहरण, आंकड़े और परिणामों के आधार पर ही कोई नियम या परंपरा धर्म का हिस्सा बन जाती है और समाज उसे मान्यता दे देता है। उन्हीं में से एक है- बाल और नाखूनों के काटने के संबंध में नियम।
परंपरा और समाज की आम धारणा के अनुसार बाल और नाखून काटने के विषय में स्पष्ट संकेत प्राप्त होता कि शनिवार, मंगलवार और गुरुवार के दिन बाल और नाखून भूलकर भी नहीं काटना चाहिए, पर आखिर ऐसा क्यों?

ज्योतिष के अनुसार आम मान्यता है कि गुरुवार को बाल काटने, शेविंग करने और नाखून काटने से पुत्र पर संकट हो सकता है।
हालांकि इससे अलग धारणा है कि शनिवार, मंगलवार और गुरुवार के दिन ग्रह-नक्षत्रों की दशाएं तथा अनंत ब्रह्मांड में से आने वाली अनेकानेक सूक्ष्मातिसूक्ष्म किरणें मानवीय मस्तिष्क पर अत्यंत संवेदनशील प्रभाव डालती हैं।यह स्पष्ट है कि इंसानी शरीर में अंगुलियों के अग्र भाग तथा सिर अत्यंत संवेदनशील होते हैं। कठोर नाखूनों और बालों से इनकी सुरक्षा होती है इसीलिए ऐसे प्रतिकूल समय में इनका काटना शास्त्रों में वर्जित, निंदनीय और अधार्मिक कार्य माना गया है।

 

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