महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को ऐसे करें प्रसन्न

कोलकाता : पंचांग के अनुसार 11 मार्च को फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी की तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व है। शिवभक्त इस शिवरात्रि का वर्षभर इंतजार करते हैं। इस दिन बड़ी संख्या में लोग भोलेनाथ का व्रत रखते हैं और पूजा करते हैं। भगवान शिव अपने भक्तों से बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं। भगवान शिव अपने भक्तों के कष्टों को दूर करते हैं। अधिकमास में जब भगवान विष्णु विश्राम करने के लिए पताल लोक में चले जाते हैं ताे उस समय पृथ्वी की बागडोर भगवान शिव के हाथों में होती है। ऐसा माना जाता है कि अधिकमास में भगवान शिव माता पार्वती के साथ पृथ्वी का भ्रमण करते हैं और अपने भक्तों को आर्शीवाद प्रदान करते हैं। महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए विशेष प्रकार की चीजें अर्पित की जाती हैं। इनमें से एक है बेल पत्र जिसे बेलपत्री, बिल्वपत्र भी कहा जाता है। महाशिवरात्रि पर की जाने वाली भगवान शिव की पूजा बेलपत्र के बिना अधूरी मानी जाती है।
बेलपत्र क्यों चढ़ाए जाते हैं
भगवान शिव पर बेलपत्र चढ़ाए जाने के पीछे ऐसा माना जाता है कि जब देवताओं और असुरों के मध्य समुद्र मंथन हुआ तो इस मंथन से जब हलाहल विष निकला तो भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में उतार लिया। हलाहल विष के कारण भगवान भोलेनाथ के कंठ में जलन आरंभ हुई जिससे देवता परेशान हो गए। तब इस जलन को दूर करने के लिए और भगवान शिव को आराम देने के लिए देवताओं ने उनका जलाभिषेक किया और मस्तिष्क को शीतलता प्रदान करने के लिए बेलपत्र चढ़ाए गए। इसलिए भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाए जाते है।
भगवान शिव पर इस मंत्र से चढ़ाए बेलपत्र
नमो बिल्ल्मिने च कवचिने च नमो वर्म्मिणे च वरूथिने च
नमः श्रुताय च श्रुतसेनाय च नमो
दुन्दुब्भ्याय चा हनन्न्याय च नमो घृश्णवे॥
दर्शनं बिल्वपत्रस्य स्पर्शनम्‌ पापनाशनम्‌ ।
अघोर पाप संहारं बिल्व पत्रं शिवार्पणम्‌ ॥
त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रिधायुधम्‌ ।
त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्‌ ॥
अखण्डै बिल्वपत्रैश्च पूजये शिव शंकरम्‌ ।
कोटिकन्या महादानं बिल्व पत्रं शिवार्पणम्‌ ॥
गृहाण बिल्व पत्राणि सपुश्पाणि महेश्वर ।
सुगन्धीनि भवानीश शिवत्वंकुसुम प्रिय ॥

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