एक गुणकारी खाद्य पदार्थ है ‘अलसी’

 

सुमित्रनंदन पंत की एक कविता है ‘ग्रामश्री’ जिसमें उन्होंने गाँव के अद्वितीय प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ वहाँ उत्पन्न होने वाले विभिन्न फल-फूलों, सब्जियों तथा जौ, गेहूँ, मटर, अरहर व सरसों आदि अन्य अनेकानेक फसलों का भी रोचक वर्णन किया है। ऐसी ही एक फसल अथवा तिलहन तीसी भी है, जिसके आकर्षक नीले फूलों को नीलम नामक रत्न की कली बतलाते हुए पंतजी लिखते हैं:

उड़ती भीनी तैलाक्त गंध,

फूली सरसों पीली-पीली,

लो हरित धरा से झाँक रही,

नीलम की कलि तीसी नीली।

कविता ‘ग्रामश्री’ में वर्णित तीसी वास्तव में क्या है? तीसी को अधिकांश लोग अलसी के नाम से जानते हैं। तीसी अथवा अलसी रबी के मौसम में उगाया जानेवाला एक महत्त्वपूर्ण तिलहन है। अंग्रेजी में अलसी को लिनसीड अथवा फ्लेक्ससीड के नाम से जाना जाता है। यह लाइनेसी कुल का एक एकवर्षीय पौधा है अलसी का वैज्ञानिक नाम है लाइनम यूसीटेटिसिमम

अलसी या तीसी समषीतोष्ण प्रदेशों में उगाया जानेवाला पौधा है। अलसी भारत में भी पर्याप्त मात्र में पैदा होती है और इसकी कई किस्में यहाँ पाई जाती हैं, जिसमें रंगों के अनुसार लाल, सफेद और धूसर तीन प्रजातियाँ प्रमुख हैं। अलसी का पौधा प्राय: दो-ढाई फुट ऊँचा होता है जिसमें डालियाँ बहुत कम होती हैं। केवल दो या तीन लंबी, कोमल व सीधी टहनियाँ निकलती हैं। अलसी के पौधे की पत्तियों की ऊपरी सतह चिकनी होती है लेकिन निचली सतह पर उभरी हुई शिराएँ पाई जाती हैं। अलसी के पौधों पर नीले-बैंगनी रंग के फूल आते हैं जो बड़े आकर्षक लगते हैं।

अलसी के पौधे के एक फूल में पाँच पंखुडियाँ तथा पाँच पुंकेसर होते हैं। अलसी के एक पौधे पर 60 से लेकर 120 तक फल लगते हैं। प्रत्येक फल में पाँच कोष्ठक होते हैं और हर कोष्ठक में सामान्यत: दो बीज बनते हैं। इस तरह प्रत्येक फल से दस बीज प्राप्त होते हैं। शीत ऋतु में अलसी के पौधों में फूल व फल लगते हैं। फरवरी-मार्च में इसकी फसल तैयार हो जाती है। अलसी के बीजों से तेल निकाला जाता है जो प्राय: जलाने और रंगसाज़ी व लीथो के छापे की स्याही बनाने के काम में आता है। सरसों के तेल की तरह ही बहुत से स्थानों पर अलसी के तेल का प्रयोग साग-सब्जी आदि में भी किया जाता है। इससे वार्निश भी बनाई जाती है।

बीज के साथ-साथ रेशेदार फसलों में भी अलसी का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इसके रेशे से रस्सी, टाट, डोरी और मोटे कपड़े आदि बनाए जाते हैं। रेशे के लिए अलसी उगाने वाले देशों में रूस, नीदरलैण्ड, पोलैण्ड, बेल्जियम, फ्रांस व चीन प्रमुख देश हैं। बीज के लिए अलसी उगाने वाले देशों में भारत के अतिरिक्त अमरीका और अर्जेंटाइना का नाम प्रमुखता से आता है।

आयुर्वेद के अनुसार अलसी के बीजों अथवा चूर्ण को मंदगंधयुक्त, मधुर, बलकारक, स्निग्ध, पित्तनाशक, पचने में भारी, गरम, पौष्टिक, कामोद्दीपक तथा दर्द व सूजन को मिटानेवाला माना गया है। इसे किंचित कफ-वातकारक भी माना गया है, लेकिन साथ ही कफ-पित्त-वात में संतुलन पैदा करनेवाला भी। अलसी के बीजों का क्वाथ या काढ़ा रक्तातिसार व मूत्र संबंधी रोगों में बहुत लाभदायक होता है। अलसी के बीजों का तेल निकालने के बाद जो खली बचती है वह पशुओं के लिए उत्तम आहार माना गया है। अलसी के बीजों अथवा अलसी की खली को पीसकर उसकी पुलटिस बाँधने से सूजन में आराम मिलता है तथा कच्चा फोड़ा शीघ्र पककर जल्दी ठीक हो जाता है।

आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधानों से ज्ञात होता है कि अलसी एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण खाद्य पदार्थ भी है जो अनेक प्रकार के रोगों से पीड़ित व्यक्तियों के लिए बहुत लाभदायक है। मजे की बात यह है कि इसे अपेक्षाकृत कम उपजाऊ भूमि में भी सरलतापूर्वक उगाया जा सकता है। यदि अलसी के पौष्टिक तत्वों की बात करें तो इसमें मुख्य पौष्टिक तत्त्व ओमेगा-3 फैटी एसिड, एलफालिनोलेनिक एसिड, लिगनेन, प्रोटीन व फाइबर होते हैं। इसमें लगभग 18से 20 प्रतिशत ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है अत: अलसी ओमेगा-3 फैटी एसिड का सबसे बड़ा स्रोत है।

ओमेगा-3 फैटी एसिड हमारे शरीर के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण होता है लेकिन यह हमारे शरीर में नहीं बनता। इसे हमें अपने भोजन द्वारा ही प्राप्त करना पड़ता है। प्राय: शरीर में ओमेगा-3 फैटी एसिड की कमी के कारण ही हम उच्च रक्तचाप, हृदयाघात, स्ट्रोक, मधुमेह, मोटापा, गठिया, दमा, कैंसर आदि रोगों का शिकार हो जाते हैं। वास्तव में अलसी में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड ही इसे सुपर फूड का दर्जा दिलाता है। विभिन्न घातक रोगों से बचने के लिए ज़रूरी है कि हम आज से ही अलसी को अपने भोजन में किसी न किसी रूप में अवश्य शामिल कर लें।

अलसी का प्रयोग दैनिक उपभोग के विभिन्न खाद्य पदार्थों में आसानी से किया जा सकता है जैसे ब्रेड, बिस्कुट, केक-पेस्ट्री, आइसक्रीम व अन्य मिठाइयाँ इत्यादि में।

उच्च रक्तचाप व हृदय संबंधी रोगों से पीड़ित व्यक्तियों को नियमित रूप से अलसी का प्रयोग करने की सलाह दी जाती है क्योंकि अलसी में मौजूद तत्व रक्तचाप को कम करने व हृदय को स्वस्थ रखने में सहायता करते हैं। अलसी के इन्हीं गुणों के कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अलसी को सुपर फूड का दर्जा दिया है।

 

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