शिवसेना का तंज, ट्रंप के स्वागत के लिए मोदी ने शुरू की ‘गरीबी छुपाओ’ योजना

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मुंबई : शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दो‌ दिवसीय भारत दौरे की तैयारियों की तुलना गुलाम हिंदुस्तान में अंग्रेजों के स्वागत की तैयारियों से की है। सामना में लिखा है, ‘अगले हफ्ते अमेरिका के राष्ट्रपति अर्थात ‘बादशाह’ भारत के दौरे पर आने वाले हैं, इसलिए हमारे देश में जोर-शोर से तैयारियां हो रही हैं। इस तरह की तैयारियां तब की जाती थीं जब गुलाम हिंदुस्तान में इंग्लैंड के राजा आते थे। मोदी सरकार, गुजरात में ‘गरीबी छुपाओ’ योजना शुरू कर चुकी है।’

‘गधे को भी बाप कहना पड़ता है’

केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए सामना में शिवसेना ने लिखा, ‘बादशाह’ ट्रम्प क्या खाते हैं या पीते हैं? उनकी जरूरत की हर चीज पर बारीकी से नजर रखी जा रही है। जब इंग्लैंड के राजा गुलाम हिंदुस्तान में आते थे तो उनके स्वागत के लिए ऐसी ही तैयारियां होती थीं। डोनाल्ड ट्रम्प कोई धर्मराज या सत्यवादी नहीं हैं बल्कि पैसे के दम पर राजनीति करने वाले एक उद्योगपति हैं। लेकिन दुनिया में यही मानकर व्यवहार करना पड़ता है कि सत्ता में बैठे व्यक्ति के पास होशियारी की गंगोत्री है। ‘मौका पड़े तो गधे को भी बाप कहना पड़ता है’, यही दुनिया की रीति है।’

‘मोदी जी ‘गरीबी छुपाओं’ की योजना शुरू कर चुके हैं’

इसके साथ ही सामना में अहमदाबाद में दीवार का निर्माण किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए। उसमें लिखा है, मोदी ने तय किया कि ट्रंप को पहले गुजरात घुमाया जाए, इस निर्णय का सम्मान होना चाहिए। अहमदाबाद के हवाई अड्डे और सड़कों को सुधारने का काम शुरू हो गया है क्योंकि ट्रम्प उसी रास्ते से आएंगे। क्या इसके लिए नए वित्तीय बजट में अलग से आर्थिक प्रावधान किए गए हैं? सड़कों के सामने लंबी दीवारें खड़ी करने के लिये क्या अमेरिका पैसे देगा? पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ‘गरीबी हटाओं’ का नारा‌ दिया था और मोदी जी ‘गरीबी छुपाओं’ की योजना शुरू कर चुके हैं।’’

राजकोष पर पड़ रहा 100 करोड़ रुपये का भार

पार्टी ने संपादकीय में आगे कहा- ‘ऐसा सुनने में आ रहा है कि ट्रंप केवल 3 घंटे ही अहमदाबाद में ठहरेंगे, लेकिन अहमदाबाद में दीवारें बनवाने के कारण राजकोष पर करीब 100 करोड़ रुपये का भार पड़ रहा है।’

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