सियासी संक्रांति: बिहार में टूटी 26 साल पुरानी परंपरा

पटनाः बिहार में मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा भोज की प्रथा काफी प्रचलित है। राज्य की सत्ता में कायम जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) मकर संक्रांति के अवसर पर पिछले 26 साल से दही-चूड़ा भोज का आयोजन करती आ रही हैं। हालांकि, इस बार कोरोना महामारी के चलते इन राजनीतिक दलों ने दही-चूड़ा भोज का आयोजन नहीं किया।
कोरोना महामारी की वजह से टूटी प्रथा
जदयू के वरिष्ठ नेता वशिष्ठ नारायण सिंह ने दही-चूड़ा भोज को लेकर औपचारिक रूप से संदेश जारी किया। अपने संदेश में उन्होंने कार्यकर्ताओं को बताया कि इस बार कोरोना महामारी के चलते एहतियातन यह परंपरा नहीं निभाई गई। वहीं, हर साल राजद अपने कार्यालय और राबड़ी देवी के आवास पर दही-चूड़ा भोज का आयोजन करती आती थीं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। हालांकि, लालू प्रसाद यादव की तरफ से मकर संक्रांति को लेकर सोशल मीडिया के जरिये एक संदेश जारी किया गया। इस संदेश में उन्होंने पार्टी के सदस्यों से कहा है कि वे गरीबों को दही-चूड़ा खिलाएं।
तेज प्रताप ने लिया मां का आशीर्वाद
राजनीतिक दलों ने भले ही कोरोना महामारी के चलते दही-चूड़ा परंपरा नहीं निभाई, लेकिन राजद नेता तेज प्रताप यादव अपनी मां राबड़ी देवी से आशीर्वाद लेने के बाद लोगों को दही-चूड़ा बांटते नजर आए। उन्होंने इस संबंध में ट्वीट भी किया। उन्होंने लिखा, माता श्री से मिले तिलवा, तिलकुट, आशीर्वाद और प्यार के साथ हम तमाम बिहारवासियों के साथ मकर संक्रांति का पवित्र त्योहार मना रहे हैं। चूड़ा-दही भोज का आयोजन मेरे आवास 2एम स्टैंड रोड पर किया गया है, आप सभी आमंत्रित हैं।
राजद मुखिया ने शुरू की थी परंपरा
राज्य में दही-चूड़ा भोज कराने की परंपरा 1994-95 में आरजेडी मुखिया लालू प्रसाद यादव ने की थी। उन्होंने इस परंपरा की शुरुआत पार्टी से आम लोगों को जोड़ने के लिए किया था। बता दें, चारा घोटाला मामले में उनके जेल चले जाने के बाद भी पार्टी यह परंपरा निभाती चली आई।

 

 

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