लॉकडाउन का असर मधुमेह नियंत्रण पर भी

 

 

कोलकाता : कोलकाता के लोग घर पर डायबिटीज की रोकथाम के लिए प्रयास कर रहे हैं। पिछले दिनों हुए लॉकडाउन का असर डायबिटीज नियंत्रण पर पड़ा। कोलकाता में 56 साल की औसत आयु वाले लगभग 1200 लोग एक मूल्यांकन का हिस्सा बने, जिनमें से 61% पुरुष थे, और 39% महिलाएँ थीं। एचबीए 1 सी के स्तर में कमी डायबिटीज मैनेजमेंट में कोविड-19 महामारी के दौरान सुधार का संकेत देता है। इंडिया डायबिटीज केयर इंडेक्स (आईडीसीआई) के नवीनतम निष्कर्षों से पता चलता है कि पिछली तिमाही की तुलना में कोलकाता में अप्रैल से जून 2020 तक हेमोग्लोबिन या एचबीए सी का स्तर 8.07% से घटकर 7.97% हो गया।
एचबीए 1 सी की मात्रा एक व्यक्ति में तीन महीने में औसत रक्त शर्करा के स्तर (ब्लड ग्लूकोस लेवल) के बारे में जानकारी देती है और लंबे समय के लिए रक्त शर्करा को नियंत्रण में रखने के लिए सर्वोत्तम-अनुशंसित संकेतकों में से एक है। कोलकाता में 56 साल की औसत आयु वाले लगभग 1200 लोग इस मूल्यांकन का हिस्सा बने, जिनमें से 61% पुरुष थे, और 39% महिलाएं थीं। इसके अलावा, तिमाही में औसत पोस्ट प्रैंडिअल ग्लूकोज लेवल 251 एमजी / डीएल था, और फास्टिंग ग्लूकोज लेवल 172 एमजी / डीएल था।
किया सोशल डिस्टेंसिंग का पालन, सेहत पर पड़ा असर
कोलकाता में एचबीए 1 सी के स्तर के बारे में डिपार्टमेंट ऑफ एंडोक्रिनोलॉजी, केपीसी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के प्रोफेसर डॉ. अनिर्बान मजुमदार ने कहा, “नवीनतम आईडीसीआई की खोज सकारात्मक है और दर्शाती है कि डाइबिटिक लोग कोविड-19 के कारण सोशल डिस्टेंसिंग से जुड़े प्रतिबंधों का पालन करते हुए अपने घरों में रहकर भी अपनी बीमारी के प्रबंधन के बारे में सोच रहे हैं। मुझे आशा है कि एचबीए 1 सी के स्तर में कमी की यह सकारात्मक प्रवृत्ति महामारी के खत्म होने के बाद भी जारी रहेगी।”
एचबीए 1 सी स्तर में सुधार की प्रवृत्ति राहत का संकेत है क्योंकि डाइबिटीज़ से पीड़ित लोगों को कोविड-19 से जुडी गंभीर जटिलताओं का अधिक खतरा है। किसी भी चेतावनी के संकेत जैसे कि सांस लेने में कठिनाई या सांस की तकलीफ, बुखार, सूखी खांसी, थकान, दर्द , गले में खराश, सिरदर्द, स्वाद या गंध ना आने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए और तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।
वर्तमान में, भारत में 77 मिलियन से अधिक लोग डाइबिटीज से पीड़ित हैं।  नोवी नॉर्डिस्क   एजुकेशन फाउंडेशन के ट्रस्टी डॉ अनिल शिंदे ने कहा कि “भारत डायबिटीज केयर इंडेक्स कार्यक्रम के जरिए प्राप्त हुए तिमाही के आंकड़ों ने हमें देश के प्रमुख शहरों में एचबीए1सी के स्तर के ट्रैंड को पहचानने में मदद की है।
हमने देखा है कि गुवाहाटी , चंडीगढ़, हैदराबाद, गोवा और जयपुर जैसे शहरों में डाइबिटीज़ से पीड़ित लोग स्वस्थ आहार और नियमित व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करते हुए सख्त नियम का पालन करके वर्तमान परिदृश्य में एचबीए1 सी के स्तर कम बनाए रखने में सक्षम है। फ़िलहाल जब हमारे चिकित्सा संस्थान कोविड-19 महामारी से निपटने का पुरज़ोर प्रयास कर रहे हैं, तब लोगों को घर पर डायबिटीज मैनेजमेंट के लिए हर संभव प्रयास करने की सलाह दी जाती है।”

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